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Delhi NCR News: सर्दियों से पहले दिल्ली को डस्ट-फ्री बनाने की तैयारी, एलजी ने तैयार किया मिशन मोड प्लान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 10:21 PM IST
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सड़क की धूल को माना गया प्रदूषण का सबसे बड़ा और आसान समाधान योग्य कारण


अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में सर्दियों के दौरान दमघोंटू प्रदूषण से निपटने के लिए इस बार प्रशासन ने समय से पहले ही अपनी रणनीतिक तैयारी शुरू कर दी है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने सोमवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष राजेश वर्मा के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि इस बार दिल्ली की क्लीन एयर रणनीति का मुख्य आधार सड़क की धूल को खत्म करना रहेगा।

एलजी ने स्पष्ट किया कि धूल के कणों को नियंत्रित करना अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता है, जिसे टाला नहीं जा सकता। राजधानी की आबोहवा में सुधार के लिए उपराज्यपाल ने सभी संबंधित एजेंसियों को युद्ध स्तर पर काम करने और सर्दियों की शुरुआत से पहले मापने योग्य परिणाम देने का निर्देश दिया है।
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धूल पर नियंत्रण सबसे आसान और असरदार समाधान

उपराज्यपाल ने बहुत ही व्यावहारिक पहलू पर अपने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि पीएम2.5 और पीएम10 के स्तर को बढ़ाने में धूल का बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन इसे नियंत्रित करना सबसे आसान है। इसका कारण यह है कि धूल नियंत्रण के लिए जिम्मेदार अधिकांश एजेंसियां दिल्ली के भीतर ही स्थित हैं, जिससे समन्वय करना सरल है। एलजी ने निर्देश दिया कि केवल मुख्य सड़कों पर ही नहीं, बल्कि पूरी दिल्ली में सड़क के कोनों तक मरम्मत और सफाई सुनिश्चित की जाए। इसके लिए पर्याप्त संख्या में मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की तैनाती के साथ-साथ उनकी रूट मॉनिटरिंग को भी सख्त करने को कहा गया है।
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ड्रेनेज सिल्ट और सड़क मरम्मत पर बढ़ेगी सख्ती

नालों की सफाई के बाद निकलने वाली गाद (सिल्ट) को सड़क किनारे सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है, जो बाद में धूल बनकर हवा में घुल जाती है। एलजी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए निर्देश दिया कि गाद निकालने वाली एजेंसियां इसका तत्काल निपटान करें। इसके अलावा, सड़कों के किनारे खाली पड़ी जगहों पर पौधरोपण और ग्रीन बफर बढ़ाने पर जोर दिया गया है ताकि कच्ची मिट्टी हवा में न उड़े।


तकनीक से निगरानी और बढ़ेगा एजेंसियों में समन्वय

दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की राह में सबसे बड़ी बाधा एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी रही है। इसे दूर करने के लिए एलजी ने सीएक्यूएम, एमसीडी, पीडब्ल्यूडी, डीडीए, एनडीएमसी और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण जैसी सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने को कहा है। अब प्रदूषण नियंत्रण उपायों की जमीन पर निगरानी के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा। रीयल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम और डााटा-आधारित मूल्यांकन तंत्र के माध्यम से अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
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