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Delhi NCR News: मास्टर प्लान-2047 में शिक्षा का नया खाका, पढ़ाई से रोजगार तक जुड़ेगी पूरी व्यवस्था
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2047 तक शिक्षा व्यवस्था का स्कूल से रिसर्च और स्टार्टअप तक बदलेगा पूरा मॉडल
स्कूलों में खेल और गतिविधियों के लिए बढ़ेगी जगह, विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग सुविधाएं; नरेला में 138 हेक्टेयर में विकसित होगा बड़ा शिक्षा-शोध केंद्र
विनोद डबास
नई दिल्ली। दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 में शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का व्यापक खाका तैयार किया गया है। राजधानी में शिक्षा को केवल स्कूल और कॉलेज तक सीमित रखने के बजाय शुरुआती शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, शोध, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और नए कारोबार से जोड़ने की योजना है। स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र बनाए जा सकेंगे। वहीं कॉलेज, विश्वविद्यालय और शोध संस्थानों को अधिक निर्माण क्षमता देने का प्रावधान किया गया है।
मास्टर प्लान में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2047 तक दिल्ली की आबादी करीब 3.2 करोड़ हो सकती है। इस बढ़ती आबादी की जरूरतों को देखते हुए शिक्षा और अन्य सामाजिक सुविधाओं के लिए अभी से पर्याप्त जमीन और बुनियादी ढांचा विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसी कड़ी में नरेला में 138 हेक्टेयर क्षेत्र में बड़ा शिक्षा केंद्र विकसित करने की योजना है। यहां विश्वविद्यालय, शोध संस्थान, कौशल प्रशिक्षण केंद्र और नए कारोबार से जुड़े संस्थान विकसित किए जाएंगे।
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शिक्षा के लिए पूरी चेन तैयार करने की योजना
मास्टर प्लान में शिक्षा व्यवस्था को अलग-अलग स्तरों में विकसित करने के बजाय एक-दूसरे से जोड़ने की योजना है। इसमें शुरुआती शिक्षा केंद्र, कक्षा छह तक के स्कूल, कक्षा 12 तक के स्कूल, आवासीय और विशेष स्कूल, कॉलेज, शोध एवं विकास केंद्र, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, पॉलीटेक्निक, कौशल प्रशिक्षण केंद्र, प्रबंधन संस्थान, शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान, होटल प्रबंधन संस्थान, कोचिंग केंद्र और विश्वविद्यालय शामिल हैं। इससे विद्यार्थियों को शुरुआती शिक्षा से उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण होते हुए रोजगार तक पहुंचने के अधिक अवसर मिल सकेंगे।
स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल और दूसरी गतिविधियों पर जोर
स्कूलों में केवल कक्षाओं और प्रशासनिक सुविधाओं के बजाय खेल, कला, संस्कृति और अन्य गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इसके लिए स्कूलों को अधिक निर्माण क्षेत्र की अनुमति दी जाएगी। कुल अनुमत निर्माण क्षेत्र का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा खेल और अन्य अतिरिक्त गतिविधियों से जुड़ी सुविधाओं के लिए इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा। खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए तैराकी तालाब, टेबल टेनिस और स्क्वैश जैसी सुविधाओं के लिए अधिकतम 150 वर्गमीटर निर्माण क्षेत्र को निर्माण क्षेत्र और जमीन पर बने भवन की सीमा से बाहर रखने की अनुमति होगी।
स्कूलों के लिए जमीन और एफएआर के नए मानक
मास्टर प्लान में स्कूलों के स्तर के अनुसार जमीन, निर्माण और सड़क की चौड़ाई के मानक तय किए गए हैं। शुरुआती शिक्षा केंद्र के लिए कम से कम 500 वर्गमीटर जमीन, अधिकतम 40 प्रतिशत जमीन पर निर्माण और 150 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 12 मीटर और भवन की अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर रखी गई है।
-कक्षा छह तक के स्कूल के लिए कम से कम 2,000 वर्गमीटर जमीन जरूरी होगी। अधिकतम 40 प्रतिशत जमीन पर निर्माण और 150 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क कम से कम 18 मीटर चौड़ी होनी चाहिए और भवन की अधिकतम ऊंचाई 18 मीटर होगी।
