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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   In South Delhi, over 50 ponds exist only on paper but have vanished from the ground

Delhi NCR News: दक्षिण दिल्ली में 50 से ज्यादा तालाब कागजों में जिंदा, जमीन से गायब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 07:37 PM IST
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135 जलाशय दर्ज हैं सरकारी रिकॉर्ड में, कहीं तालाब की जगह मकान बन गए तो कहीं सड़क बन गई है, कई जगह कूड़े, गाद और झाड़ियों ने मिटाया अस्तित्व
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सचिन कुमार
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली में बारिश का पानी सहेजने और भूजल रिचार्ज में अहम भूमिका निभाने वाले 50 से ज्यादा तालाब और जलाशय अब जमीन पर मौजूद नहीं हैं। सरकारी रिकॉर्ड में जिले में 135 तालाब, झील और जलाशय दर्ज हैं, लेकिन जमीनी स्थिति इन रिकॉर्ड से अलग है। कई जगह जलाशयों की जमीन पर मकान और सड़क बन चुके हैं, जबकि कुछ स्थानों पर कूड़ा, गाद और झाड़ियों के कारण इनका अस्तित्व लगभग खत्म हो गया है। दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण की रिपोर्ट में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां रिकॉर्ड में जलाशय दर्ज है, लेकिन मौके पर उसका कोई अस्तित्व नहीं मिला।
दक्षिण दिल्ली के जलाशय असोला, भाटी, महरौली, वसंत कुंज, हौज खास, साकेत, मैदान गढ़ी, डेरा मंडी, आया नगर और खिड़की समेत 30 से अधिक इलाकों में फैले हैं। रिकॉर्ड में हौज खास झील का क्षेत्रफल करीब 142 हेक्टेयर दर्ज है, जबकि असोला में एक जलाशय महज 0.00175 हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज है। जो जलाशय मौजूद हैं, उनमें भी कई की स्थिति खराब है। गाद और कूड़े के जमाव के साथ किनारों पर झाड़ियां उग आई हैं। कई जगह पानी की आवक और निकासी के रास्ते बंद हैं। देखरेख के अभाव में कुछ जलाशय उथले होकर सूख चुके हैं।
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सैटेलाइट तस्वीरों में 322, जमीन पर मिले सिर्फ 43
राजधानी के जल निकायों की वास्तविक स्थिति पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में पेश जानकारी रिकॉर्ड और जमीन के बीच बड़े अंतर को सामने लाती है। दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, भू-स्थानिक दिल्ली लिमिटेड (जीएसडीएल) की सैटेलाइट तस्वीरों में 322 स्थानों पर जल निकाय दिखाई दिए, लेकिन जमीनी जांच में इनमें से केवल 43 ही मौजूद मिले। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने इन जल निकायों की जमीनी स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए एनजीटी से समय मांगा है। दिल्ली सरकार के अनुसार, राजधानी में झील, तालाब और जोहड़ समेत 1,367 जल निकाय हैं, जबकि राजस्व रिकॉर्ड में 1,045 से अधिक जल निकाय दर्ज हैं। अलग-अलग सरकारी आंकड़ों में यह अंतर जल निकायों की पहचान, स्थिति और संरक्षण की निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
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बारिश में जलभराव, फिर भी सूखे तालाब

पर्यावरण विशेषज्ञ संजय मिश्रा के अनुसार, तालाब स्थानीय स्तर पर बारिश का पानी रोककर भूजल रिचार्ज में मदद करते हैं। दक्षिण दिल्ली में बढ़ते निर्माण के कारण पक्की सतह का विस्तार हुआ है, जिससे बारिश का पानी जमीन में समाने के बजाय सड़कों और नालों में बह जाता है। ऐसे में पुराने तालाबों को पुनर्जीवित कर उनमें वर्षाजल पहुंचाने की व्यवस्था की जाए तो एक ओर जलभराव कम किया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर भूजल रिचार्ज को बढ़ावा मिल सकता है। तालाबों को प्राकृतिक जल बैंक की तरह विकसित करना स्थानीय जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। इनके संरक्षण से बारिश के पानी को रोकने, सतही बहाव घटाने और भूजल स्तर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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