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Delhi NCR News: मेट्रो की रफ्तार से बदलेगा नरेला, डिपो के साथ खुलेंगे विकास के नए रास्ते
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19.63 हेक्टेयर जमीन का लैंड यूज परिवहन में बदला, रिठाला-कुंडली कॉरिडोर के डिपो को मिलेगी जगह
नरेला को आवासीय उपनगर से नए शहरी केंद्र में बदलने की तैयारी, मेट्रो के साथ शिक्षा, रोजगार और बाजार को मिलेगा विस्तार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नरेला सब-सिटी के विकास को अब मेट्रो की रफ्तार मिलने की उम्मीद है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने नरेला में 19.63 हेक्टेयर जमीन का लैंड यूज बदलकर परिवहन कर दिया है। इस जमीन पर रिठाला-नरेला-नाथूपुर (कुंडली) मेट्रो कॉरिडोर के डिपो का विकास किया जाएगा। इससे नरेला में मेट्रो की मौजूदगी केवल स्टेशन और लाइन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे कॉरिडोर के संचालन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा भी यहीं विकसित होगा।
नरेला लंबे समय से दिल्ली के नियोजित उपनगरों में शामिल होने के बावजूद अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सका है। डीडीए ने यहां बड़े पैमाने पर आवासीय विकास किया, सस्ती दरों पर फ्लैट और जमीन उपलब्ध कराई, लेकिन कमजोर सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी इसकी सबसे बड़ी बाधा बनी रही। डीडीए के दस्तावेजों में भी माना गया है कि परिवहन सुविधाओं की कमी के कारण नरेला की आवासीय योजनाओं को दूसरे उपनगरों की तरह अपेक्षित पसंद नहीं मिली।
ऐसे में मेट्रो कॉरिडोर और उसके डिपो के लिए जमीन का लैंड यूज बदलना नरेला के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है। 26.463 किलोमीटर लंबे रिठाला-नरेला-नाथूपुर कॉरिडोर में 21 स्टेशन होंगे। यह रिठाला से नरेला होते हुए हरियाणा के कुंडली और नाथूपुर तक पहुंचेगा। इससे नरेला के साथ बवाना और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के कई इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। दिल्ली और हरियाणा के बीच संपर्क मजबूत होने के साथ सड़क नेटवर्क पर दबाव और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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मेट्रो की सीधी कनेक्टिविटी नरेला के उन निवासियों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण होगी, जो नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के लिए दिल्ली के दूसरे हिस्सों में रोजाना आते-जाते हैं। रिठाला और रोहिणी से सीधा संपर्क बनने के बाद यात्रा का समय और सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर लोगों की परेशानी कम हो सकती है। यही बदलाव नरेला के आवासीय बाजार को भी नई मांग दे सकता है।
मेट्रो के साथ नरेला में शिक्षा और संस्थागत गतिविधियों के विस्तार की भी जमीन तैयार हो रही है। डीडीए ने विश्वविद्यालयों के लिए भूमि आवंटन से जुड़े फैसले किए हैं। 2026 में सात सरकारी विश्वविद्यालयों के लिए आवंटित जमीन की वित्तीय शर्तों को आसान करने का फैसला भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे नरेला में उच्च शिक्षा और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने की संभावना है। आवास, मेट्रो, शिक्षा, रोजगार और बाजार के बीच बेहतर तालमेल बनने पर नरेला की पहचान केवल बाहरी दिल्ली के दूरस्थ आवासीय इलाके के रूप में नहीं, बल्कि एक नए शहरी केंद्र के रूप में विकसित हो सकती है।
डीडीए ने मकान तो बनाए...लेकिन रोहिणी, द्वारका जैसी सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं
नरेला की सबसे बड़ी समस्या यह रही है कि यहां घर तो बने, लेकिन उनके आसपास रोहिणी और द्वारका जैसे नियोजित उपनगरों के अनुरूप परिवहन और शहरी सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं। डीडीए ने कई वर्ष पहले यहां 25 हजार से अधिक फ्लैट तैयार किए थे और मेट्रो आने के बाद आवासीय तथा व्यावसायिक विकास में तेजी की उम्मीद जताई थी। पिछले वर्षों में डीडीए को नरेला के फ्लैट बेचने में भी चुनौती का सामना करना पड़ा। अब मेट्रो से रिठाला और रोहिणी तक सीधा संपर्क बनने पर नौकरीपेशा, कारोबारी और विद्यार्थियों के लिए नरेला में रहना अधिक सुविधाजनक हो सकता है। इससे खाली या कम आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।
