शिक्षक के लिए हर छात्र की गलती केवल कमी नहीं, बल्कि उसे कुछ नया सिखाने का अवसर होती है। कक्षा में जब कोई बच्चा गलत जवाब देता है या किसी काम में असफल होता है तो उसे डांटने के बजाय यह समझना चाहिए कि उससे कहां चूक हुई। बच्चे गलतियों से बहुत कुछ सीखते हैं। शिक्षक यदि उन्हें अपनी गलती पहचानने और उसे सुधारने का मौका दें तो उनमें आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। बार-बार डांटने से बच्चा सवाल पूछने और अपनी बात रखने से डर सकता है। शिक्षक का काम केवल सही उत्तर बताना नहीं, बल्कि छात्र को सही उत्तर तक पहुंचने का रास्ता दिखाना भी है। छोटी-छोटी गलतियों को सीखने की सीढ़ी बनाकर बच्चे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इसके लिए शिक्षक को धैर्य रखना जरूरी है। हर छात्र से हमेशा सही होने की उम्मीद करना उचित नहीं। सीख यही है कि गलती करने पर बच्चे को रोकना नहीं, बल्कि उससे सीखकर आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए। ऐसा वातावरण बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाता है।
-भारती ग्रोवर, टीजीटी, गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, निठारी गांव