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जज रिक्यूजल मामला: केजरीवाल का अतिरिक्त हलफनामा रिकार्ड पर
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा पर शराब नीति मामले में ‘सीधा हितों का टकराव’ का आरोप लगाते हुए गुरुवार को अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कराया। न्यायमूर्ति शर्मा ने रजिस्ट्री को हलफनामा रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि वे फैसला सुनाए जाने के बाद मामले को दोबारा नहीं खोल रही हैं।
हलफनामे में केजरीवाल ने दावा किया कि न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के एमपैनल्ड वकील हैं, जिन्हें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिए काम मिलता है। मेहता इस मामले में सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि यह ‘डायरेक्ट कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ है, जिससे उनकी रिक्यूजल (खुद को मामले से अलग करने) की मांग और मजबूत हो गई है। आरटीआई दस्तावेजों का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कहा कि न्यायमूर्ति के बेटे को 2023 में 2,487, 2024 में 1,784 और 2025 में 1,633 मामले आवंटित किए गए। उन्होंने कहा कि ये तथ्य रिक्यूजल याचिका दाखिल करने के बाद उनके संज्ञान में आए।
केजरीवाल ने 13 अप्रैल को भी जज पर कई आपत्तियां जताई थीं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रिक्यूजल का विरोध किया और केजरीवाल पर मानहानि तथा अवमानना की कार्रवाई की मांग की। उन्होंने इसे ‘अपरिपक्व दिमाग की आशंकाएं’ बताया और कहा कि बिना आधार के रिक्यूजल स्वीकार करने से खराब मिसाल बनेगी। कोर्ट ने 13 अप्रैल को रिक्यूजल याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा पर शराब नीति मामले में ‘सीधा हितों का टकराव’ का आरोप लगाते हुए गुरुवार को अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कराया। न्यायमूर्ति शर्मा ने रजिस्ट्री को हलफनामा रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि वे फैसला सुनाए जाने के बाद मामले को दोबारा नहीं खोल रही हैं।
हलफनामे में केजरीवाल ने दावा किया कि न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के एमपैनल्ड वकील हैं, जिन्हें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिए काम मिलता है। मेहता इस मामले में सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि यह ‘डायरेक्ट कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ है, जिससे उनकी रिक्यूजल (खुद को मामले से अलग करने) की मांग और मजबूत हो गई है। आरटीआई दस्तावेजों का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कहा कि न्यायमूर्ति के बेटे को 2023 में 2,487, 2024 में 1,784 और 2025 में 1,633 मामले आवंटित किए गए। उन्होंने कहा कि ये तथ्य रिक्यूजल याचिका दाखिल करने के बाद उनके संज्ञान में आए।
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केजरीवाल ने 13 अप्रैल को भी जज पर कई आपत्तियां जताई थीं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रिक्यूजल का विरोध किया और केजरीवाल पर मानहानि तथा अवमानना की कार्रवाई की मांग की। उन्होंने इसे ‘अपरिपक्व दिमाग की आशंकाएं’ बताया और कहा कि बिना आधार के रिक्यूजल स्वीकार करने से खराब मिसाल बनेगी। कोर्ट ने 13 अप्रैल को रिक्यूजल याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
