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Gurugram News: हाल जानने गए और ...बेहाल छोड़ गए
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दिल्ली के मालवीय नगर हादसे ने खत्म कर दिया गुरुग्राम के सेक्टर-46 का परिवार
दंपति, दो बेटियों, मां के साथ ही रिश्तेदारों की भी हुई मौत
सोनू यादव
गुरुग्राम। सेक्टर-46 में रहने वाले विवेक अग्रवाल परिवार व रिश्तेदारों के साथ दिल्ली के अस्पताल में भर्ती पिता का हाल जानने गए और ...सब उन्हें बेहाल छोड़ गए। दिल्ली के मालवीय नगर के गेस्ट हाउस में आग के हादसे ने गुरुग्राम के सेक्टर-46 में रहने वाले विवेक अग्रवाल के पूरे परिवार को खत्म कर दिया। इस हादसे के बाद अब परिवार में विवेक के पिता राधेश्याम ही बचे हैं जो खुद अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
सेक्टर-46 के मकान नंबर 3169 में रहने वाले पेशे से सीए विवेक अग्रवाल के परिवार में दो बेटियां जीविशा और वारिया, पत्नी तर्जनी, मां प्रेमलता, पिता राधेश्याम अग्रवाल थे। विवेक के पिता राधेश्याम अग्रवाल को बीमारी के चलते दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुजुर्ग पिता की देखभाल और हाल जानने के लिए विवेक के साथ ही पत्नी, एक बेटी और मां भी दिल्ली गए हुए थे। बंगलुरू में पढ़ने वाली दूसरी बेटी को भी मंगलवार को ही दिल्ली बुला लिया गया था।
राधेश्याम जिस अस्पताल में भर्ती हैं, उसके पास के ही गेस्ट हाउस में परिवार के लोग रुके हुए थे। पत्नी तर्जनी, दो बेटियों, मां के अलावा अन्य रिश्तेदारों को मिलाकर आठ लोगों की मौत हो गई। बाकी रिश्तेदार राजस्थान से ही हाल जानने के लिए दिल्ली आए थे।
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सेक्टर-46 में सीए विवेक का मकान है। आलीशान मकान नंबर 3169 में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर, पहली व दूसरी मंजिल शामिल हैं। बेसमेंट व ग्राउंड फ्लोर पर विवेक का परिवार रहता था। वहीं, पहली व दूसरी मंजिल इन्होंने किराये पर दी हुई हैं। बुधवार दोपहर अमर उजाला की टीम इस मकान पर पहुंची तो गेट बंद मिला। ऊपर ही मंजिल पर रहने वाले व्यक्ति व महिला दिखे। मीडिया जानकार उन लोगों ने कहा कि ये अपने पिता के इलाज के लिए दिल्ली गए हुए हैं, इससे ज्यादा हमें कोई जानकारी नहीं है।
पड़ोसी सुमित ने बताया कि विवेक अग्रवाल पत्नी और दो बेटियों के साथ यहां रहते थे। पड़ोसी के अनुसार, विवेक को उन्होंने कम ही देखा था लेकिन पत्नी और बेटी आए दिन सुबह-शाम पार्क में खेलने और टहलने आती थीं। परिवार शांत स्वभाव का था।
आरडब्ल्यूए ग्रुप पर लोग दे रहे शौक संदेश
सेक्टर-46 के निवासियों के एक ग्रुप में भी बुधवार दोपहर बाद हादसे में परिवार के खत्म होने का शौक संदेश आया। यहीं की निवासी एक महिला ने ये मैसेज ग्रुप में किया। इसमें लिखा कि एक बहुत बड़ी दुखद सूचना मिली है। दिल्ली के हादसे में विवेक, उनकी मां, पत्नी, दो बेटियों व अन्य रिश्तेदारों की आग हादसे मौत हो गई है। सभी सेक्टर-46 के निवासियों के लिए बहुत दुखद असहनीय घटना है। मैसेज में ही लिखा गया कि सभी शव अस्पताल में हैं, कब तक आएंगे, अभी पता नहीं। इसके बाद अन्य निवासियों के शौक व सांत्वना संदेश ग्रुप में आने लगे। सेक्टर निवासी व आरडब्ल्यूए के पूर्व प्रधान राजकुमार ने बताया कि हादसे की सूचना के बाद से सभी सदमे में हैं कि कैसे एक हंसता-खेलता परिवार खत्म हो गया। विवेक व परिवार से काफी अच्छी जान-पहचान थी और अक्सर हम मिलते थे।
एनजीओ से जुड़ी थीं तर्जनी
मालवीय नगर हादसे में जान गंवाने वाली तर्जनी मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली थीं। सेक्टर-46 की आरडब्ल्यूए सेक्रेटरी ऋचा तिवारी ने बताया कि तर्जनी लेकिन सामाजिक कार्यों से जुड़ी थीं। एक एनजीओ के साथ वो सक्रिय रूप से काम करती थीं। हाल ही में उन्होंने इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी कदम रखा था। परिवार में उनकी बड़ी बेटी बंगलुरू में रहती थी। एंजेल मंगलवार शाम करीब चार बजे ही गुरुग्राम पहुंची थी। हादसे के बाद परिवार और परिचितों में गहरा शोक व्याप्त है।
दोस्त बोलीं- तर्जनी मिलनसार थीं, परिवार भी मुश्किल दौर से गुजर रहा था
तर्जनी की करीबी मित्र व सेक्रेटरी ऋचा ने बताया कि दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी। कुछ समय पहले एक इवेंट के सिलसिले में वे देहरादून में साथ रुकी थीं। तर्जनी बेहद मिलनसार और सकारात्मक स्वभाव की थीं। वहीं, परिवार पहले से ही कठिन दौर से गुजर रहा था। दो दिन पहले ही विवेक अग्रवाल के पिता की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
