सरकार कागजी है ये सुरक्षा व्यवस्था: बसों में पैनिक बटन बने शो-पीस, दबाने पर न आती आवाज और न जलती है लाइट
रोडवेज की करीब 30 वातानुकूलित बसों में पैनिक बटन लगे हुए हैं, लेकिन वे भी शो-पीस बनकर रह गए हैं। कई पुरानी बसों में यह सुविधा उपलब्ध ही नहीं है।
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महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार और रोडवेज भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के बिलकुल अलग है। बसों में अनिवार्य किए गए पैनिक बटन महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। कई सिटी बसों में यह सुविधा है ही नहीं, और जहां है भी, वहां अधिकांश बटन खराब पड़े हैं।
अधिकांश महिला यात्रियों को इन पैनिक बटन की जानकारी तक नहीं
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश महिला यात्रियों को इन पैनिक बटन की जानकारी तक नहीं है। वहीं, जिन महिलाओं को इसकी जानकारी है, उनका अनुभव भी निराशाजनक रहा है। बटन दबाने पर न तो कोई अलार्म बजता है और न ही कोई संकेत मिलता है कि सूचना संबंधित विभाग तक पहुंची है।
तकनीकी खामियां और लापरवाही उजागर
रोडवेज की करीब 30 वातानुकूलित बसों में पैनिक बटन लगे हुए हैं, लेकिन वे भी शो-पीस बनकर रह गए हैं। कई पुरानी बसों में यह सुविधा उपलब्ध ही नहीं है। इससे साफ जाहिर होता है कि सुरक्षा व्यवस्था कागजों में तो है, लेकिन जमीन पर नदारद है।
आपात स्थिति में इस पर भरोसा कैसे करें?
रोडवेज दावा करता है कि महिलाओं को इस सुविधा की जानकारी दी जा रही है, लेकिन बस अड्डों पर न तो कोई घोषणा सुनाई देती है और न ही चालक या परिचालक यात्रियों को इसके बारे में बताते हैं। बसों में इसके उपयोग से जुड़े पोस्टर भी नजर नहीं आते। यात्री नेहा यादव ने बताया कि बस में पैनिक बटन लगा तो है, लेकिन दबाने पर न कोई लाइट जली और न ही कोई आवाज आई। ऐसे में आपात स्थिति में इस पर भरोसा कैसे करें? वहीं संगीता ने कहा अधिकतर सामान्य बसों में पैनिक बटन हैं ही नहीं, और जहां हैं भी, वहां महिलाओं को इसके इस्तेमाल की जानकारी नहीं है। कम से कम बसों में इसके उपयोग के पोस्टर तो लगाने चाहिए। रूपा मलिक और आरती सिंह ने बताया कि ऐसा कोई बटन भी होता है, यह हमें पता ही नहीं था। कभी किसी बस वाले ने हमें बताया ही नहीं इसके बारे में।
मामला संज्ञान में नहीं है। अगर कहीं पैनिक बटन बंद हैं तो उन्हें ठीक कराया जाएगा। महिलाओं को जानकारी देने के लिए उद्घोषणा भी करवाई जाएगी। - गायत्री अहलावत, महाप्रबंधक गुरुग्राम डिपो