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Delhi: उच्च न्यायालय ने EWS के लिए आईएलबीएस में सीमित मुफ्त उपचार पर सरकार से मांगा जवाब
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Akash Dubey
Updated Wed, 18 Mar 2026 05:14 PM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) के एक फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार का रुख पूछा है। यह याचिका आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए मुफ्त उपचार हेतु सीमित बिस्तर उपलब्ध कराने से संबंधित है। आईएलबीएस इन-पेशेंट विभाग में केवल 10 फीसदी और आउट-पेशेंट विभाग में 25 फीसदी मामलों में मुफ्त उपचार देता है।
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मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने एनजीओ सोशल जस्टिस की जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार और आईएलबीएस को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सत्यकाम ने कहा कि आईएलबीएस एक प्रमुख सरकारी वित्तपोषित सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान है। यह गंभीर यकृत रोगों जैसे हेपेटाइटिस, सिरोसिस और यकृत कैंसर के उपचार में विशेषज्ञता रखता है। उन्होंने तर्क दिया कि संस्थान को ऐसी नीति अपनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह नीति इसे "मुख्य रूप से सशुल्क चिकित्सा संस्थान" में प्रभावी ढंग से बदल देती है। अधिवक्ता ने बताया कि यह निर्णय मनमाना, अनुचित और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है। यह धनी और जरूरतमंद मरीजों के बीच भेदभाव करता है। यह किफायती और समय पर स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच के संवैधानिक अधिकार से वंचित करता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध की है। प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
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अधिवक्ता अशोक अग्रवाल और कुमार उत्कर्ष के माध्यम से दायर याचिका में एनजीओ ने कहा। यहां तक कि निजी अस्पताल भी, जिन्हें सरकार द्वारा रियायती दरों पर भूमि आवंटित की जाती है। उन्हें ईडब्ल्यूएस मरीजों को इन-पेशेंट विभाग में 10 फीसदी और आउट-पेशेंट विभाग में 25 फीसदी मुफ्त उपचार देना होता है। एक पूर्णतः सरकारी अस्पताल द्वारा समान लाभ प्रदान करना "पूरी तरह से असंगत" है। याचिका में जोर दिया गया कि आईएलबीएस की वर्तमान नीति असंवैधानिक है। यह जरूरतमंद मरीजों के साथ अन्याय करती है। यह उन्हें आवश्यक चिकित्सा सेवाओं से वंचित करती है। संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 सभी नागरिकों को समानता और जीवन का अधिकार प्रदान करते हैं। किफायती स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच इस अधिकार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।