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हेयर ट्रांसप्लांट कर सकता है अंधा: क्लिक से क्लिनिक तक का खतरा, डॉक्टरों ने मरीजों की सुरक्षा पर जताई चिंता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Tue, 10 Mar 2026 08:47 PM IST
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सार

वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डॉ. आदित्य अग्रवाल ने बताया कि हेयर ट्रांसप्लांट एक आधुनिक और जटिल मेडिकल प्रक्रिया है। इसे करने के लिए त्वचा की बनावट, बालों से जुड़ी बीमारियों, संक्रमण नियंत्रण और संभावित जटिलताओं को संभालने की गहरी समझ जरूरी होती है। इसलिए यह प्रक्रिया केवल पंजीकृत और प्रशिक्षित मेडिकल विशेषज्ञों द्वारा ही की जानी चाहिए।

Medical organizations warn against cosmetic treatments expressing concern over patient safety
हेयर ट्रांसप्लांट - फोटो : adobe stock
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विस्तार

सोशल मीडिया पर हेयर ट्रांसप्लांट और अन्य कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट के आकर्षक विज्ञापनों से प्रभावित होकर इलाज कराना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना प्रमाणित, प्रशिक्षित किसी झोलाछाप डॉक्टर से हेयर, त्वचा ट्रांसप्लांट कराने से गंभीर संक्रमण, आंखों की रोशनी जाने जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। यही नहीं, कुछ मामलों में जान का भी खतरा बन सकता है। 

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जरूर जांच लें डॉक्टर की डिग्री
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल कई क्लीनिक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म खुद को डर्मेटोलॉजिस्ट बताकर लोगों को गुमराह करते हैं, जबकि उनके पास जरूरी मेडिकल योग्यता नहीं होती। इसलिए किसी भी तरह का स्किन या हेयर ट्रीटमेंट कराने से पहले डॉक्टर की डिग्री और स्टेट मेडिकल काउंसिल में उसका रजिस्ट्रेशन जरूर जांच लेना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे उपचार हमेशा प्रशिक्षित और पंजीकृत मेडिकल विशेषज्ञों से ही कराए जाने चाहिए।

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कड़े नियम और प्रशिक्षण जरूरी
देश की प्रमुख मेडिकल संस्थाओं ने हेयर ट्रांसप्लांट और अन्य कॉस्मेटिक उपचारों को लेकर मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (आईएडीवीएल) और एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जन्स ऑफ इंडिया (एपीएसआई) के डॉक्टरों ने कहा कि इन प्रक्रियाओं के लिए कड़े नियम और विशेष प्रशिक्षण जरूरी है। 

मरीजों की सेहत को बड़ा खतरा
आईएडीवीएल के अध्यक्ष डॉ. विनय सिंह ने कहा कि हेयर ट्रांसप्लांट जैसे उपचार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है। एक डर्मेटोलॉजिस्ट बनने के लिए डॉक्टर को एमबीबीएस के बाद तीन साल की पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग और रेजिडेंसी पूरी करनी होती है। इस दौरान त्वचा, बालों की बीमारियों और उनसे जुड़े उन्नत उपचारों के बारे में गहन अध्ययन कराया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना पर्याप्त योग्यता और प्रशिक्षण वाले लोगों द्वारा ऐसे इलाज किए जाने से मरीजों की सेहत को बड़ा खतरा हो सकता है। उन्होंने लोगों से किसी भी स्किन, हेयर या कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट से पहले डॉक्टर की योग्यता और पंजीकरण की जांच करने की सलाह दी।

ट्रीटमेंट से पहले डॉक्टर का स्टेट मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण जरूर जांचें
प्लास्टिक सर्जन डॉ. रजत गुप्ता ने लोगों को सलाह दी कि किसी भी तरह का स्किन या हेयर ट्रीटमेंट कराने से पहले डॉक्टर का स्टेट मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण जरूर जांचें। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर प्रिस्क्रिप्शन पर साफ लिखा होना चाहिए। इससे मरीजों को सही और सुरक्षित उपचार मिलने की संभावना बढ़ती है। उन्होंने बताया कि हाल ही में डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने डेंटिस्ट्स एक्ट, 1948 के तहत कुछ डेंटल सर्जनों को हेयर ट्रांसप्लांट और कुछ एस्थेटिक प्रक्रियाएं करने की अनुमति दी गई है। इसके बाद यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के उपचार पारंपरिक रूप से डर्मेटोलॉजिस्ट और प्लास्टिक सर्जन जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा किए जाते रहे हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।

हेयर ट्रांसप्लांट ले चुका है जान
वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डॉ. आदित्य अग्रवाल ने बताया कि हेयर ट्रांसप्लांट एक आधुनिक और जटिल मेडिकल प्रक्रिया है। इसे करने के लिए त्वचा की बनावट, बालों से जुड़ी बीमारियों, संक्रमण नियंत्रण और संभावित जटिलताओं को संभालने की गहरी समझ जरूरी होती है। इसलिए यह प्रक्रिया केवल पंजीकृत और प्रशिक्षित मेडिकल विशेषज्ञों द्वारा ही की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में देश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें बिना पर्याप्त योग्यता वाले लोगों ने कॉस्मेटिक या हेयर ट्रांसप्लांट जैसे उपचार किए और मरीजों को गंभीर नुकसान हुआ। कानपुर में हुए एक चर्चित मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हेयर ट्रांसप्लांट के बाद दो इंजीनियरों की मौत हो गई थी। आरोप है कि यह प्रक्रिया एक डेंटल सर्जन द्वारा की गई थी।

मजबूत कानूनी व्यवस्था की जरूरत
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. दीपिका पांधी ने बताया कि मेडिकल सेवाओं के विज्ञापन और मार्केटिंग को नियंत्रित करने के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था की जरूरत है। इससे फर्जी डॉक्टरों और भ्रामक प्रचार पर रोक लगाई जा सकेगी। उन्होंने बताया कि कई वेबसाइट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पैसे लेकर ऐसे लोगों को डर्मेटोलॉजिस्ट के रूप में प्रचारित करते हैं, जिनके पास पर्याप्त मेडिकल योग्यता नहीं होती। इससे लोग गलत जानकारी के आधार पर उपचार करा लेते हैं और उनकी सेहत खतरे में पड़ सकती है।

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