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Gurugram News: उत्पादन लागत में वृद्धि, नहीं बढ़ रही तैयार माल की कीमतें

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jun 2026 05:05 PM IST
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Increase in production costs; prices of finished goods not raised.
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बढ़ती लागत की मार से गुरुग्राम का ऑटोमोबाइल सेक्टर व छोटे उद्यमी परेशान

संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। वैश्विक तनाव के कारण बढ़ती लागत की मार से गुरुग्राम का ऑटोमोबाइल सेक्टर चरमरा गया है। ऑटो पार्ट निर्माताओं के विदेशी ऑर्डर घटने से उत्पादन ठप है और कई फैक्टरियां बंद होने की कगार पर हैं। डीजल, कच्चे माल, माल ढुलाई और बढ़ती मजदूरी ने उद्यमियों की कमर तोड़ दी है। इस औद्योगिक मंदी के कारण हजारों मजदूरों के रोजगार पर सीधा संकट मंडरा रहा है। पेस सिटी, उद्योग विहार और बसई जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में हालात चिंताजनक हैं। आर्थिक नुकसान के इस चक्रव्यूह से उबरने के लिए अब स्थानीय उद्योगपतियों ने सरकार से तुरंत वित्तीय राहत और मदद की गुहार लगाई है।

उद्यमी बोले- सरकार के समर्थन की है जरूरत
फैक्टरियों ने काम का समय कम कर दिया है। कम उत्पादन कम घाटा, कुछ ने काम बंद भी कर रखा है। कच्चे माल, ढुलाई, डीजल, बिजली, मजदूरी दर सबकुछ बढ़ा है और इसमें निरंतर प्रवाह से बढ़ोतरी हो रही है, हमारी लागत करीब 35 प्रतिशत बढ़ी है लेकिन हमारा सामान खरीदने वालों 7 प्रतिशत कीमतें बढ़ाई हैं। -स्नेहलता भदौरिया, ऑटो पार्ट, उद्यमी, सेक्टर-37
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ऑटो मोबाइल के 4 से 5 प्रतिशत उद्यमियों ने काम ही बंद कर दिया है। उत्पादन लागत में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि काफी परेशान करने वाला है। लोग काम कम कर रहे हैं, जितना ज्यादा काम उतना बड़ा घाटा। स्टील की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ी हैं। उत्पादन कम हुआ है, ऑर्डर भी कम मिल रहे है। -उमेश कुमार, अध्यक्ष इलेक्ट्रोप्लेटिंग वेलफेयर एसोसिएशन
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हम अपने उत्पाद किसी को देते हैं, वे इसमें मूल्य संवर्धन कर मारुति, होंडा, हीरो जैसी बड़ी कंपनियों को अगला उत्पाद देते हैं। लागत जिस तरह बढ़ रहा है, वैसी कीमतें नहीं मिल रही है। हमें कम ऑर्डर मिल रहे हैं। हमारे उत्पादों में मार्जिन काफी कम होती है। -केएस भड़ाना, ऑटो पार्ट उद्यमी कादीपुर औद्योगिक क्षेत्र

सरकार बिजली पर तो सब्सिडी दे सकती है। हमारी पेमेंट देर से मिल रही है। छोटे उद्योग बंद हो रहे हैं। पूरा उद्योग चक्रव्यू में फंसता नजर आ रहा है। सरकार को छोटे उद्योगों को संभालने के उपाय करने चाहिए। बैंक और बिजली निगम ये दो सेक्टर तो मदद कर ही सकते हैं। -हरीश गुप्ता, उद्यमी, दौलताबाद औद्योगिक क्षेत्र
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