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Delhi NCR News: पीढ़ियां बदलीं, तिरंगे से रिश्ता नहीं, सुई धागे से पीढ़ियों ने संभाली देशभक्ति की विरासत
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस नजदीक आते ही दिल्ली के बाजार तिरंगे के रंग में रंग गए हैं। सदर बाजार की संकरी गलियों में केसरिया, सफेद और हरे रंग के कपड़ों की कतार दिखाई दे रही है। कहीं कपड़ों के थान सजे हैं तो कहीं कारीगर सिलाई मशीनों पर तिरंगे तैयार करने में जुटे हैं। मशीनों की लगातार आवाज और दुकानों के बाहर सजे राष्ट्रीय ध्वज बता रहे हैं कि 15 अगस्त की तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। लेकिन तिरंगे की इस बढ़ती मांग के पीछे सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि कई दशकों पुरानी विरासत भी जुड़ी है, जिसे पीढ़ियां सुई-धागे के सहारे आगे बढ़ा रही हैं। सदर बाजार का भारत हैंडलूम क्लाथ हाउस इसी विरासत की पहचान है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौर से इस प्रतिष्ठान का तिरंगे से जुड़ाव रहा है।
स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा परिवार का रिश्ता
दुकान के संचालक अब्दुल मलिक ने बताया कि उनके परिवार का रिश्ता स्वतंत्रता संग्राम के दौर से ही खादी और राष्ट्रीय ध्वज से रहा है। उस समय बंगाल से आने वाली खादी से राष्ट्रीय ध्वज तैयार किया जाता था। धीरे-धीरे यही काम परिवार की पहचान बन गया और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता गया। अब्दुल मलिक के पिता अब्दुल गफ्फार भी तिरंगे की इस विरासत को आगे बढ़ाते रहे। 81 वर्ष की उम्र में 29 दिसंबर 2025 को उनका निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें ‘फ्लैग अंकल’ के नाम से संबोधित कर चुके थे। उनके निधन के बाद अब परिवार की तीसरी पीढ़ी इस काम को संभाल रही है।
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घरों से शुरू हुआ काम, अब बड़े बाजार तक पहुंचा
सदर बाजार में तिरंगा बनाने की एक और लंबी कहानी अनिल कुमार गुप्ता की है। अनिल गुप्ता करीब 35 वर्षों से तिरंगे बनाने के काम से जुड़े हैं। उन्होंने वर्ष 1990 में जोड़ के कपड़े से तिरंगा तैयार करने का काम शुरू किया था। शुरुआत आसान नहीं थी। अलग-अलग रंग के कपड़े जुटाकर उन्हें जोड़ने के बाद तिरंगा तैयार किया जाता था। उनके बेटे सौरभ गुप्ता ने बताया कि शुरुआती दिनों में उनके पिता जोड़ का कपड़ा घर पर काम करने वाले कारीगरों को देते थे। कारीगर इन कपड़ों को सिलकर तिरंगे तैयार करते थे। धीरे-धीरे काम बढ़ता गया और आज अलग-अलग तरह के झंडों की मांग आने लगी है। उनके यहां साटन से लेकर खादी तक कई तरह के कपड़ों के तिरंगे उपलब्ध हैं।
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15 अगस्त से पहले बढ़ जाती है रफ्तार
स्वतंत्रता दिवस से पहले तिरंगे की मांग अचानक बढ़ जाती है। स्कूलों, संस्थानों, दुकानों और आम लोगों के लिए अलग-अलग आकार के झंडे तैयार किए जा रहे हैं। छोटे तिरंगे घरों और वाहनों में लगाने के लिए खरीदे जा रहे हैं, जबकि बड़े झंडों की मांग संस्थानों और स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों के लिए रहती है। तिरंगे के साथ देशभक्ति से जुड़ी अन्य वस्तुओं की बिक्री भी बढ़ गई है। दुकानों पर देशभक्ति के बैज, कलाई पर बांधने वाले तिरंगे रंग के रिबन और गाड़ियों के डैशबोर्ड पर लगाने वाले छोटे झंडे भी उपलब्ध हैं। कारोबारियों का कहना है कि 15 अगस्त तक बाजार में तिरंगे की मांग और बढ़ने की उम्मीद है।