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एसआईआर के दबाव में एमसीडी शिक्षक मानसिक प्रताड़ना के शिकार : देवेंद्र यादव
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एसआईआर को लेकर सरकार पर बरसे देवेंद्र यादव, बोले-शिक्षक मानसिक दबाव में
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर दिल्ली सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर के काम में लगे एमसीडी के हजारों शिक्षक दोहरी जिम्मेदारी निभाने को मजबूर हैं, जिससे वे मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। यादव ने कहा कि एक ओर शिक्षकों पर स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर उन्हें बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में घर-घर जाकर मतदाता सूची संशोधन का काम भी करना पड़ रहा है। इस अतिरिक्त दबाव के कारण न केवल शिक्षकों का मानसिक संतुलन प्रभावित हो रहा है, बल्कि स्कूलों में शिक्षण कार्य भी बाधित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षकों को बिना किसी विशेष अवकाश या राहत के यह जिम्मेदारी सौंप दी है, जो उनके अधिकारों की अनदेखी है।
उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े बीएलओ लगातार दबाव में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, दिसंबर 2025 तक देश के सात राज्यों में इस प्रक्रिया से जुड़े 29 बीएलओ की मौत हो चुकी है, जिनमें कुछ मामलों में आत्महत्या और कुछ में हार्ट अटैक कारण बताया गया। उन्होंने कहा कि काम की कठिन समय सीमा और प्रशासनिक दबाव ने बीएलओ के सामने गंभीर मानसिक संकट खड़ा कर दिया है। यादव ने कहा कि स्कूलों के शिक्षक अतिरिक्त कार्यभार के चलते अर्जित अवकाश और सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। शिक्षक संगठनों में भी इसको लेकर असंतोष है और वे इसे तानाशाही निर्णय मान रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अवकाश के दिनों में काम लेकर छुट्टी न देना केंद्रीय सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि समय पर काम पूरा न होने पर एफआईआर की धमकी दी जा रही है, जिससे बीएलओ और अधिक तनाव में हैं।
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नई दिल्ली।
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर दिल्ली सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर के काम में लगे एमसीडी के हजारों शिक्षक दोहरी जिम्मेदारी निभाने को मजबूर हैं, जिससे वे मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। यादव ने कहा कि एक ओर शिक्षकों पर स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर उन्हें बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में घर-घर जाकर मतदाता सूची संशोधन का काम भी करना पड़ रहा है। इस अतिरिक्त दबाव के कारण न केवल शिक्षकों का मानसिक संतुलन प्रभावित हो रहा है, बल्कि स्कूलों में शिक्षण कार्य भी बाधित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षकों को बिना किसी विशेष अवकाश या राहत के यह जिम्मेदारी सौंप दी है, जो उनके अधिकारों की अनदेखी है।
उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े बीएलओ लगातार दबाव में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, दिसंबर 2025 तक देश के सात राज्यों में इस प्रक्रिया से जुड़े 29 बीएलओ की मौत हो चुकी है, जिनमें कुछ मामलों में आत्महत्या और कुछ में हार्ट अटैक कारण बताया गया। उन्होंने कहा कि काम की कठिन समय सीमा और प्रशासनिक दबाव ने बीएलओ के सामने गंभीर मानसिक संकट खड़ा कर दिया है। यादव ने कहा कि स्कूलों के शिक्षक अतिरिक्त कार्यभार के चलते अर्जित अवकाश और सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। शिक्षक संगठनों में भी इसको लेकर असंतोष है और वे इसे तानाशाही निर्णय मान रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अवकाश के दिनों में काम लेकर छुट्टी न देना केंद्रीय सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि समय पर काम पूरा न होने पर एफआईआर की धमकी दी जा रही है, जिससे बीएलओ और अधिक तनाव में हैं।
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