दंपति, दो बेटियों, मां के साथ ही रिश्तेदारों की भी हुई मौत
सोनू यादव
गुरुग्राम। सेक्टर-46 में रहने वाले विवेक अग्रवाल परिवार व रिश्तेदारों के साथ दिल्ली के अस्पताल में भर्ती पिता का हाल जानने गए और ...सब उन्हें बेहाल छोड़ गए। दिल्ली के मालवीय नगर के गेस्ट हाउस में आग के हादसे ने गुरुग्राम के सेक्टर-46 में रहने वाले विवेक अग्रवाल के पूरे परिवार को खत्म कर दिया। इस हादसे के बाद अब परिवार में विवेक के पिता राधेश्याम ही बचे हैं जो खुद अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
सेक्टर-46 के मकान नंबर 3169 में रहने वाले पेशे से सीए विवेक अग्रवाल के परिवार में दो बेटियां जीविशा और वारिया, पत्नी तर्जनी, मां प्रेमलता, पिता राधेश्याम अग्रवाल थे। विवेक के पिता राधेश्याम अग्रवाल को बीमारी के चलते दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुजुर्ग पिता की देखभाल और हाल जानने के लिए विवेक के साथ ही पत्नी, एक बेटी और मां भी दिल्ली गए हुए थे। बंगलुरू में पढ़ने वाली दूसरी बेटी को भी मंगलवार को ही दिल्ली बुला लिया गया था।
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राधेश्याम जिस अस्पताल में भर्ती हैं, उसके पास के ही गेस्ट हाउस में परिवार के लोग रुके हुए थे। पत्नी तर्जनी, दो बेटियों, मां के अलावा अन्य रिश्तेदारों को मिलाकर आठ लोगों की मौत हो गई। बाकी रिश्तेदार राजस्थान से ही हाल जानने के लिए दिल्ली आए थे।
सेक्टर-46 में सीए विवेक का मकान है। आलीशान मकान नंबर 3169 में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर, पहली व दूसरी मंजिल शामिल हैं। बेसमेंट व ग्राउंड फ्लोर पर विवेक का परिवार रहता था। वहीं, पहली व दूसरी मंजिल इन्होंने किराये पर दी हुई हैं। बुधवार दोपहर अमर उजाला की टीम इस मकान पर पहुंची तो गेट बंद मिला। ऊपर ही मंजिल पर रहने वाले व्यक्ति व महिला दिखे। मीडिया जानकार उन लोगों ने कहा कि ये अपने पिता के इलाज के लिए दिल्ली गए हुए हैं, इससे ज्यादा हमें कोई जानकारी नहीं है।
पड़ोसी सुमित ने बताया कि विवेक अग्रवाल पत्नी और दो बेटियों के साथ यहां रहते थे। पड़ोसी के अनुसार, विवेक को उन्होंने कम ही देखा था लेकिन पत्नी और बेटी आए दिन सुबह-शाम पार्क में खेलने और टहलने आती थीं। परिवार शांत स्वभाव का था।
आरडब्ल्यूए ग्रुप पर लोग दे रहे शौक संदेश
सेक्टर-46 के निवासियों के एक ग्रुप में भी बुधवार दोपहर बाद हादसे में परिवार के खत्म होने का शौक संदेश आया। यहीं की निवासी एक महिला ने ये मैसेज ग्रुप में किया। इसमें लिखा कि एक बहुत बड़ी दुखद सूचना मिली है। दिल्ली के हादसे में विवेक, उनकी मां, पत्नी, दो बेटियों व अन्य रिश्तेदारों की आग हादसे मौत हो गई है। सभी सेक्टर-46 के निवासियों के लिए बहुत दुखद असहनीय घटना है। मैसेज में ही लिखा गया कि सभी शव अस्पताल में हैं, कब तक आएंगे, अभी पता नहीं। इसके बाद अन्य निवासियों के शौक व सांत्वना संदेश ग्रुप में आने लगे। सेक्टर निवासी व आरडब्ल्यूए के पूर्व प्रधान राजकुमार ने बताया कि हादसे की सूचना के बाद से सभी सदमे में हैं कि कैसे एक हंसता-खेलता परिवार खत्म हो गया। विवेक व परिवार से काफी अच्छी जान-पहचान थी और अक्सर हम मिलते थे।
एनजीओ से जुड़ी थीं तर्जनी
मालवीय नगर हादसे में जान गंवाने वाली तर्जनी मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली थीं। सेक्टर-46 की आरडब्ल्यूए सेक्रेटरी ऋचा तिवारी ने बताया कि तर्जनी लेकिन सामाजिक कार्यों से जुड़ी थीं। एक एनजीओ के साथ वो सक्रिय रूप से काम करती थीं। हाल ही में उन्होंने इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी कदम रखा था। परिवार में उनकी बड़ी बेटी बंगलुरू में रहती थी। एंजेल मंगलवार शाम करीब चार बजे ही गुरुग्राम पहुंची थी। हादसे के बाद परिवार और परिचितों में गहरा शोक व्याप्त है।
दोस्त बोलीं- तर्जनी मिलनसार थीं, परिवार भी मुश्किल दौर से गुजर रहा था
तर्जनी की करीबी मित्र व सेक्रेटरी ऋचा ने बताया कि दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी। कुछ समय पहले एक इवेंट के सिलसिले में वे देहरादून में साथ रुकी थीं। तर्जनी बेहद मिलनसार और सकारात्मक स्वभाव की थीं। वहीं, परिवार पहले से ही कठिन दौर से गुजर रहा था। दो दिन पहले ही विवेक अग्रवाल के पिता की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।