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Gurugram News: मंडियों में गेहूं उठान सुस्त, भुगतान में देरी से किसान परेशान
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आउटिंग के लिए नूंह मंडी गेट पर खड़ी गाड़ियां।
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-25 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद के सापेक्ष मात्र पांच हजार मीट्रिक टन का उठान
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले की अनाज मंडियों में गेहूं खरीद के बीच उठान (लिफ्टिंग) की धीमी रफ्तार किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। मंडियों में हजारों मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है, लेकिन उठान बेहद कम होने के कारण किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा। सरकार द्वारा 48 घंटे में भुगतान का दावा यहां फेल होता नजर आ रहा है।
जिले की पांच मंडियों में अब तक करीब 25 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जबकि इसके मुकाबले केवल लगभग 5 हजार मीट्रिक टन का ही उठान हो पाया है। मंडीवार आंकड़ों के अनुसार नूंह में 11,818, पुनहाना में 11,561, तावडू में 412, फिरोजपुर झिरका में 761 और पिनगवां में 158 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। खरीद शुरू हुए करीब 10 दिन बीतने के बाद भी उठान की रफ्तार नहीं बढ़ पाई है, जिससे मंडियों में गेहूं का स्टॉक बढ़ता जा रहा है।
सत्यापन की नई व्यवस्था से हो रही देरी :
उठान में देरी की मुख्य वजह नई सत्यापन व्यवस्था बन रही है। नियमों के तहत गेहूं से भरी गाड़ी को मंडी से बाहर जाने से पहले परचेज एजेंसी, ट्रांसपोर्टर और मार्केट कमेटी सचिव द्वारा तीन स्तरों पर सत्यापन जरूरी किया गया है। लेकिन समन्वय की कमी के चलते यह प्रक्रिया धीमी हो गई है, जिससे गाड़ियां मंडी गेट पर घंटों खड़ी रहती हैं। लेकिन मंडी स्तर पर उनका सत्यापन त्वरित नहीं हो रहा। कई बार एक गाड़ी को बाहर निकलने में कई कई घंटे तक का समय लग रहा है। जब तक उठान और दस्तावेज सत्यापन पूरा नहीं होता, तब तक भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाती, जिससे किसानों को 4-5 दिन या उससे अधिक इंतजार करना पड़ रहा है।
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प्रशासन पर लापरवाही का आरोप :
किसानों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। किसान महेंद्र सिंह ने बताया कि दस दिन पहले गेंहू मंडी में डाले थे लेकिन भुगतान अभी तक नहीं हुआ। वहीं किसान इरफान का कहना है कि 48 घंटे में भुगतान का दावा सिर्फ कागजों में है, हकीकत में कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है। मंडी प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि सूत्रों के अनुसार स्टाफ की कमी और विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण यह स्थिति बनी हुई है।
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उठान को लेकर एजेंसी ट्रांसपोर्टर और मार्केट कमेटी के अधिकारियों को साफ निर्देश हैं कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही ना बरते। इसके साथ ही किसानों की पेमेंट जल्द से जल्द कराएं। सरकार गंभीर है। इसमें कहीं लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी व एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ज्योति, एडीसी, नूंह
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नूंह। जिले की अनाज मंडियों में गेहूं खरीद के बीच उठान (लिफ्टिंग) की धीमी रफ्तार किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। मंडियों में हजारों मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है, लेकिन उठान बेहद कम होने के कारण किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा। सरकार द्वारा 48 घंटे में भुगतान का दावा यहां फेल होता नजर आ रहा है।
जिले की पांच मंडियों में अब तक करीब 25 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जबकि इसके मुकाबले केवल लगभग 5 हजार मीट्रिक टन का ही उठान हो पाया है। मंडीवार आंकड़ों के अनुसार नूंह में 11,818, पुनहाना में 11,561, तावडू में 412, फिरोजपुर झिरका में 761 और पिनगवां में 158 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। खरीद शुरू हुए करीब 10 दिन बीतने के बाद भी उठान की रफ्तार नहीं बढ़ पाई है, जिससे मंडियों में गेहूं का स्टॉक बढ़ता जा रहा है।
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सत्यापन की नई व्यवस्था से हो रही देरी :
उठान में देरी की मुख्य वजह नई सत्यापन व्यवस्था बन रही है। नियमों के तहत गेहूं से भरी गाड़ी को मंडी से बाहर जाने से पहले परचेज एजेंसी, ट्रांसपोर्टर और मार्केट कमेटी सचिव द्वारा तीन स्तरों पर सत्यापन जरूरी किया गया है। लेकिन समन्वय की कमी के चलते यह प्रक्रिया धीमी हो गई है, जिससे गाड़ियां मंडी गेट पर घंटों खड़ी रहती हैं। लेकिन मंडी स्तर पर उनका सत्यापन त्वरित नहीं हो रहा। कई बार एक गाड़ी को बाहर निकलने में कई कई घंटे तक का समय लग रहा है। जब तक उठान और दस्तावेज सत्यापन पूरा नहीं होता, तब तक भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाती, जिससे किसानों को 4-5 दिन या उससे अधिक इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रशासन पर लापरवाही का आरोप :
किसानों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। किसान महेंद्र सिंह ने बताया कि दस दिन पहले गेंहू मंडी में डाले थे लेकिन भुगतान अभी तक नहीं हुआ। वहीं किसान इरफान का कहना है कि 48 घंटे में भुगतान का दावा सिर्फ कागजों में है, हकीकत में कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है। मंडी प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि सूत्रों के अनुसार स्टाफ की कमी और विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण यह स्थिति बनी हुई है।
उठान को लेकर एजेंसी ट्रांसपोर्टर और मार्केट कमेटी के अधिकारियों को साफ निर्देश हैं कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही ना बरते। इसके साथ ही किसानों की पेमेंट जल्द से जल्द कराएं। सरकार गंभीर है। इसमें कहीं लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी व एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ज्योति, एडीसी, नूंह