ग्रेनो में आईपीएस के घर से ड्रग की सबसे बड़ी बरामदगी, जब्त 1818 किलो स्यूडोफेड्रिन की कीमत 25 करोड़
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में एक आईपीएस के घर पर छापेमारी कर नशे के गोरखधंधे में लिप्त अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। एनसीबी ने पुलिस अफसर के घर से 1800 किलो से ज्यादा स्यूडोफेड्रिन ड्रग जब्त किया है। इस खेप के साथ महिला समेत तीन नाइजीरियाई नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। तीनों विदेशी नागरिक किराये पर रहते थे।
महंगी पार्टियों में इस्तेमाल होने वाले इस ड्रग की कीमत 25 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा विदेशी नागरिकों के पास से दो किलो कोकीन भी जब्त की गई है। भारत में स्यूडोफेड्रिन ड्रग की यह अब तक की सबसे बड़ी खेप पकड़ी गई है। एनसीबी के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि दो दिन पहले 9 मई को दिल्ली एयरपोर्ट से दक्षिण अफ्रीका की एक महिला को गिरफ्तार किया गया था। एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ ने इस महिला के पास से 24.7 किलो स्यूडोफेड्रिन ड्रग बरामद किया था। महिला से पूछताछ और उसकी निशानदेही के आधार पर ही एनसीबी को ग्रेटर नोएडा में एक फैक्टरी के बाहर से 1818 किलो स्यूडोफेड्रिन और 1.9 किलो कोकीन पकड़ने में कामयाबी मिली। स्यूडोफेड्रिन का ज्यादातर इस्तेमाल यूरोप और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में होता है।
अफ्रीकी देशों में होती है तस्करी
एनसीबी के महानिदेशक अभय ने कहा कि 1818 किलो स्यूडोफेड्रिन एक बड़ी मात्रा है। यह एक केमिकल है, जिसका प्रयोग दवाएं बनाने के लिए होता है। जब्त केमिकल को देश मे सिर्फ दो कंपनियां ही बनाती है। एनसीबी अब उस जगह का पता लगा रही है जहां से ये केमिकल को निकाल कर नशे का सामान बनाया जा रहा था। नशे की दुनिया में इसे याबा, आइस और क्रिस्टल मैथ कहते हैं। इसकी तस्करी ज्यादातर अफ्रीकी देशों में हो रही है।
किरायेदारों का नहीं था पुलिस वेरिफिकेशन
सूत्रों ने बताया कि पकड़े गए तीनों नाइजीरियाई नागरिक लखनऊ में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में तैनात आईपीएस अफसर डीपीएन पांडे के ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पी-4 स्थित मकान में किराये पर रहते थे। उनका पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं हुआ था। एसएसपी वैभव कृष्णा ने कहा कि इस चूक की जांच की जाएगी।
प्रापर्टी डीलर ने किराये पर चढ़ाया था मकान
डीपीएन पांडे ने ग्रेटर नोएडा स्थित अपने घर से बरामद ड्रग को लेकर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि उन्होंने डीलर के माध्यम से मकान किराये पर दिया था। वह साल में एक-दो बार ही आते हैं। वहां क्या चल रहा था, उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। पांडे के मुताबिक, ‘मेरा यह मकान काफी दिनों तक खाली पड़ा हुआ था। बाद में तीन नाइजीरियाई नागरिकों ने घर किराये पर लिया, जिसके लिए वे हर महीने 24 हजार रुपये देते थे। करीब एक साल से उन्होंने मकान का किराया भी नहीं दिया है। इतना ही नहीं, बिजली का बिल भी 2.73 लाख रुपये बकाया है। मैंने प्रापर्टी डीलर से मकान खाली कराने के लिए बोला था।’