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Gurugram News: कीमतों में आसमान छूते सिलिंडर ने जमीन पर थाली से रोटी की गायब
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श्रमिकों की मजबूरी से भर रही मुनाफाखोरों की तिजोरी, 400 रुपये प्रति किलो की गैस ने तोड़ी श्रमिकों की कमर
नंबर गेम - 950 रुपये का सिलिंडर 4 हजार में मिल रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम /बादशाहपुर / सोहना / फर्रुखनगर। रसोई गैस की भारी किल्लत ने आम आदमी विशेषकर दिहाड़ी मजदूरों की कमर तोड़ दी है। गैस एजेंसियों के चक्कर काट-काटकर लोग थक चुके हैं, लेकिन सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। मजबूरी में लोग बड़े सिलिंडर से छोटे सिलिंडरों में 400 प्रति किलो की दर से गैस भरवा रहे हैं। जहां एक सिलिंडर 950 रुपये के हिसाब से मिलता था वहीं अब वो सिलिंडर 4000 रुपये तक खरीदने को लोग मजबूर हैं। कीमत आसमान छू रही है और जमीन पर लोगों की थाली से रोटी गायब हो गई है। ढाबों पर खाने की कीमत बढ़ने से मजदूरों की 500 रुपये की दिहाड़ी बेअसर साबित हो रही है।
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500 रुपये की दिहाड़ी 4 हजार का सिलिंडर
दिनभर पसीना बहाकर 500 रुपये मजदूरी मुश्किल से कमा पाते हैं। अब अगर 4000 रुपये की गैस ही खरीद लेंगे तो घर का राशन कहां से आएगा और बच्चों की फीस कैसे भर पाएंगे। - सुनील, मजदूर
कादीपुर एजेंसी के चक्कर काटते-काटते चप्पल घिस गईं। हर बार कह दिया जाता है कि स्टॉक खत्म है। चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी भी अब महंगी मिल रही है। समझ नहीं आता कि पेट भरें या सिलिंडर भराएं। - गोविंद, मजदूर
यहां खुलेआम बड़े सिलिंडर से छोटे सिलिंडरों में गैस भरी जा रही है। यह न सिर्फ महंगा है, बल्कि खतरनाक भी है। प्रशासन को इस कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगानी चाहिए। - सुजीत, मजदूर
गैस की किल्लत के कारण गरीब लोगों की बेबसी का फायदा उठाकर बिचौलिए उन्हें लूट रहे हैं। गैस नहीं मिलने के कारण ढाबों पर जाकर ज्यादा रुपये देकर खाना खाने को मजबूर हो रहे हैं। - मनोज लाल, मजदूर
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नंबर गेम - 950 रुपये का सिलिंडर 4 हजार में मिल रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम /बादशाहपुर / सोहना / फर्रुखनगर। रसोई गैस की भारी किल्लत ने आम आदमी विशेषकर दिहाड़ी मजदूरों की कमर तोड़ दी है। गैस एजेंसियों के चक्कर काट-काटकर लोग थक चुके हैं, लेकिन सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। मजबूरी में लोग बड़े सिलिंडर से छोटे सिलिंडरों में 400 प्रति किलो की दर से गैस भरवा रहे हैं। जहां एक सिलिंडर 950 रुपये के हिसाब से मिलता था वहीं अब वो सिलिंडर 4000 रुपये तक खरीदने को लोग मजबूर हैं। कीमत आसमान छू रही है और जमीन पर लोगों की थाली से रोटी गायब हो गई है। ढाबों पर खाने की कीमत बढ़ने से मजदूरों की 500 रुपये की दिहाड़ी बेअसर साबित हो रही है।
500 रुपये की दिहाड़ी 4 हजार का सिलिंडर
दिनभर पसीना बहाकर 500 रुपये मजदूरी मुश्किल से कमा पाते हैं। अब अगर 4000 रुपये की गैस ही खरीद लेंगे तो घर का राशन कहां से आएगा और बच्चों की फीस कैसे भर पाएंगे। - सुनील, मजदूर
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कादीपुर एजेंसी के चक्कर काटते-काटते चप्पल घिस गईं। हर बार कह दिया जाता है कि स्टॉक खत्म है। चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी भी अब महंगी मिल रही है। समझ नहीं आता कि पेट भरें या सिलिंडर भराएं। - गोविंद, मजदूर
यहां खुलेआम बड़े सिलिंडर से छोटे सिलिंडरों में गैस भरी जा रही है। यह न सिर्फ महंगा है, बल्कि खतरनाक भी है। प्रशासन को इस कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगानी चाहिए। - सुजीत, मजदूर
गैस की किल्लत के कारण गरीब लोगों की बेबसी का फायदा उठाकर बिचौलिए उन्हें लूट रहे हैं। गैस नहीं मिलने के कारण ढाबों पर जाकर ज्यादा रुपये देकर खाना खाने को मजबूर हो रहे हैं। - मनोज लाल, मजदूर