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LPG Crisis: कालाबाजारी में 500 रुपये किलो बिक रही गैस, एक किलो गैस खरीदने में खत्म हो रही मजदूरों की दिहाड़ी

सचिन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sharukh Khan Updated Sun, 15 Mar 2026 05:07 PM IST
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सार

मुनिरका स्थित झुग्गी बस्ती में रहने वाली ओमवती बताती हैं कि पिछले कई दिनों से गैस भरने वाली दुकानें बंद हैं। चोरी छिपे जो लोग गैस भर रहे हैं वे दाम बहुत ज्यादा बता रहे हैं। मजदूर सुखदेव ने बताया कि कुछ घरों में दिन में एक बार ही खाना बन रहा है, जबकि कई परिवारों ने चाय और अन्य चीजें बनाने के लिए लकड़ी या कोयले का सहारा लेना शुरू कर दिया है। 
 

LPG Crisis Gas being sold at 500 per kilogram on the black market
LPG Gas Crisis - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजधानी में एलपीजी गैस की आपूर्ति प्रभावित होने का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है। इनकी जिंदगी पहले से सीमित आमदनी, अस्थिर रोजगार के बीच गुजरती है, लेकिन अब एलपीजी गैस की कमी ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है। 
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दिल्ली में बड़ी संख्या में ऐसे मजदूर रहते हैं, जिन्हें रोजाना 500 से 600 रुपये तक की दिहाड़ी मिलती है। इसी कमाई से उन्हें किराया, राशन, बच्चों की जरूरतें और अन्य खर्च पूरे करने होते हैं। ऐसे में गैस की कमी और बढ़ती कीमतों ने उनके बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। 
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छोटे सिलिंडरों में गैस भरवाकर किसी तरह अपनी रसोई चलाने वाले यह परिवार अब गैस के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो गए हैं। कई जगहों पर 1 किलो गैस की कीमत 400 से 500 रुपये तक पहुंच गई है जिससे दिहाड़ी मजदूर की एक दिन की कमाई एक किलो गैस खरीदने में खर्च हो जा रही है। 

 

मजदूर रामपाल ने बताया कि पहले 95 से 100 रुपये किलो गैस मिलती थी जो एक हफ्ता चल जाती थी। अब एक दिन की दिहाड़ी एक किलो गैस खरीदने पर खर्च हो जा रही है। ऐसे में चिंता सता रही है कि राशन, बच्चों की पढ़ाई, किराया और दवाइयों का खर्च कैसे पूरा होगा।

 

खाना बनाना चुनौती
मुनिरका स्थित झुग्गी बस्ती में रहने वाली ओमवती बताती हैं कि पिछले कई दिनों से गैस भरने वाली दुकानें बंद हैं। चोरी छिपे जो लोग गैस भर रहे हैं वे दाम बहुत ज्यादा बता रहे हैं। मजदूर सुखदेव ने बताया कि कुछ घरों में दिन में एक बार ही खाना बन रहा है, जबकि कई परिवारों ने चाय और अन्य चीजें बनाने के लिए लकड़ी या कोयले का सहारा लेना शुरू कर दिया है। 
 

रोज कमाना रोज खाना... 
आरके पुरम स्थित एकता विहार की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले अधिकतर लोग दिहाड़ी मजदूर हैं। कोई निर्माण स्थल पर काम करता है, कोई रिक्शा चलाता है तो कोई घरों में काम करके अपने परिवार का पेट पालता है। मजदूर दिनेश ने बताया कि घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत, फिर सिक्योरिटी राशि और दिहाड़ी से ज्यादा रिफिल पर खर्च संभव नहीं है। इसलिए झुग्गी बस्तियों में रहने वाले अधिकतर परिवार छोटे सिलिंडरों का ही इस्तेमाल करते हैं लेकिन कुछ दिनों से महंगी गैस हजारों परिवारों की रसोई पर संकट खड़ा हो गया है।
 
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