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Gurugram News: सेक्टर-30/31 रोड पर सात सिग्नलों ने थामी रफ्तार
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डिवाइडिंग रोड पर रोजाना जाम, वाहन चालक परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएडीए) की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण शहर को जाम मुक्त बनाने की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं। इसका सबसे बड़ा खामियाजा रोजाना हजारों वाहन चालकों को मानसिक तनाव और समय की बर्बादी के रूप में भुगतना पड़ रहा है। शहर का सेक्टर-30/31 डिवाइडिंग रोड इस प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है।
महज 1.9 किलोमीटर के इस छोटे से टुकड़े पर सात ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं। अत्यधिक सिग्नलों के कारण यहां सुबह और शाम के समय वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-48, स्टार मॉल, सेक्टर-31, 40 और सुभाष चौक को जोड़ने वाला यह मुख्य संपर्क मार्ग अब चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि दो किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को 30 मिनट तक का समय लग रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सिग्नलों के बीच की दूरी बहुत कम होने से यातायात की रफ्तार पूरी तरह थम जाती है। लोगों ने मांग की है कि जीएमडीए को दावों से हटकर इस कॉरिडोर का तुरंत वैज्ञानिक ट्रैफिक अध्ययन कराना चाहिए। इस रोड पर नेताजी सुभाष चौक, साउथ सिटी चौक, झाड़सा रोड चौक, राइट यूटर्न, सेक्टर 30 चौक, लेफ्ट टर्न और हाईवे की लाइट शामिल हैं।
योजनाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित
जीएमडीए की शहर में जाम दूर करने की योजनाएं फाइलों तक सीमित हैं। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। पुराना हो या नया गुरुग्राम, जाम की समस्या अब आम हो गई है। -सुखबीर कटारिया, पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता
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इस सड़क पर चार ट्रैफिक सिग्नलों की जरूरत नहीं है, इससे लोग रोज परेशान होते हैं। शहर की बढ़ती आबादी के अनुरूप आधारभूत ढांचे का विकास अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है। -अशोक भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता, सेक्टर-40
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एनएच-48 से नेताजी सुभाष मार्ग को जोड़ने वाली सेक्टर-30 और 31 की डिवाइडिंग रोड पर जाम की समस्या के समाधान के लिए एक्सईएन को सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जरूरत के अनुसार फ्लाईओवर और अंडरपास निर्माण की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। - जगदीश सिंह सरोत, अधीक्षण अभियंता, जीएमडीए
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएडीए) की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण शहर को जाम मुक्त बनाने की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं। इसका सबसे बड़ा खामियाजा रोजाना हजारों वाहन चालकों को मानसिक तनाव और समय की बर्बादी के रूप में भुगतना पड़ रहा है। शहर का सेक्टर-30/31 डिवाइडिंग रोड इस प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है।
महज 1.9 किलोमीटर के इस छोटे से टुकड़े पर सात ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं। अत्यधिक सिग्नलों के कारण यहां सुबह और शाम के समय वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-48, स्टार मॉल, सेक्टर-31, 40 और सुभाष चौक को जोड़ने वाला यह मुख्य संपर्क मार्ग अब चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि दो किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को 30 मिनट तक का समय लग रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सिग्नलों के बीच की दूरी बहुत कम होने से यातायात की रफ्तार पूरी तरह थम जाती है। लोगों ने मांग की है कि जीएमडीए को दावों से हटकर इस कॉरिडोर का तुरंत वैज्ञानिक ट्रैफिक अध्ययन कराना चाहिए। इस रोड पर नेताजी सुभाष चौक, साउथ सिटी चौक, झाड़सा रोड चौक, राइट यूटर्न, सेक्टर 30 चौक, लेफ्ट टर्न और हाईवे की लाइट शामिल हैं।
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योजनाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित
जीएमडीए की शहर में जाम दूर करने की योजनाएं फाइलों तक सीमित हैं। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। पुराना हो या नया गुरुग्राम, जाम की समस्या अब आम हो गई है। -सुखबीर कटारिया, पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता
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इस सड़क पर चार ट्रैफिक सिग्नलों की जरूरत नहीं है, इससे लोग रोज परेशान होते हैं। शहर की बढ़ती आबादी के अनुरूप आधारभूत ढांचे का विकास अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है। -अशोक भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता, सेक्टर-40
एनएच-48 से नेताजी सुभाष मार्ग को जोड़ने वाली सेक्टर-30 और 31 की डिवाइडिंग रोड पर जाम की समस्या के समाधान के लिए एक्सईएन को सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जरूरत के अनुसार फ्लाईओवर और अंडरपास निर्माण की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। - जगदीश सिंह सरोत, अधीक्षण अभियंता, जीएमडीए