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पूर्वी दिल्ली का गाजीपुर बनेगा वेस्ट-टू-एनर्जी हब
पूर्वी दिल्ली में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए डीडीए ने गाजीपुर के पॉकेट-सी (आईएफसी) में भूमि का लैंड यूज व्यावसायिक से यूटिलिटी करने की मंजूरी दी है। यहां वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित किया जाएगा। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए गाजीपुर के पॉकेट-बी (आईएफसी) में 752.51 वर्ग मीटर भूमि का उपयोग बदलकर मनोरंजन केंद्र और सामुदायिक पार्क विकसित करने की मंजूरी दी गई है।
दिल्ली के इन खास इलाकों में लैंड यूज बदलकर होगा ढांचागत सुधार
सरोजिनी नगर: आवासीय क्षेत्र के पास स्थित प्लॉट वाई की 24,400 वर्ग मीटर जमीन का उपयोग परिवहन (रेलवे सर्कुलेशन) से बदलकर आवासीय करने की मंजूरी दी गई है। इससे क्षेत्र में आवासीय विकास के विस्तार का रास्ता खुलेगा।
कॉपरनिकस लेन:
नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय विद्या भवन को आवंटित बंगला नंबर 12, 14 और 16 के तीन भूखंडों का लैंड यूज आवासीय से सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक किया गया है। इससे यहां उच्च शिक्षा और भारतीय ज्ञान प्रणालियों से जुड़े शोध कार्यों के विस्तार की संभावना बढ़ेगी।
रोशनपुरा:
वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया के मुख्यालय के लिए 7,978 वर्ग मीटर (1.97 एकड़) जमीन का लैंड यूज आवासीय से सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
केशोपुर-मंगोलपुरी:
केशोपुर और मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 को विकास क्षेत्र के रूप में डिनोटिफाई किया गया है। इससे इन क्षेत्रों में नागरिक बुनियादी ढांचे, रखरखाव और स्थानीय निकायों की सेवाओं को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
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नरेला को आवासीय उपनगर से नए शहरी केंद्र में बदलने की तैयारी, मेट्रो के साथ शिक्षा, रोजगार और बाजार को मिलेगा विस्तार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नरेला सब-सिटी के विकास को अब मेट्रो की रफ्तार मिलने की उम्मीद है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने नरेला में 19.63 हेक्टेयर जमीन का लैंड यूज बदलकर परिवहन कर दिया है। इस जमीन पर रिठाला-नरेला-नाथूपुर (कुंडली) मेट्रो कॉरिडोर के डिपो का विकास किया जाएगा। इससे नरेला में मेट्रो की मौजूदगी केवल स्टेशन और लाइन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे कॉरिडोर के संचालन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा भी यहीं विकसित होगा।
नरेला लंबे समय से दिल्ली के नियोजित उपनगरों में शामिल होने के बावजूद अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सका है। डीडीए ने यहां बड़े पैमाने पर आवासीय विकास किया, सस्ती दरों पर फ्लैट और जमीन उपलब्ध कराई, लेकिन कमजोर सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी इसकी सबसे बड़ी बाधा बनी रही। डीडीए के दस्तावेजों में भी माना गया है कि परिवहन सुविधाओं की कमी के कारण नरेला की आवासीय योजनाओं को दूसरे उपनगरों की तरह अपेक्षित पसंद नहीं मिली।