-कक्षा 12 तक के स्कूल के लिए न्यूनतम 4,000 वर्गमीटर जमीन, 40 प्रतिशत तक निर्माण और 180 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 18 मीटर रखी गई है। इस श्रेणी के भवनों के लिए अधिकतम ऊंचाई की अलग सीमा तय नहीं की गई है।
दिव्यांग बच्चों के लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र
विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जा सकेंगे। विशेष स्कूल के लिए कम से कम 2,000 वर्गमीटर जमीन, अधिकतम 50 प्रतिशत जमीन पर निर्माण और 120 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 18 मीटर और भवन की अधिकतम ऊंचाई 18 मीटर होगी। इन संस्थानों में पढ़ाई के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण और खेल की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। नई और मौजूदा सभी स्कूल इमारतों में दिव्यांगजन अधिकार कानून के प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा। इसके अलावा आवासीय स्कूल खोलने का भी प्रावधान किया गया है।
कॉलेज और शोध संस्थानों को ज्यादा निर्माण क्षमता
कॉलेज, शोध एवं विकास केंद्र और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए कम से कम 1,000 वर्गमीटर जमीन या संबंधित मान्यता देने वाली संस्था का मानक, जो भी अधिक हो, लागू होगा। इन संस्थानों में अधिकतम 40 प्रतिशत जमीन पर निर्माण और 225 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 18 मीटर रखी गई है। इन परिसरों में पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, कार्यशालाएं, खेल मैदान, इनडोर खेल सुविधाएं, सभागार और छात्रावास बनाए जा सकेंगे। विद्यार्थियों और जरूरी कर्मचारियों के आवास की व्यवस्था भी परिसर में की जा सकेगी।
विश्वविद्यालयों के लिए एफएआर 225, खेल और हरियाली 30 प्रतिशत जमीन पर
विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्रों के लिए अधिकतम 225 एफएआर का प्रावधान है। इनके लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 24 मीटर होगी और जमीन का आकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के मानकों के अनुसार तय किया जाएगा।
विश्वविद्यालय परिसर की कुल जमीन का 15 प्रतिशत हिस्सा खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए तथा अलग 15 प्रतिशत पार्क और हरियाली के लिए रखना होगा। इस तरह बड़े शिक्षण परिसरों में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के लिए खेल और खुले स्थान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
नरेला बनेगा दिल्ली का नया शिक्षा और शोध केंद्र
नरेला में 138 हेक्टेयर क्षेत्र में बड़ा शिक्षा केंद्र विकसित करने की योजना है। यहां विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ कौशल प्रशिक्षण केंद्र और नए कारोबार शुरू करने वालों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य शिक्षा को शोध, कौशल, नवाचार और रोजगार से जोड़ना है। यहां सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के अलावा अन्य शैक्षणिक और शोध संस्थानों को जगह मिल सकेगी।
शिक्षा और सार्वजनिक परिवहन का भी होगा मेल
मास्टर प्लान में करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन आधारित विकास की योजना है। मेट्रो, क्षेत्रीय रेल, रेलवे और तेज गति वाली रेल के आसपास मिश्रित और अपेक्षाकृत घना विकास किया जाएगा। इन क्षेत्रों में आवास और कारोबार के साथ शिक्षा तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को भी जगह दी जाएगी। इससे शिक्षण संस्थानों और विद्यार्थियों के बीच सार्वजनिक परिवहन की बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने में मदद मिल सकती है। शिक्षा केंद्रों को परिवहन नेटवर्क से जोड़ने से दूर के इलाकों से आने वाले छात्रों के लिए आवागमन भी आसान होगा।
आंकड़ों में मास्टर प्लान-2047
2047 की संभावित आबादी: करीब 3.2 करोड़
नरेला शिक्षा केंद्र: 138 हेक्टेयर
