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Gurugram News: एआई करेगा पशुओं के व्यवहार का विश्लेषण
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ने शोध और नवाचार क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग की प्राध्यापक डॉ. प्रिया बजाज और डॉ. अंजनी रानी ने बताया कि जानवरों के व्यवहार के विश्लेषण के लिए एआई लैस कंप्यूटर डिवाइस को यूनाइटेड किंगडम इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (यूकेआईपीओ) की ओर से डिजाइन रजिस्ट्रेशन प्रदान किया गया है।
इस तकनीकी डिजाइन का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से पशुओं के व्यवहार में आने वाले बदलावों का डेटा-आधारित अध्ययन करना है। इससे पशुओं की विभिन्न गतिविधियों और उनके व्यावहारिक परिवर्तनों को गहराई से समझा जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पशु स्वास्थ्य, पशु कल्याण, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्मार्ट पशुपालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में क्रांति ला सकती है। यह डिवाइस पशुओं में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान करने और उनके उचित प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध होगी। इससे न केवल पशुओं के जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि पशुपालन क्षेत्र की दक्षता में भी वृद्धि होगी।
इसके माध्यम से प्राप्त होने वाले सटीक आंकड़ों से पशुओं के प्रजनन, पोषण और सामाजिक व्यवहार जैसे कई पहलुओं पर गहन शोध संभव हो सकेगा। स्मार्ट पशुपालन को बढ़ावा देने में भी यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और पशुओं का कल्याण सुनिश्चित होगा।
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महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अनीता मिश्रा ने कहा कि यह संस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर बौद्धिक संपदा सृजन की दिशा में यह सफलता महाविद्यालय की मजबूत शोध संस्कृति और नवाचार को प्रदर्शित करती है।
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नोएडा। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ने शोध और नवाचार क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग की प्राध्यापक डॉ. प्रिया बजाज और डॉ. अंजनी रानी ने बताया कि जानवरों के व्यवहार के विश्लेषण के लिए एआई लैस कंप्यूटर डिवाइस को यूनाइटेड किंगडम इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (यूकेआईपीओ) की ओर से डिजाइन रजिस्ट्रेशन प्रदान किया गया है।
इस तकनीकी डिजाइन का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से पशुओं के व्यवहार में आने वाले बदलावों का डेटा-आधारित अध्ययन करना है। इससे पशुओं की विभिन्न गतिविधियों और उनके व्यावहारिक परिवर्तनों को गहराई से समझा जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पशु स्वास्थ्य, पशु कल्याण, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्मार्ट पशुपालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में क्रांति ला सकती है। यह डिवाइस पशुओं में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान करने और उनके उचित प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध होगी। इससे न केवल पशुओं के जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि पशुपालन क्षेत्र की दक्षता में भी वृद्धि होगी।
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इसके माध्यम से प्राप्त होने वाले सटीक आंकड़ों से पशुओं के प्रजनन, पोषण और सामाजिक व्यवहार जैसे कई पहलुओं पर गहन शोध संभव हो सकेगा। स्मार्ट पशुपालन को बढ़ावा देने में भी यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और पशुओं का कल्याण सुनिश्चित होगा।
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महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अनीता मिश्रा ने कहा कि यह संस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर बौद्धिक संपदा सृजन की दिशा में यह सफलता महाविद्यालय की मजबूत शोध संस्कृति और नवाचार को प्रदर्शित करती है।