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Gurugram News: मौत के बाद उपचार के नाम पर वसूले लाखों रुपये, हंगामा
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सड़क हादसे में घायल हुआ था युवक, अस्पताल प्रबंधन का दावा कि कार्डिक अरेस्ट से हुई थी मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। युवक की मौत होने पर बुधवार रात को परिजनों ने जमकर हंगामा कर दिया। परिजनों ने पार्क अस्पताल प्रबंधन पर मौत होने के बाद भी उपचार के नाम पर लाखों रुपये वसूलने के आरोप लगाया। परिजनों की भीड़ को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया। परिजन कई घंटों तक अस्पताल परिसर के बाहर प्रदर्शन करते रहे। काफी देर बाद पुलिस ने परिजनों को समझाया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। हालांकि, प्रदर्शन को लेकर पुलिस को कोई भी शिकायत नहीं मिली है। हंगामा करने वालों पर हल्के पुलिस बल का भी इस्तेमाल किया गया। सड़क हादसे में घायल होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने आरोपी चालक को घटना के बाद ही गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी चालक की पहचान प्रमोद के रूप में हुई है।
मृतक की पहचान सेक्टर-66 निवासी अजहर उल इस्लाम के रूप में हुई है। वह डिलिवरी बॉय का काम करता था। मृतक के पिता मोफिजुर रहमान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 23 मार्च यानी सोमवार की सुबह करीब चार बजे फिरदौस अली ने फोन करके सूचना दी कि बेटा ऑटो में दूध देने के लिए जा रहा था। उसी दौरान सेंट जेवियर्स स्कूल के पास एक टेंपो ने टक्कर मार दी थी। हादसे में बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। उन्हें बताया गया कि टेंपो रेड लाइट तोड़ते हुए तेज रफ्तार में आया था।
एम्स में रेफर के नाम पर मांगे गए डेढ़ लाख
उन्होंने बताया कि बेटे को जब सेक्टर-47 स्थित निजी अस्पताल में लेकर गए तो वहां पर चिकित्सकों ने बताया कि बेटे के करीब 90 प्रतिशत शरीर के अंग काम नहीं कर रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि सोमवार से बुधवार शाम तक अस्पताल प्रबंधन ने युवक के उपचार के नाम पर चार लाख रुपये का बिल दे दिया। परिवार की तरफ से ढाई लाख रुपये जमा भी किए गए थे। आरोप है कि बुधवार शाम को जब अस्पताल से युवक को शिफ्ट के लिए कहा गया तो अस्पताल प्रबंधन पहले तो इस बात को टालते रहे। इसके बाद एम्स में रेफर करने के नाम पर डेढ़ लाख रुपये मांगे गए। इसी दौरान अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि युवक की मौत हो चुकी है। इस बात पर परिजनों ने हंगामा करते हुए आरोप लगाया कि युवक की मौत पहले ही हो चुकी थी। अस्पताल उपचार के नाम पर उनसे रुपये वसूल रहा था।
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अस्पताल प्रबंधन का दावा कि एंबुलेंस में शिफ्ट करने के दौरान कार्डियक अरेस्ट से हुई थी मौत
पार्क अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जब घायल को अस्पताल में उपचार के लिए लाने के एक घंटे के अंदर ही ऑपरेशन करना शुरू कर दिया था। युवक के सिर पर गंभीर चोट थी। सभी जानकारी परिजनों को दी जा रही थी। उनके हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। परिवार की तरफ से कहा गया था कि वह घायल को पश्चिम बंगाल लेकर जाएंगे। घायल की हालत को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने मना किया। इसके बाद परिवार ने एम्स में ले जाने की बात कही। इस पर उन्हें वेंटिलेटर के साथ एंबुलेंस और चिकित्सक के लिए कहा गया। जब घायल को एंबुलेंस में शिफ्ट किया जा रहा था। उसी दौरान घायल को कार्डिक अरेस्ट आ गया था। इसके चलते उसकी मौत हो गई।
