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Gurugram News: खिलाड़ियों की चोट का इलाज भगवान भरोसे
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- जिले में नहीं स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक, निजी अस्पतालों के भरोसे खिलाड़ी
- स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक खुलवाने को लेकर खेल मंत्री से लगाई है गुहार
शिवम राजपूत
गुरुग्राम। राष्ट्रीय राजधानी से सटे गुरुग्राम के स्टेडियम और नर्सरियों में रोजाना एक हजार से अधिक बच्चे व खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। इस दौरान अगर किसी भी तरह की दुर्घटना में वह घायल हो जाए तो उनके उपचार के लिए स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक तक नहीं है। नागरिक अस्पताल या निजी अस्पताल में उन्हें उपचार कराना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि जिले के खेल विभाग के पास खिलाड़ियों के लिए स्थायी फिजियोथेरेपिस्ट तक उपलब्ध नहीं है। जबकि खिलाड़ियों को अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव, लिगामेंट की चोट, घुटनों की समस्या और फ्रैक्चर जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जिले में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और पदक जीतने की बड़ी-बड़ी बातें तो की जाती हैं, लेकिन खिलाड़ियों की बुनियादी जरूरतों की ओर जिम्मेदार विभागों का ध्यान नहीं है। आलम यह है कि गुरुग्राम जैसे बड़े जिले में खिलाड़ियों के लिए एक भी स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक नहीं है। खेल के दौरान चोट लगने पर खिलाड़ियों को मजबूरन निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। खिलाड़ियों ने इसके लिए कई बार खेल अधिकारी और खेल मंत्री से गुहार लगाई है।
बता दें कि निजी अस्पतालों की भारी-भरकम फीस के कारण खिलाड़ियों को इलाज कराना मुश्किल हो जाता है। कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो आर्थिक तंगी के चलते चोट के बाद सही इलाज नहीं करा पाते, जिससे उनका खेल कॅरिअर प्रभावित हो रहा है। खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का कहना है कि लगातार अभ्यास और प्रतियोगिताओं के दौरान चोट लगना आम बात है। ऐसे समय में यदि तुरंत फिजियोथेरेपी और सही उपचार मिल जाए तो खिलाड़ी जल्दी मैदान में वापसी कर सकता है।
खिलाड़ियों से बातचीत
अभ्यास के दौरान कई बार मांसपेशियों में खिंचाव या चोट लग जाती है। जिले में स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक नहीं होने के कारण निजी अस्पताल जाना पड़ता है। वहां की फीस काफी ज्यादा होती है, जो हर खिलाड़ी के लिए देना आसान नहीं होता। - मांशू, एथलेटिक्स खिलाड़ी
पिछले साल अभ्यास के दौरान घुटने में चोट लग गई थी। इलाज के लिए निजी अस्पताल में जाना पड़ा, जहां जांच और इलाज में काफी पैसा खर्च हो गए। यदि स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक होता तो यह समस्या नहीं होती। - अभिषेक, हैंडबॉल खिलाड़ी
वर्जन
खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक और फिजियो की सुविधा की जरूरत को विभाग भी महसूस करता है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। जैसे ही विभाग की ओर से मंजूरी और संसाधन उपलब्ध होंगे, खिलाड़ियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। - आरती कोहली, जिला खेल अधिकारी
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शिवम राजपूत
गुरुग्राम। राष्ट्रीय राजधानी से सटे गुरुग्राम के स्टेडियम और नर्सरियों में रोजाना एक हजार से अधिक बच्चे व खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। इस दौरान अगर किसी भी तरह की दुर्घटना में वह घायल हो जाए तो उनके उपचार के लिए स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक तक नहीं है। नागरिक अस्पताल या निजी अस्पताल में उन्हें उपचार कराना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि जिले के खेल विभाग के पास खिलाड़ियों के लिए स्थायी फिजियोथेरेपिस्ट तक उपलब्ध नहीं है। जबकि खिलाड़ियों को अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव, लिगामेंट की चोट, घुटनों की समस्या और फ्रैक्चर जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जिले में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और पदक जीतने की बड़ी-बड़ी बातें तो की जाती हैं, लेकिन खिलाड़ियों की बुनियादी जरूरतों की ओर जिम्मेदार विभागों का ध्यान नहीं है। आलम यह है कि गुरुग्राम जैसे बड़े जिले में खिलाड़ियों के लिए एक भी स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक नहीं है। खेल के दौरान चोट लगने पर खिलाड़ियों को मजबूरन निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। खिलाड़ियों ने इसके लिए कई बार खेल अधिकारी और खेल मंत्री से गुहार लगाई है।
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बता दें कि निजी अस्पतालों की भारी-भरकम फीस के कारण खिलाड़ियों को इलाज कराना मुश्किल हो जाता है। कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो आर्थिक तंगी के चलते चोट के बाद सही इलाज नहीं करा पाते, जिससे उनका खेल कॅरिअर प्रभावित हो रहा है। खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का कहना है कि लगातार अभ्यास और प्रतियोगिताओं के दौरान चोट लगना आम बात है। ऐसे समय में यदि तुरंत फिजियोथेरेपी और सही उपचार मिल जाए तो खिलाड़ी जल्दी मैदान में वापसी कर सकता है।
खिलाड़ियों से बातचीत
अभ्यास के दौरान कई बार मांसपेशियों में खिंचाव या चोट लग जाती है। जिले में स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक नहीं होने के कारण निजी अस्पताल जाना पड़ता है। वहां की फीस काफी ज्यादा होती है, जो हर खिलाड़ी के लिए देना आसान नहीं होता। - मांशू, एथलेटिक्स खिलाड़ी
पिछले साल अभ्यास के दौरान घुटने में चोट लग गई थी। इलाज के लिए निजी अस्पताल में जाना पड़ा, जहां जांच और इलाज में काफी पैसा खर्च हो गए। यदि स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक होता तो यह समस्या नहीं होती। - अभिषेक, हैंडबॉल खिलाड़ी
वर्जन
खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक और फिजियो की सुविधा की जरूरत को विभाग भी महसूस करता है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। जैसे ही विभाग की ओर से मंजूरी और संसाधन उपलब्ध होंगे, खिलाड़ियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। - आरती कोहली, जिला खेल अधिकारी