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Gurugram News: मुख्यमंत्री की घोषणा के 4 साल बाद भी फाइलों में कैद है लाइब्रेरी
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-20 हजार की आबादी वाले नगीना कस्बे में दशकों से उठ रही है मांग
-प्रस्तावित पुस्तकालय में अब तक नहीं लगी एक भी ईंट
संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। पुस्तकों के बिना जीवन अधूरा है और ज्ञान के बिना प्रगति संभव नहीं। यह पंक्तियां नगीना कस्बे की जमीनी हकीकत पर तंज कसती नजर आती हैं। लगभग 20 हजार की आबादी वाले इस कस्बे में दशकों से एक सार्वजनिक पुस्तकालय की मांग की जा रही है, लेकिन विडंबना देखिए कि मुख्यमंत्री की घोषणा के चार साल बाद भी आज तक यहां एक ईंट भी नहीं लगी है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थानीय युवाओं और बुजुर्गों में भारी रोष व्याप्त है।
2021 की रैली में पूर्व सीएम ने किया था वादा:
प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वर्ष 2021 में महुं चोपड़ा में आयोजित एक विशाल विकास रैली के दौरान नगीना में सार्वजनिक पुस्तकालय खोलने की बड़ी घोषणा की थी। उस समय क्षेत्र के लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें पढ़ने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन चार साल बीतने के बाद भी यह घोषणा केवल कागजों तक सीमित है। प्रशासन इसे अमली जामा पहनाने में पूरी तरह विफल रहा है।
हाईटेक दौर में भी पुराने ग्रंथों की जरूरत :
समाजसेवी रजत जैन, सतपाल सैनी, नितिन दूबे, समाजसेवी राधिका जैन का कहना है कि आज का दौर भले ही डिजिटल और हाईटेक हो गया हो, लेकिन शोध और ज्ञान का मूल आधार आज भी हमारी पुस्तकें और पौराणिक ग्रंथ ही हैं। पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं, बल्कि एक ऐसा केंद्र है जहां युवा पीढ़ी और बुजुर्ग एक साथ बैठकर अनुभव साझा कर सकते हैं। शोधकर्ताओं के लिए आज भी पुराने ग्रंथ ही मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं।
सामाजिक ताने-बाने को मिलेगी मजबूती :
रजत जैन ने जोर देकर कहा कि पुस्तकालय खुलने से न केवल युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी, बल्कि यह प्राचीन सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण का केंद्र भी बनेगा। इससे समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को भी मजबूती मिलेगी।
प्रशासन की अनदेखी पर उठे सवाल :
कस्बे के लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्तर की घोषणा पर काम न होना सीधे तौर पर जनहित की अनदेखी है। संबंधित विभाग जानबूझकर सरकार की जनहितकारी घोषणाओं में देरी कर रहा है।स्थानीय निवासियों ने सरकार से मांग की है कि पूर्व मुख्यमंत्री की घोषणा और जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए नगीना में जल्द से जल्द पुस्तकालय का निर्माण शुरू कराया जाए।
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-प्रस्तावित पुस्तकालय में अब तक नहीं लगी एक भी ईंट
संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। पुस्तकों के बिना जीवन अधूरा है और ज्ञान के बिना प्रगति संभव नहीं। यह पंक्तियां नगीना कस्बे की जमीनी हकीकत पर तंज कसती नजर आती हैं। लगभग 20 हजार की आबादी वाले इस कस्बे में दशकों से एक सार्वजनिक पुस्तकालय की मांग की जा रही है, लेकिन विडंबना देखिए कि मुख्यमंत्री की घोषणा के चार साल बाद भी आज तक यहां एक ईंट भी नहीं लगी है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थानीय युवाओं और बुजुर्गों में भारी रोष व्याप्त है।
2021 की रैली में पूर्व सीएम ने किया था वादा:
प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वर्ष 2021 में महुं चोपड़ा में आयोजित एक विशाल विकास रैली के दौरान नगीना में सार्वजनिक पुस्तकालय खोलने की बड़ी घोषणा की थी। उस समय क्षेत्र के लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें पढ़ने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन चार साल बीतने के बाद भी यह घोषणा केवल कागजों तक सीमित है। प्रशासन इसे अमली जामा पहनाने में पूरी तरह विफल रहा है।
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हाईटेक दौर में भी पुराने ग्रंथों की जरूरत :
समाजसेवी रजत जैन, सतपाल सैनी, नितिन दूबे, समाजसेवी राधिका जैन का कहना है कि आज का दौर भले ही डिजिटल और हाईटेक हो गया हो, लेकिन शोध और ज्ञान का मूल आधार आज भी हमारी पुस्तकें और पौराणिक ग्रंथ ही हैं। पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं, बल्कि एक ऐसा केंद्र है जहां युवा पीढ़ी और बुजुर्ग एक साथ बैठकर अनुभव साझा कर सकते हैं। शोधकर्ताओं के लिए आज भी पुराने ग्रंथ ही मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं।
सामाजिक ताने-बाने को मिलेगी मजबूती :
रजत जैन ने जोर देकर कहा कि पुस्तकालय खुलने से न केवल युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी, बल्कि यह प्राचीन सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण का केंद्र भी बनेगा। इससे समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को भी मजबूती मिलेगी।
प्रशासन की अनदेखी पर उठे सवाल :
कस्बे के लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्तर की घोषणा पर काम न होना सीधे तौर पर जनहित की अनदेखी है। संबंधित विभाग जानबूझकर सरकार की जनहितकारी घोषणाओं में देरी कर रहा है।स्थानीय निवासियों ने सरकार से मांग की है कि पूर्व मुख्यमंत्री की घोषणा और जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए नगीना में जल्द से जल्द पुस्तकालय का निर्माण शुरू कराया जाए।
