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Gurugram News: अकीदत के साथ हुई रमजान के तीसरे जुमे की नमाज
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जामा मस्जिद और ईदगाह मस्जिद में दो बार नमाज हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। रमजान के तीसरे जुमे की नमाज पूरी अकीदत के साथ पढ़ी गई। दोपहर में कड़ी धूप के बावजूद रोजेदार दोपहर पौने एक से दो बजे की बीच होने वाली नमाजों में बड़ी संख्या में मौजूद रहे। जामा मस्जिद के पास नमाज के बाद लोगों ने खरीदारी की।
मस्जिद की ओर से हर रोज इफ्तार की विशेष व्यवस्था की गई है। जामा मस्जिद और ईदगाह मस्जिद में दो बार जुमे की नमाज हुई। इमाम जान मुहम्मद ने अपनी तकरीर में रोजे का महत्व बताया। लेजर वैली में तीन बार नमाज पढ़ी गई। तौकीर अहमद अल्वी इस नमाज के आयोजन में शामिल रहे। उन्होंने बताया कि रमजान का दूसरा असरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है। यह चार दिन में खत्म हो जाएगा।
10 मार्च से रमजान का तीसरा अशरा यानी आखिरी दस दिनों की शुरुआत हो रही है। यह अशरा बहुत खास माना जाता है क्योंकि इसी दौरान शबे कद्र की मुबारक रात आती है। इस रात की इबादत हजार महीनों की इबादत से भी बेहतर बताई गई है। इसी अशरे में अल्लाह तआला अपने बंदों के गुनाह माफ करते हैं और कई गुनहगारों को जहन्नुम से आजादी मिलती है, इसलिए मुसलमान इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत, दुआ और कुरान की तिलावत करते हैं। डीएलएफ में भाजपा अल्प संख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शादाब अली के नेतृत्व में तकरीर का आयोजन किया गया। शंकर चौक, सेक्टर 57, पटौदी रोड, पालम विहार व अन्य इलाकों में भी जुमे पर सामूहिक नमाज पढ़ी गई।
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गुरुग्राम। रमजान के तीसरे जुमे की नमाज पूरी अकीदत के साथ पढ़ी गई। दोपहर में कड़ी धूप के बावजूद रोजेदार दोपहर पौने एक से दो बजे की बीच होने वाली नमाजों में बड़ी संख्या में मौजूद रहे। जामा मस्जिद के पास नमाज के बाद लोगों ने खरीदारी की।
मस्जिद की ओर से हर रोज इफ्तार की विशेष व्यवस्था की गई है। जामा मस्जिद और ईदगाह मस्जिद में दो बार जुमे की नमाज हुई। इमाम जान मुहम्मद ने अपनी तकरीर में रोजे का महत्व बताया। लेजर वैली में तीन बार नमाज पढ़ी गई। तौकीर अहमद अल्वी इस नमाज के आयोजन में शामिल रहे। उन्होंने बताया कि रमजान का दूसरा असरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है। यह चार दिन में खत्म हो जाएगा।
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10 मार्च से रमजान का तीसरा अशरा यानी आखिरी दस दिनों की शुरुआत हो रही है। यह अशरा बहुत खास माना जाता है क्योंकि इसी दौरान शबे कद्र की मुबारक रात आती है। इस रात की इबादत हजार महीनों की इबादत से भी बेहतर बताई गई है। इसी अशरे में अल्लाह तआला अपने बंदों के गुनाह माफ करते हैं और कई गुनहगारों को जहन्नुम से आजादी मिलती है, इसलिए मुसलमान इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत, दुआ और कुरान की तिलावत करते हैं। डीएलएफ में भाजपा अल्प संख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शादाब अली के नेतृत्व में तकरीर का आयोजन किया गया। शंकर चौक, सेक्टर 57, पटौदी रोड, पालम विहार व अन्य इलाकों में भी जुमे पर सामूहिक नमाज पढ़ी गई।