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दिल्ली नगर निगम का फैसला: 2,453 पीजी भवनों की होगी सुरक्षा जांच, 15 दिन में प्रमाणपत्र अनिवार्य; अमल में सख्ती
Thu, 15 Oct 2026 03:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 15 Oct 2026 03:07 AM IST
सार
सत्य निकेतन में इमारत ढहने से पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने राजधानी के 2,453 पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों की सुरक्षा जांच का आदेश दिया है।
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एमसीडी मुख्यालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी में हजारों विद्यार्थियों और अन्य लोगों की छत कितनी सुरक्षित है, इसका जवाब अब पीजी संचालकों को 15 दिन में देना होगा। सत्य निकेतन में इमारत ढहने से पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने राजधानी के 2,453 पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों की सुरक्षा जांच का आदेश दिया है। इन भवनों में 50 हजार से अधिक लोग रहते हैं, लेकिन निगम के पास केवल करीब 30 प्रतिशत संपत्तियों के स्वीकृत भवन नक्शे ही उपलब्ध हैं।
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अब पीजी मालिकों को निगम के अधिकृत निजी संरचनात्मक इंजीनियरों से जांच कराकर सुरक्षा प्रमाणपत्र लेना होगा। ऐसा नहीं करने पर परिसर खाली कराने और सील करने की कार्रवाई हो सकती है। एमसीडी के सर्वेक्षण में चार इमारतें ऐसी मिली हैं, जिनकी स्थिति प्रथम दृष्टया खतरनाक प्रतीत होती है। इनके मालिकों को भवन खाली कराने के नोटिस जारी किए गए हैं। अब अन्य पीजी भवनों की भी तकनीकी जांच होगी, ताकि उनकी मजबूती और भूकंप के झटके सहने की क्षमता का आकलन किया जा सके।
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नक्शे नहीं, इंजीनियर बताएंगे कितनी सुरक्षित हैं इमारतें
एमसीडी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पीजी भवनों के स्वीकृत नक्शों की अनुपलब्धता है। निगम के पास केवल करीब 30 प्रतिशत संपत्तियों के स्वीकृत भवन नक्शे उपलब्ध हैं। ऐसे में भवनों की संरचनात्मक स्थिति का आकलन अधिकृत विशेषज्ञों की मदद से कराया जाएगा। इंजीनियर बीम, कॉलम और इमारत के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की जांच कर उनकी मजबूती का आकलन करेंगे। निगम ने सभी 12 जोन के भवन विभागों को जांच प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकृत निजी संरचनात्मक इंजीनियरों की सूची एमसीडी के पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। पीजी संचालकों को इसी सूची में शामिल विशेषज्ञों से जांच करानी होगी।
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बाहर से ठीक दिखने वाली इमारत भी हो सकती है असुरक्षित
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, केवल आंखों से निरीक्षण कर किसी इमारत की पूरी संरचनात्मक मजबूती का पता नहीं लगाया जा सकता। दृश्य निरीक्षण से झुकाव, गंभीर दरारों और अन्य स्पष्ट खतरों की पहचान की जा सकती है, लेकिन भवन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए तकनीकी जांच आवश्यक है। भूकंप के दौरान इमारत कितनी सुरक्षित रहेगी, इसका आकलन भी विशेषज्ञों की विस्तृत जांच से ही संभव है। जांच में भवन के महत्वपूर्ण हिस्सों की स्थिति और संरचनात्मक क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। खतरा पाए जाने पर इमारत खाली कराने के साथ आवश्यकतानुसार मरम्मत या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है।
नॉर्थ कैंपस के आसपास सबसे ज्यादा पीजी
एमसीडी ने 25 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल जवाब में बताया था कि सर्वेक्षण के दौरान राजधानी में 2,453 पीजी आवास चिह्नित किए गए। इनमें 32 हजार से अधिक कमरे हैं और 50 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। क्षेत्रवार आंकड़ों के मुताबिक, सिविल लाइंस में सबसे अधिक 608 पीजी हैं। इस क्षेत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय का नॉर्थ कैंपस स्थित है। इसके अलावा केशवपुरम में 410, दक्षिण जोन में 390 और करोल बाग में 365 पीजी आवास चिह्नित किए गए हैं। वहीं, साउथ कैंपस के विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय सत्या निकेतन में 101 पीजी आवास मिले हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई तेज
पीजी आवासों के नियमन और उनमें रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इसी क्रम में कराए गए सर्वेक्षण के बाद एमसीडी ने सुरक्षा प्रमाणपत्र लेने की प्रक्रिया शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, 15 दिन की समयसीमा में जांच पूरी करने में आवश्यकता पड़ने पर विस्तार दिया जा सकता है। हालांकि, सुरक्षा संबंधी निर्देशों की अनदेखी करने वाले पीजी संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य भवनों की खामियों की समय रहते पहचान कर हादसों को रोकना और उनमें रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।