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ऐसे में मेट्रो कॉरिडोर और उसके डिपो के लिए जमीन का लैंड यूज बदलना नरेला के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है। 26.463 किलोमीटर लंबे रिठाला-नरेला-नाथूपुर कॉरिडोर में 21 स्टेशन होंगे। यह रिठाला से नरेला होते हुए हरियाणा के कुंडली और नाथूपुर तक पहुंचेगा। इससे नरेला के साथ बवाना और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के कई इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। दिल्ली और हरियाणा के बीच संपर्क मजबूत होने के साथ सड़क नेटवर्क पर दबाव और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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मेट्रो की सीधी कनेक्टिविटी नरेला के उन निवासियों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण होगी, जो नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के लिए दिल्ली के दूसरे हिस्सों में रोजाना आते-जाते हैं। रिठाला और रोहिणी से सीधा संपर्क बनने के बाद यात्रा का समय और सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर लोगों की परेशानी कम हो सकती है। यही बदलाव नरेला के आवासीय बाजार को भी नई मांग दे सकता है।
मेट्रो के साथ नरेला में शिक्षा और संस्थागत गतिविधियों के विस्तार की भी जमीन तैयार हो रही है। डीडीए ने विश्वविद्यालयों के लिए भूमि आवंटन से जुड़े फैसले किए हैं। 2026 में सात सरकारी विश्वविद्यालयों के लिए आवंटित जमीन की वित्तीय शर्तों को आसान करने का फैसला भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे नरेला में उच्च शिक्षा और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने की संभावना है। आवास, मेट्रो, शिक्षा, रोजगार और बाजार के बीच बेहतर तालमेल बनने पर नरेला की पहचान केवल बाहरी दिल्ली के दूरस्थ आवासीय इलाके के रूप में नहीं, बल्कि एक नए शहरी केंद्र के रूप में विकसित हो सकती है।
डीडीए ने मकान तो बनाए...लेकिन रोहिणी, द्वारका जैसी सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं
नरेला की सबसे बड़ी समस्या यह रही है कि यहां घर तो बने, लेकिन उनके आसपास रोहिणी और द्वारका जैसे नियोजित उपनगरों के अनुरूप परिवहन और शहरी सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं। डीडीए ने कई वर्ष पहले यहां 25 हजार से अधिक फ्लैट तैयार किए थे और मेट्रो आने के बाद आवासीय तथा व्यावसायिक विकास में तेजी की उम्मीद जताई थी। पिछले वर्षों में डीडीए को नरेला के फ्लैट बेचने में भी चुनौती का सामना करना पड़ा। अब मेट्रो से रिठाला और रोहिणी तक सीधा संपर्क बनने पर नौकरीपेशा, कारोबारी और विद्यार्थियों के लिए नरेला में रहना अधिक सुविधाजनक हो सकता है। इससे खाली या कम आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।
पूर्वी दिल्ली का गाजीपुर बनेगा वेस्ट-टू-एनर्जी हब
पूर्वी दिल्ली में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए डीडीए ने गाजीपुर के पॉकेट-सी (आईएफसी) में भूमि का लैंड यूज व्यावसायिक से यूटिलिटी करने की मंजूरी दी है। यहां वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित किया जाएगा। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए गाजीपुर के पॉकेट-बी (आईएफसी) में 752.51 वर्ग मीटर भूमि का उपयोग बदलकर मनोरंजन केंद्र और सामुदायिक पार्क विकसित करने की मंजूरी दी गई है।
दिल्ली के इन खास इलाकों में लैंड यूज बदलकर होगा ढांचागत सुधार
सरोजिनी नगर: आवासीय क्षेत्र के पास स्थित प्लॉट वाई की 24,400 वर्ग मीटर जमीन का उपयोग परिवहन (रेलवे सर्कुलेशन) से बदलकर आवासीय करने की मंजूरी दी गई है। इससे क्षेत्र में आवासीय विकास के विस्तार का रास्ता खुलेगा।
कॉपरनिकस लेन:
नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय विद्या भवन को आवंटित बंगला नंबर 12, 14 और 16 के तीन भूखंडों का लैंड यूज आवासीय से सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक किया गया है। इससे यहां उच्च शिक्षा और भारतीय ज्ञान प्रणालियों से जुड़े शोध कार्यों के विस्तार की संभावना बढ़ेगी।
रोशनपुरा:
वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया के मुख्यालय के लिए 7,978 वर्ग मीटर (1.97 एकड़) जमीन का लैंड यूज आवासीय से सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
केशोपुर-मंगोलपुरी:
केशोपुर और मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 को विकास क्षेत्र के रूप में डिनोटिफाई किया गया है। इससे इन क्षेत्रों में नागरिक बुनियादी ढांचे, रखरखाव और स्थानीय निकायों की सेवाओं को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।