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बिना सलाह दवा लेना पड़ा भारी: 50 फीसदी त्वचा खराब होने के बाद बची जान; आंखें बचाने के लिए अपनाई ये प्रक्रिया

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Akash Dubey Updated Mon, 25 May 2026 06:08 PM IST
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सार

बिना डॉक्टर की सलाह बुखार की दवा लेने से संजीव कुमार को स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम हो गया। उनकी 50 फीसदी त्वचा खराब हो गई। 20 दिन के इलाज से जान बच गई।

Life saved after 50 percent skin damage due to unprescribed medication
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

दिल्ली के 65 वर्षीय एक व्यक्ति को बिना डॉक्टर की सलाह बुखार की दवा लेना भारी पड़ गया। दवा खाने के बाद उन्हें स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम और टॉक्सिक एपिडर्मल नेक्रोलाइसिस (टीईएन) जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी हो गई। मरीज संजीव कुमार के शरीर पर बड़े-बड़े छाले पड़ने लगे और शरीर की लगभग 50 प्रतिशत त्वचा खराब हो गई। मुंह, गले, आंखों और निजी अंगों की अंदरूनी सतह भी प्रभावित हो गई थी। डॉक्टरों के अनुसार, यह समस्या संभवतः एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाओं की प्रतिक्रिया के कारण हुई।

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गंभीर हालत में मरीज को अस्पताल लाया गया, जहां इमरजेंसी टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया। त्वचा रोग विशेषज्ञों ने बीमारी की पुष्टि के बाद हाई डोज स्टेरॉयड थेरेपी दी। आंखों को बचाने के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञों ने एडवांस अम्नियोटिक मेम्ब्रेन ग्राफ्ट प्रक्रिया की। संक्रमण के खतरे को देखते हुए मरीज को सख्त निगरानी में रखा गया और ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स दी गई।

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जांच में यूरिन इंफेक्शन भी पाया गया था। सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विक्रमजीत सिंह ने बताया कि टॉक्सिक एपिडर्मल नेक्रोलाइसिस दवाओं से होने वाली सबसे गंभीर प्रतिक्रियाओं में से एक है। अस्पताल में 20 दिनों तक मरीज का इलाज चला। डॉक्टरों ने बताया कि टीईएन में सेप्सिस, निमोनिया और कई अंग फेल होने का खतरा रहता है, लेकिन समय पर इलाज से मरीज की जान बच गई।

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