{"_id":"6a8314907065a7d61d017941","slug":"if-you-generate-waste-shoulder-the-responsibility-for-its-disposal-too-mcd-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-150993-2026-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"कचरा पैदा करो तो निपटाने की जिम्मेदारी भी उठाओ : एमसीडी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कचरा पैदा करो तो निपटाने की जिम्मेदारी भी उठाओ : एमसीडी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
-30 दिन में पंजीकरण और 45 दिन में देनी होगी कचरा प्रबंधन योजना
सचिन कुमार
नई दिल्ली। दिल्ली में कचरा प्रबंधन को लेकर नगर निगम ने बड़ी आवासीय सोसाइटियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब बड़े परिसरों में पैदा होने वाले कचरे को केवल बाहर भेजने से काम नहीं चलेगा। सोसाइटियों को कचरा अलग करने से लेकर उसके निपटारे तक की व्यवस्था करनी होगी। इसी कड़ी में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने द्वारका सेक्टर-5 स्थित मीरा बाई सोसाइटी को नोटिस जारी किया है।
निगम ने सोसाइटी को बल्क वेस्ट जनरेटर (बीडब्ल्यूजी) की श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि इस तरह के बड़े परिसरों में रोजाना पैदा होने वाले कचरे की जिम्मेदारी अब संबंधित सोसाइटी की होगी। सोसाइटी को गीला, सूखा, सैनिटरी और अन्य कचरे को अलग-अलग रखना होगा। इसके बाद कचरे को अधिकृत एजेंसी को देना होगा।
विज्ञापन
20 हजार वर्गमीटर क्षेत्र वाले परिसर दायरे में
एमसीडी के अनुसार, जिस परिसर का निर्मित क्षेत्र 20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक है, वह बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आएगा। इसके अलावा रोजाना 40 हजार लीटर या उससे अधिक पानी की खपत करने वाले और 100 किलो या उससे अधिक कचरा पैदा करने वाले परिसर भी इस श्रेणी में शामिल होंगे। इसमें बड़ी आवासीय सोसाइटियों के साथ अन्य बड़े परिसर भी शामिल हैं। ऐसे परिसरों को अब कचरा प्रबंधन की अपनी व्यवस्था करनी होगी।
विज्ञापन
गीला कचरा परिसर में ही संभालना होगा
नए नियमों के तहत गीले और बागवानी से निकलने वाले कचरे का निपटारा सोसाइटी के परिसर में ही करना होगा। इसके लिए कंपोस्टिंग या बायो-मिथेनेशन जैसी व्यवस्था की जा सकती है। कंपोस्टिंग से गीले कचरे से खाद बनाई जा सकती है, जबकि बायो-मिथेनेशन से कचरे से गैस तैयार की जाती है। अगर किसी सोसाइटी के लिए परिसर में यह व्यवस्था करना संभव नहीं है तो वह एमसीडी से छूट के लिए आवेदन कर सकती है। इसके लिए निगम की तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। एमसीडी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोसाइटियां अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी एजेंसी को कचरा नहीं दे सकेंगी।
30 दिन में पंजीकरण, 45 दिन में योजना
मीरा बाई सोसायटी को केंद्रीय ऑनलाइन पोर्टल पर 30 दिन के भीतर पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद 45 दिन के भीतर अनुपालन योजना एमसीडी को देनी होगी। इस योजना में सोसाइटी को बताना होगा कि वह गीले, सूखे और दूसरे कचरे को कैसे अलग करेगी, गीले कचरे का निपटारा कैसे करेगी और बाकी कचरा किस अधिकृत एजेंसी को दिया जाएगा। इसके बाद 90 दिन के भीतर पूरी व्यवस्था लागू करनी होगी। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना और अन्य कार्रवाई का प्रावधान है।
5 हजार वर्गमीटर से बड़ी सोसाइटियों की भी जिम्मेदारी
एमसीडी के नए प्रावधानों में 5 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र वाली गेटेड कम्युनिटी, आरडब्ल्यूए, बाजार, होटल और रेस्तरां को भी कचरा अलग करने और उसके सही निपटारे की जिम्मेदारी दी गई है। इन परिसरों में भी कचरे को शुरुआत में ही अलग करना होगा। गीले कचरे को संभव हो तो परिसर में ही निस्तारण करना होगा, जबकि सूखे और रिसाइकिल होने वाले कचरे को अधिकृत एजेंसी को देना होगा।