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Gurugram News: सरकारी स्कूलों में 15 मई तक होगा अनिवार्य निरीक्षण
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स्कूलों के टॉयलेट, पीने का साफ पानी, मिड डे मील सहित पांच सुविधाओं पर दिया जाएगा विशेष ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सरकारी स्कूलों में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। हाल ही में 29 अप्रैल को आयोजित बैठक में अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि 15 मई तक सभी अडॉप्ट किए गए स्कूलों का निरीक्षण कर हर हाल में पूरा किया जाए। विभाग का कहना है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि निरीक्षण के दौरान पांच जरूरी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें स्कूलों के टॉयलेट, पीने का साफ पानी, मिड डे मील , आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और साइंस लैब शामिल है। इन सुविधाओं की स्थिति खराब मिलने पर संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षक ही नहीं, बल्कि निरीक्षण करने वाले अधिकारी भी जिम्मेदार होंगें। इसके अलावा यह भी बताया गया कि मु्ख्यमंत्री की टीम पहले से ही अलग अलग स्कूलों का निरीक्षण कर रही है और वहां की फोटो व जरूरी जानकारी जुटाई जा रही है।
मई महीने से राज्य स्तर के अधिकारी भी औचक निरीक्षण शुरू करेंगें। ऐसे में किसी भी स्कूल में कमी मिलने पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्कूलों को सुधार के लिए कुछ राहत भी दी है। प्रिंसिपल को अपने स्कूल फंड से एक लाख रुपये तक खर्च करने की अनुमति दी गई है, ताकि छोटे छोटे मरम्मत और जरूरी काम जल्दी पूरे सकें। जिन स्कूलों के पास पर्याप्त फंड नही है, उन्हें 5 मई तक अपनी मांग संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को भेजनी होगी। तय समय सीमा तक मांग नहीं भेजने पर यह माना जाएगा कि स्कूल में सभी संसाधन उपलब्ध हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सरकारी स्कूलों में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। हाल ही में 29 अप्रैल को आयोजित बैठक में अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि 15 मई तक सभी अडॉप्ट किए गए स्कूलों का निरीक्षण कर हर हाल में पूरा किया जाए। विभाग का कहना है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि निरीक्षण के दौरान पांच जरूरी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें स्कूलों के टॉयलेट, पीने का साफ पानी, मिड डे मील , आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और साइंस लैब शामिल है। इन सुविधाओं की स्थिति खराब मिलने पर संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षक ही नहीं, बल्कि निरीक्षण करने वाले अधिकारी भी जिम्मेदार होंगें। इसके अलावा यह भी बताया गया कि मु्ख्यमंत्री की टीम पहले से ही अलग अलग स्कूलों का निरीक्षण कर रही है और वहां की फोटो व जरूरी जानकारी जुटाई जा रही है।
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मई महीने से राज्य स्तर के अधिकारी भी औचक निरीक्षण शुरू करेंगें। ऐसे में किसी भी स्कूल में कमी मिलने पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्कूलों को सुधार के लिए कुछ राहत भी दी है। प्रिंसिपल को अपने स्कूल फंड से एक लाख रुपये तक खर्च करने की अनुमति दी गई है, ताकि छोटे छोटे मरम्मत और जरूरी काम जल्दी पूरे सकें। जिन स्कूलों के पास पर्याप्त फंड नही है, उन्हें 5 मई तक अपनी मांग संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को भेजनी होगी। तय समय सीमा तक मांग नहीं भेजने पर यह माना जाएगा कि स्कूल में सभी संसाधन उपलब्ध हैं।