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Gurugram News: फॉरेस्ट लैंड में ढाबा संचालित करने संबंधी याचिका खारिज
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- अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में हुई सुनवाई, नगर निगम मानेसर के पक्ष में फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
गुुरुग्राम। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पुनीत सहगल की अदालत ने अरावली प्लांटेशन की जमीन पर पिछले 18 साल से संचालित ढाबा के संचालक की याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले सिविल जज (जूनियर डिविजन) आयुष गर्ग की अदालत ने 10 फरवरी को सुनवाई करते हुए याचिका खारिज की थी। इसके बाद वादी रमेश चंद ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में याचिका दायर की थी। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए नगर निगम मानेसर के पक्ष में फैसला सुनाया है।
मानेसर के कुकरोला गांव निवासी रमेश चंद ने याचिका दायर की थी कि उसे 2008 में ग्राम पंचायत ने 33 साल की लीज पर जमीन दी थी। जिस पर वह ढाबा चला रहा था। उसने अदालत से अपने कब्जे को वैध घोषित करने और प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। वादी का दावा है कि पंजाब विलेज कॉमन लैंड्स रूल्स, 1964 के नियम 6(5) के अनुसार और तत्कालीन सरपंच द्वारा दिए गए मौखिक आश्वासनों के आधार पर यह पट्टा 33 वर्षों तक जारी रहना था। नगर निगम मानेसर ने अदालत में दावे का विरोध करते हुए कहा कि लीज केवल पांच वर्षों के लिए थी।संबंधित भूमि को अरावली प्लांटेशन क्षेत्र बताया गया, जहां गैर वन गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। लीज की अवधि समाप्त होने के बाद वादी का उक्त जमीन पर कोई अधिकार नहीं है। उक्त भूमि वन क्षेत्र में आती है। ऐसे में बिना केंद्र सरकार की अनुमति के किसी भी व्यावसायिक गतिविधि या ढाबा संचालन करने की अनुमति नहीं है।
सुनवाई के दौरान वादी रमेश चंद 33 साल की लीज संबंधित कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। रिकॉर्ड में मौजूद लीज डीड के अनुसार अवधि सीमित थी और वह समाप्त हो चुकी है। ऐसे में इन तथ्यों के आधार पर अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने वादी की अपील को निराधार बताते हुए याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वादी का जमीन पर कब्जा कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
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गुुरुग्राम। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पुनीत सहगल की अदालत ने अरावली प्लांटेशन की जमीन पर पिछले 18 साल से संचालित ढाबा के संचालक की याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले सिविल जज (जूनियर डिविजन) आयुष गर्ग की अदालत ने 10 फरवरी को सुनवाई करते हुए याचिका खारिज की थी। इसके बाद वादी रमेश चंद ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में याचिका दायर की थी। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए नगर निगम मानेसर के पक्ष में फैसला सुनाया है।
मानेसर के कुकरोला गांव निवासी रमेश चंद ने याचिका दायर की थी कि उसे 2008 में ग्राम पंचायत ने 33 साल की लीज पर जमीन दी थी। जिस पर वह ढाबा चला रहा था। उसने अदालत से अपने कब्जे को वैध घोषित करने और प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। वादी का दावा है कि पंजाब विलेज कॉमन लैंड्स रूल्स, 1964 के नियम 6(5) के अनुसार और तत्कालीन सरपंच द्वारा दिए गए मौखिक आश्वासनों के आधार पर यह पट्टा 33 वर्षों तक जारी रहना था। नगर निगम मानेसर ने अदालत में दावे का विरोध करते हुए कहा कि लीज केवल पांच वर्षों के लिए थी।संबंधित भूमि को अरावली प्लांटेशन क्षेत्र बताया गया, जहां गैर वन गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। लीज की अवधि समाप्त होने के बाद वादी का उक्त जमीन पर कोई अधिकार नहीं है। उक्त भूमि वन क्षेत्र में आती है। ऐसे में बिना केंद्र सरकार की अनुमति के किसी भी व्यावसायिक गतिविधि या ढाबा संचालन करने की अनुमति नहीं है।
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सुनवाई के दौरान वादी रमेश चंद 33 साल की लीज संबंधित कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। रिकॉर्ड में मौजूद लीज डीड के अनुसार अवधि सीमित थी और वह समाप्त हो चुकी है। ऐसे में इन तथ्यों के आधार पर अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने वादी की अपील को निराधार बताते हुए याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वादी का जमीन पर कब्जा कानूनी रूप से मान्य नहीं है।

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