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कृत्रिम जलाशयों के बजाय यमुना में मूर्तियों का विसर्जन, एनजीटी के आदेशों की हो रही अनदेखी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 08 Oct 2019 06:19 AM IST
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मूर्ति
- फोटो : Amar Ujala
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कृत्रिम जलाशयों के निर्माण के बावजूद नियमों को दरकिनार कर यमुना नदी में सोमवार को मूर्तियां विसर्जित की गईं। इससे गंदगी और प्रदूषण का खतरा भी बढ़ने लगा है। साथ ही एनजीटी के आदेशों की अनदेखी भी हो रही है।
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यमुना नदी
- फोटो : Amar Ujala
गौरतलब है कि गणेशोत्सव के बाद कृत्रिम जलाशयों में विसर्जित मूर्तियों को कहीं और फेंक दिए जाने की वजह से श्रद्धालुओं ने विरोध दर्ज करवाते हुए इस मामले की शिकायत एमसीडी अधिकारियों से की थी। लेकिन अब तक इस मसले पर विभाग की ओर से ऐसे लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही सुरक्षा के लिहाज से किसी की तैनाती भी नहीं की गई है।
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यमुना नदी
- फोटो : Amar Ujala
उधर, एमसीडी का दावा है कि मूर्तियों का विसर्जन यमुना में रोकने के लिए कृत्रिम जलाशयों की गहराई बढ़ाई गई हैं और उनकी संख्या में भी बढ़ोतरी कर दी गई है, ताकि विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इससे पहले गणेश पूजा के बाद कृत्रिम तालाबों में विजर्सित मूर्तियों को उठाकर लैंडफिल साइट पर ले जाया गया था। इसके विरोध को देखते हुए एमसीडी ने अतिरिक्त तैयारी की है।
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जलाशय
- फोटो : Amar Ujala
दुर्गा पूजा के मौके पर दिल्ली में सैकड़ों स्थानों पर मूर्तियां विसर्जित की जाती हैं। एनजीटी के आदेशों के मुताबिक कृत्रिम जलाशय बनाए गए लेकिन यमुना में मूर्तियों के विसर्जन का अब तक पूरी तरह नहीं रुका है। विसर्जन के दौरान यमुना के इर्द- गिर्द सुरक्षा कर्मियों की मुस्तैदी न होने की वजह से नियमों की अनदेखी हो रही है।
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- फोटो : Amar Ujala
गीता कॉलोनी स्थित सैनी भवन में पहले से निर्मित जलाशय की गहराई बढ़ाई गई है ताकि यहां अधिक से अधिक मूर्तियां विसर्जित की जा सके। पूर्वी निगम स्थायी समिति के अध्यक्ष संदीप कपूर ने बताया कि विसर्जन के लिए गड्ढों की गहराई बढ़ाने सहित संख्या में भी बढ़ोतरी की गई है। कपूर के मुताबिक, गड्ढों की संख्या और गहराई इसलिए बढ़ाई गई है ताकि जलाशयों में अधिक से अधिक मूर्तियां विसर्जित की जा सकें।
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