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हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस बल को तैनात कर दिया गया था। परिवार को समझाने के बाद मामला शांत हो सका। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। - अमित भाटिया, एसीपी सदर
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। युवक की मौत होने पर बुधवार रात को परिजनों ने जमकर हंगामा कर दिया। परिजनों ने पार्क अस्पताल प्रबंधन पर मौत होने के बाद भी उपचार के नाम पर लाखों रुपये वसूलने के आरोप लगाया। परिजनों की भीड़ को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया। परिजन कई घंटों तक अस्पताल परिसर के बाहर प्रदर्शन करते रहे। काफी देर बाद पुलिस ने परिजनों को समझाया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। हालांकि, प्रदर्शन को लेकर पुलिस को कोई भी शिकायत नहीं मिली है। हंगामा करने वालों पर हल्के पुलिस बल का भी इस्तेमाल किया गया। सड़क हादसे में घायल होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने आरोपी चालक को घटना के बाद ही गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी चालक की पहचान प्रमोद के रूप में हुई है।
मृतक की पहचान सेक्टर-66 निवासी अजहर उल इस्लाम के रूप में हुई है। वह डिलिवरी बॉय का काम करता था। मृतक के पिता मोफिजुर रहमान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 23 मार्च यानी सोमवार की सुबह करीब चार बजे फिरदौस अली ने फोन करके सूचना दी कि बेटा ऑटो में दूध देने के लिए जा रहा था। उसी दौरान सेंट जेवियर्स स्कूल के पास एक टेंपो ने टक्कर मार दी थी। हादसे में बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। उन्हें बताया गया कि टेंपो रेड लाइट तोड़ते हुए तेज रफ्तार में आया था।
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एम्स में रेफर के नाम पर मांगे गए डेढ़ लाख
उन्होंने बताया कि बेटे को जब सेक्टर-47 स्थित निजी अस्पताल में लेकर गए तो वहां पर चिकित्सकों ने बताया कि बेटे के करीब 90 प्रतिशत शरीर के अंग काम नहीं कर रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि सोमवार से बुधवार शाम तक अस्पताल प्रबंधन ने युवक के उपचार के नाम पर चार लाख रुपये का बिल दे दिया। परिवार की तरफ से ढाई लाख रुपये जमा भी किए गए थे। आरोप है कि बुधवार शाम को जब अस्पताल से युवक को शिफ्ट के लिए कहा गया तो अस्पताल प्रबंधन पहले तो इस बात को टालते रहे। इसके बाद एम्स में रेफर करने के नाम पर डेढ़ लाख रुपये मांगे गए। इसी दौरान अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि युवक की मौत हो चुकी है। इस बात पर परिजनों ने हंगामा करते हुए आरोप लगाया कि युवक की मौत पहले ही हो चुकी थी। अस्पताल उपचार के नाम पर उनसे रुपये वसूल रहा था।
अस्पताल प्रबंधन का दावा कि एंबुलेंस में शिफ्ट करने के दौरान कार्डियक अरेस्ट से हुई थी मौत
पार्क अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जब घायल को अस्पताल में उपचार के लिए लाने के एक घंटे के अंदर ही ऑपरेशन करना शुरू कर दिया था। युवक के सिर पर गंभीर चोट थी। सभी जानकारी परिजनों को दी जा रही थी। उनके हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। परिवार की तरफ से कहा गया था कि वह घायल को पश्चिम बंगाल लेकर जाएंगे। घायल की हालत को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने मना किया। इसके बाद परिवार ने एम्स में ले जाने की बात कही। इस पर उन्हें वेंटिलेटर के साथ एंबुलेंस और चिकित्सक के लिए कहा गया। जब घायल को एंबुलेंस में शिफ्ट किया जा रहा था। उसी दौरान घायल को कार्डिक अरेस्ट आ गया था। इसके चलते उसकी मौत हो गई।
हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस बल को तैनात कर दिया गया था। परिवार को समझाने के बाद मामला शांत हो सका। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। - अमित भाटिया, एसीपी सदर