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Gurugram News: जलभराव से बचाएगी आईआईटी दिल्ली की नई तकनीक
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भूजल रिचार्ज, जल निकासी व्यवस्था को अधिक सक्षम और पर्यावरण अनुकूल बनाने पर जीएमडीए का जोर
नंबर गेम- 02 रिचार्ज संरचनाओं का किया जा रहा निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने एक्वीफर आधारित वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की पायलट योजना शुरू की है। इसके तहत सेक्टर-31 और सेक्टर-54 में दो रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना आईआईटी दिल्ली के तकनीकी सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है।
जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने बताया कि प्राधिकरण शहर की जल निकासी व्यवस्था को अधिक सक्षम और पर्यावरण अनुकूल बनाने पर काम कर रहा है। इसके लिए आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया जा रहा है। एक्वीफर आधारित वर्षा जल संचयन प्रणाली शहरी क्षेत्रों की दो बड़ी चुनौतियों, मानसून के दौरान जलभराव और लगातार गिरते भूजल स्तर का प्रभावी समाधान बन सकती है।
पायलट परियोजना के तहत सेक्टर-54 स्थित एआईटी चौक के निकट स्मृति वाटिका पार्क और सेक्टर-31 में वर्षा जल संचयन संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। इनका डिजाइन आईआईटी दिल्ली के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है, जबकि निर्माण कार्य संस्थान के शोधार्थियों की निगरानी में कराया जा रहा है।
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सेक्टर-31 में बोरवेल तैयार
स्मृति वाटिका पार्क में लगभग 480-480 फीट गहराई के दो रिचार्ज बोरवेल तैयार किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से वर्षा जल को भूजल स्तर तक पहुंचाया जाएगा। वहीं, सेक्टर-31 में करीब 500 फीट गहरा रिचार्ज बोरवेल तैयार कर आवश्यक रिचार्ज स्ट्रक्चर भी स्थापित किया गया है। मीणा ने बताया कि इन संरचनाओं का निर्माण मास्टर सड़कों और ग्रीन बेल्ट के किनारे किया जा रहा है। इससे मानसून के दौरान बहने वाले वर्षा जल को एकत्र कर वैज्ञानिक तरीके से जमीन के भीतर पहुंचाया जा सके।
जल निकासी प्रबंधन के रूप में होगा काम
फिल्टर किए गए वर्षा जल को भूमिगत चिन्हित मोटी बजरी और दरारयुक्त एक्वीफर परतों तक पहुंचाया जाएगा। सड़कों पर वर्षा जल का बहाव और अस्थायी जलभराव भी कम होगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जलभराव संभावित क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन और शहरी जल निकासी प्रबंधन के एकीकृत मॉडल के रूप में काम करेगी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना जीएमडीए की व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सेक्टर-1 से 57 तक कुल पांच एक्वीफर आधारित वर्षा जल संचयन संरचनाएं विकसित की जानी हैं।
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नंबर गेम- 02 रिचार्ज संरचनाओं का किया जा रहा निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने एक्वीफर आधारित वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की पायलट योजना शुरू की है। इसके तहत सेक्टर-31 और सेक्टर-54 में दो रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना आईआईटी दिल्ली के तकनीकी सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है।
जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने बताया कि प्राधिकरण शहर की जल निकासी व्यवस्था को अधिक सक्षम और पर्यावरण अनुकूल बनाने पर काम कर रहा है। इसके लिए आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया जा रहा है। एक्वीफर आधारित वर्षा जल संचयन प्रणाली शहरी क्षेत्रों की दो बड़ी चुनौतियों, मानसून के दौरान जलभराव और लगातार गिरते भूजल स्तर का प्रभावी समाधान बन सकती है।
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पायलट परियोजना के तहत सेक्टर-54 स्थित एआईटी चौक के निकट स्मृति वाटिका पार्क और सेक्टर-31 में वर्षा जल संचयन संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। इनका डिजाइन आईआईटी दिल्ली के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है, जबकि निर्माण कार्य संस्थान के शोधार्थियों की निगरानी में कराया जा रहा है।
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सेक्टर-31 में बोरवेल तैयार
स्मृति वाटिका पार्क में लगभग 480-480 फीट गहराई के दो रिचार्ज बोरवेल तैयार किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से वर्षा जल को भूजल स्तर तक पहुंचाया जाएगा। वहीं, सेक्टर-31 में करीब 500 फीट गहरा रिचार्ज बोरवेल तैयार कर आवश्यक रिचार्ज स्ट्रक्चर भी स्थापित किया गया है। मीणा ने बताया कि इन संरचनाओं का निर्माण मास्टर सड़कों और ग्रीन बेल्ट के किनारे किया जा रहा है। इससे मानसून के दौरान बहने वाले वर्षा जल को एकत्र कर वैज्ञानिक तरीके से जमीन के भीतर पहुंचाया जा सके।
जल निकासी प्रबंधन के रूप में होगा काम
फिल्टर किए गए वर्षा जल को भूमिगत चिन्हित मोटी बजरी और दरारयुक्त एक्वीफर परतों तक पहुंचाया जाएगा। सड़कों पर वर्षा जल का बहाव और अस्थायी जलभराव भी कम होगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जलभराव संभावित क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन और शहरी जल निकासी प्रबंधन के एकीकृत मॉडल के रूप में काम करेगी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना जीएमडीए की व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सेक्टर-1 से 57 तक कुल पांच एक्वीफर आधारित वर्षा जल संचयन संरचनाएं विकसित की जानी हैं।