शुरुआती शिक्षा केंद्र की न्यूनतम जमीन: 500 वर्गमीटर
कक्षा छह तक स्कूल की न्यूनतम जमीन: 2,000 वर्गमीटर
कक्षा 12 तक स्कूल की न्यूनतम जमीन: 4,000 वर्गमीटर
कक्षा छह तक स्कूल का अधिकतम एफएआर: 150
कक्षा 12 तक स्कूल का अधिकतम एफएआर: 180
विशेष स्कूल का अधिकतम एफएआर: 120
कॉलेज/शोध संस्थान का अधिकतम एफएआर: 225
विश्वविद्यालय का अधिकतम एफएआर: 225
स्कूलों में अतिरिक्त गतिविधियों के लिए: कम से कम 15 प्रतिशत अनुमत निर्माण क्षेत्र
विश्वविद्यालय में खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए: 15 प्रतिशत जमीन
विश्वविद्यालय में पार्क व हरियाली के लिए: 15 प्रतिशत जमीन
शिक्षा आधारित सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र: करीब 200 वर्ग किलोमीटर
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स्कूलों में खेल और गतिविधियों के लिए बढ़ेगी जगह, विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग सुविधाएं
विनोद डबास
नई दिल्ली। दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 में शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का व्यापक खाका तैयार किया गया है। राजधानी में शिक्षा को केवल स्कूल और कॉलेज तक सीमित रखने के बजाय शुरुआती शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, शोध, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और नए कारोबार से जोड़ने की योजना है। स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र बनाए जा सकेंगे। वहीं कॉलेज, विश्वविद्यालय और शोध संस्थानों को अधिक निर्माण क्षमता देने का प्रावधान किया गया है।
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मास्टर प्लान में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2047 तक दिल्ली की आबादी करीब 3.2 करोड़ हो सकती है। इस बढ़ती आबादी की जरूरतों को देखते हुए शिक्षा और अन्य सामाजिक सुविधाओं के लिए अभी से पर्याप्त जमीन और बुनियादी ढांचा विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसी कड़ी में नरेला में 138 हेक्टेयर क्षेत्र में बड़ा शिक्षा केंद्र विकसित करने की योजना है। यहां विश्वविद्यालय, शोध संस्थान, कौशल प्रशिक्षण केंद्र और नए कारोबार से जुड़े संस्थान विकसित किए जाएंगे।
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शिक्षा के लिए पूरी चेन तैयार करने की योजना
मास्टर प्लान में शिक्षा व्यवस्था को अलग-अलग स्तरों में विकसित करने के बजाय एक-दूसरे से जोड़ने की योजना है। इसमें शुरुआती शिक्षा केंद्र, कक्षा छह तक के स्कूल, कक्षा 12 तक के स्कूल, आवासीय और विशेष स्कूल, कॉलेज, शोध एवं विकास केंद्र, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, पॉलीटेक्निक, कौशल प्रशिक्षण केंद्र, प्रबंधन संस्थान, शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान, होटल प्रबंधन संस्थान, कोचिंग केंद्र और विश्वविद्यालय शामिल हैं। इससे विद्यार्थियों को शुरुआती शिक्षा से उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण होते हुए रोजगार तक पहुंचने के अधिक अवसर मिल सकेंगे।
स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल और दूसरी गतिविधियों पर जोर
स्कूलों में केवल कक्षाओं और प्रशासनिक सुविधाओं के बजाय खेल, कला, संस्कृति और अन्य गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इसके लिए स्कूलों को अधिक निर्माण क्षेत्र की अनुमति दी जाएगी। कुल अनुमत निर्माण क्षेत्र का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा खेल और अन्य अतिरिक्त गतिविधियों से जुड़ी सुविधाओं के लिए इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा। खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए तैराकी तालाब, टेबल टेनिस और स्क्वैश जैसी सुविधाओं के लिए अधिकतम 150 वर्गमीटर निर्माण क्षेत्र को निर्माण क्षेत्र और जमीन पर बने भवन की सीमा से बाहर रखने की अनुमति होगी।
स्कूलों के लिए जमीन और एफएआर के नए मानक
