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Gurugram News: चंदू बुढ़ेड़ा में 100 एमएलडी का छठा जल संयंत्र बनेगा
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नए संयंत्र के निर्माण में 54 करोड़ रुपये होंगे खर्च, 21 माह में पूरा करने का लक्ष्य
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। शहर की बढ़ती आबादी और पेयजल की मांग को देखते हुए चंदू बुढ़ेड़ा जल संयंत्र परिसर में 100 एमएलडी क्षमता का छठा जल उपचार संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस पर करीब 54 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसे 21 माह में पूरा करने का लक्ष्य है।
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) शहर में पेयजल आपूर्ति बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है। इसी कड़ी में चंदू बुढ़ेड़ा नहरी जल शोधन संयंत्र की क्षमता का विस्तार किया जा रहा है। 100 एमएलडी के नए संयंत्र में अत्याधुनिक और पूर्णतः स्वचालित तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे जल आपूर्ति अधिक सुचारु और सुरक्षित हो सकेगी। परियोजना के तहत एक आधुनिक स्वच्छ जल जलाशय (रिजर्वायर) का निर्माण भी किया जाएगा। साथ ही कच्चे और साफ पानी की आपूर्ति के लिए पंपिंग मशीनरी स्थापित की जाएगी। इसके अलावा स्लज (कीचड़) के निस्तारण के लिए आधुनिक डिवॉटरिंग सिस्टम, प्री व पोस्ट क्लोरीनीकरण, उप-मृदा जल स्तर नियंत्रण, ट्रांसफार्मर और स्कॉडा प्रणाली सहित सभी आवश्यक कार्य किए जाएंगे। इसमें डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और कमीशनिंग के साथ पांच वर्षों तक संचालन व रखरखाव भी शामिल रहेगा। निर्माण के बाद 12 माह की दोष दायित्व अवधि भी निर्धारित की गई है। जीएमडीए के लिए इसके लिए टेंडर जारी कर दिया है। वर्तमान में चंदू बुढ़ेडा संयंत्र में 100 एमएलडी क्षमता की चार यूनिट संचालित हैं, जबकि पांचवीं यूनिट का निर्माण कार्य जारी है, जिसे अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद संयंत्र की कुल क्षमता 500 एमएलडी तक पहुंच जाएगी। जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता अभिनव वर्मा ने बताया कि संयंत्र निर्माण की योजना को सिरे चढ़ाने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जीएमडीए शहर में पानी आपूर्ति को बेहतर करने में लगा हुआ है।
2031 तक 1170 एमएलडी पानी की मांग का अनुमान
फिलहाल शहर में चंदू बुढ़ेड़ा और बसई जल संयंत्रों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। दोंनों संयंत्रों को मिलाकर कुल जलापूर्ति 670 एमएलडी है। वहीं, बसई जल संयंत्र की 100 एमएलडी क्षमता वाली यूनिट-4 के लिए निविदा जारी की गई है, जिसमें तीन दिन के जल भंडारण की सुविधा भी विकसित की जाएगी। अनुमान है कि वर्ष 2031 तक शहर में जलापूर्ति की मांग 1170 एमएलडी तक पहुंच जाएगी। इसे देखते हुए जीएमडीए पेयजल ढांचे को मजबूत करने में जुटा हुआ है।
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गुरुग्राम। शहर की बढ़ती आबादी और पेयजल की मांग को देखते हुए चंदू बुढ़ेड़ा जल संयंत्र परिसर में 100 एमएलडी क्षमता का छठा जल उपचार संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस पर करीब 54 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसे 21 माह में पूरा करने का लक्ष्य है।
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) शहर में पेयजल आपूर्ति बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है। इसी कड़ी में चंदू बुढ़ेड़ा नहरी जल शोधन संयंत्र की क्षमता का विस्तार किया जा रहा है। 100 एमएलडी के नए संयंत्र में अत्याधुनिक और पूर्णतः स्वचालित तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे जल आपूर्ति अधिक सुचारु और सुरक्षित हो सकेगी। परियोजना के तहत एक आधुनिक स्वच्छ जल जलाशय (रिजर्वायर) का निर्माण भी किया जाएगा। साथ ही कच्चे और साफ पानी की आपूर्ति के लिए पंपिंग मशीनरी स्थापित की जाएगी। इसके अलावा स्लज (कीचड़) के निस्तारण के लिए आधुनिक डिवॉटरिंग सिस्टम, प्री व पोस्ट क्लोरीनीकरण, उप-मृदा जल स्तर नियंत्रण, ट्रांसफार्मर और स्कॉडा प्रणाली सहित सभी आवश्यक कार्य किए जाएंगे। इसमें डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और कमीशनिंग के साथ पांच वर्षों तक संचालन व रखरखाव भी शामिल रहेगा। निर्माण के बाद 12 माह की दोष दायित्व अवधि भी निर्धारित की गई है। जीएमडीए के लिए इसके लिए टेंडर जारी कर दिया है। वर्तमान में चंदू बुढ़ेडा संयंत्र में 100 एमएलडी क्षमता की चार यूनिट संचालित हैं, जबकि पांचवीं यूनिट का निर्माण कार्य जारी है, जिसे अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद संयंत्र की कुल क्षमता 500 एमएलडी तक पहुंच जाएगी। जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता अभिनव वर्मा ने बताया कि संयंत्र निर्माण की योजना को सिरे चढ़ाने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जीएमडीए शहर में पानी आपूर्ति को बेहतर करने में लगा हुआ है।
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2031 तक 1170 एमएलडी पानी की मांग का अनुमान
फिलहाल शहर में चंदू बुढ़ेड़ा और बसई जल संयंत्रों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। दोंनों संयंत्रों को मिलाकर कुल जलापूर्ति 670 एमएलडी है। वहीं, बसई जल संयंत्र की 100 एमएलडी क्षमता वाली यूनिट-4 के लिए निविदा जारी की गई है, जिसमें तीन दिन के जल भंडारण की सुविधा भी विकसित की जाएगी। अनुमान है कि वर्ष 2031 तक शहर में जलापूर्ति की मांग 1170 एमएलडी तक पहुंच जाएगी। इसे देखते हुए जीएमडीए पेयजल ढांचे को मजबूत करने में जुटा हुआ है।