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Jantar Mantar Protest: एफआरएस ने खोली प्रदर्शन में शामिल अपराधियों की कुंडली, संगीन जुर्म के आरोपी भी दिखे
Wed, 29 Jul 2026 06:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 29 Jul 2026 06:09 AM IST
सार
जांच में सामने आया है कि मौजूदा समय में एफआरएस की चेहरे पहचानने की क्षमता करीब 15 से 20 प्रतिशत के बीच है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि सिस्टम ने प्रदर्शन में मौजूद अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के केवल एक हिस्से की ही पहचान की होगी।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एफआरएस की सटीकता कई तकनीकी पहलुओं पर निर्भर करती है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली पुलिस के फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) ने जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान 2873 आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की पहचान की है। हालांकि, जांच में सामने आया है कि मौजूदा समय में एफआरएस की चेहरे पहचानने की क्षमता करीब 15 से 20 प्रतिशत के बीच है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि सिस्टम ने प्रदर्शन में मौजूद अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के केवल एक हिस्से की ही पहचान की होगी।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एफआरएस की सटीकता कई तकनीकी पहलुओं पर निर्भर करती है। इसमें कैमरे की गुणवत्ता, रोशनी की स्थिति, चेहरे का कोण और इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर के एल्गोरिदम की भूमिका अहम होती है। दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2018 में एक अदालत में स्वीकार किया था कि उस समय इस्तेमाल किए जा रहे फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की सटीकता दर करीब एक प्रतिशत थी। कई बार सिस्टम उम्र और लिंग पहचानने में भी गलती करता था। हालांकि, समय के साथ तकनीक को अपडेट किया गया है।
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अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की पहचान नियंत्रित माहौल में, जैसे एयरपोर्ट या कार्यालय में स्थिर कैमरे के सामने की जाए तो आधुनिक एफआरएस सिस्टम काफी अधिक सटीक परिणाम दे सकते हैं। लेकिन भीड़भाड़ वाले स्थानों, प्रदर्शनों या कम रोशनी वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी फुटेज से पहचान करना चुनौतीपूर्ण होता है।
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एफआरएस जांच में सामने आया कि पहचाने गए 2873 लोगों में से 989 का गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। इनमें हत्या के मामलों में शामिल 101 आरोपी, हत्या के प्रयास के 62 आरोपी और डकैती व लूट के मामलों में शामिल 284 लोग शामिल हैं। इसके अलावा दुष्कर्म के 61 आरोपी, पॉक्सो एक्ट के छह आरोपी और महिलाओं से छेड़छाड़ के 25 आरोपी भी मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में शामिल कुछ आरोपी पहले भी गंभीर मामलों में संलिप्त रहे हैं। दुष्कर्म के मामलों में शामिल आठ आरोपी ऐसे थे, जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक मामले दर्ज हैं।
इसके अलावा हथियार अधिनियम के तहत अपराधों में शामिल 229, झपटमारी के 135, अपहरण के 19 और एनडीपीएस एक्ट से जुड़े 67 आरोपी भी एफआरएस के जरिए चिन्हित किए गए। हत्या के मामलों में शामिल आरोपियों में 142 ऐसे मिले जिनकी दो या उससे अधिक मामलों में संलिप्तता रही, जबकि 12 आरोपी ऐसे थे जिनके खिलाफ 10 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
लूट और डकैती के मामलों में भी कई पुराने अपराधी सामने आए। इनमें 155 आरोपी ऐसे थे जो दो या उससे अधिक मामलों में शामिल रहे, जबकि 31 आरोपियों के खिलाफ 10 या उससे अधिक मामले दर्ज थे। एनडीपीएस मामलों में भी नौ आरोपी ऐसे मिले, जिनकी दो या उससे अधिक आपराधिक मामलों में संलिप्तता रही।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, एफआरएस का उद्देश्य भीड़ में मौजूद हर व्यक्ति को अपराधी घोषित करना नहीं, बल्कि पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले संदिग्धों की पहचान कर जांच में सहायता करना है।