मास्टर प्लान में स्कूलों के स्तर के अनुसार जमीन, निर्माण और सड़क की चौड़ाई के मानक तय किए गए हैं। शुरुआती शिक्षा केंद्र के लिए कम से कम 500 वर्गमीटर जमीन, अधिकतम 40 प्रतिशत जमीन पर निर्माण और 150 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 12 मीटर और भवन की अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर रखी गई है।
-कक्षा छह तक के स्कूल के लिए कम से कम 2,000 वर्गमीटर जमीन जरूरी होगी। अधिकतम 40 प्रतिशत जमीन पर निर्माण और 150 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क कम से कम 18 मीटर चौड़ी होनी चाहिए और भवन की अधिकतम ऊंचाई 18 मीटर होगी।
-कक्षा 12 तक के स्कूल के लिए न्यूनतम 4,000 वर्गमीटर जमीन, 40 प्रतिशत तक निर्माण और 180 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 18 मीटर रखी गई है। इस श्रेणी के भवनों के लिए अधिकतम ऊंचाई की अलग सीमा तय नहीं की गई है।
दिव्यांग बच्चों के लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र
विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जा सकेंगे। विशेष स्कूल के लिए कम से कम 2,000 वर्गमीटर जमीन, अधिकतम 50 प्रतिशत जमीन पर निर्माण और 120 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 18 मीटर और भवन की अधिकतम ऊंचाई 18 मीटर होगी। इन संस्थानों में पढ़ाई के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण और खेल की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। नई और मौजूदा सभी स्कूल इमारतों में दिव्यांगजन अधिकार कानून के प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा। इसके अलावा आवासीय स्कूल खोलने का भी प्रावधान किया गया है।
कॉलेज और शोध संस्थानों को ज्यादा निर्माण क्षमता
कॉलेज, शोध एवं विकास केंद्र और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए कम से कम 1,000 वर्गमीटर जमीन या संबंधित मान्यता देने वाली संस्था का मानक, जो भी अधिक हो, लागू होगा। इन संस्थानों में अधिकतम 40 प्रतिशत जमीन पर निर्माण और 225 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 18 मीटर रखी गई है। इन परिसरों में पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, कार्यशालाएं, खेल मैदान, इनडोर खेल सुविधाएं, सभागार और छात्रावास बनाए जा सकेंगे। विद्यार्थियों और जरूरी कर्मचारियों के आवास की व्यवस्था भी परिसर में की जा सकेगी।
विश्वविद्यालयों के लिए एफएआर 225, खेल और हरियाली 30 प्रतिशत जमीन पर
विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्रों के लिए अधिकतम 225 एफएआर का प्रावधान है। इनके लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 24 मीटर होगी और जमीन का आकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के मानकों के अनुसार तय किया जाएगा।
विश्वविद्यालय परिसर की कुल जमीन का 15 प्रतिशत हिस्सा खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए तथा अलग 15 प्रतिशत पार्क और हरियाली के लिए रखना होगा। इस तरह बड़े शिक्षण परिसरों में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के लिए खेल और खुले स्थान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
नरेला बनेगा दिल्ली का नया शिक्षा और शोध केंद्र
नरेला में 138 हेक्टेयर क्षेत्र में बड़ा शिक्षा केंद्र विकसित करने की योजना है। यहां विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ कौशल प्रशिक्षण केंद्र और नए कारोबार शुरू करने वालों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य शिक्षा को शोध, कौशल, नवाचार और रोजगार से जोड़ना है। यहां सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के अलावा अन्य शैक्षणिक और शोध संस्थानों को जगह मिल सकेगी।
शिक्षा और सार्वजनिक परिवहन का भी होगा मेल
मास्टर प्लान में करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन आधारित विकास की योजना है। मेट्रो, क्षेत्रीय रेल, रेलवे और तेज गति वाली रेल के आसपास मिश्रित और अपेक्षाकृत घना विकास किया जाएगा। इन क्षेत्रों में आवास और कारोबार के साथ शिक्षा तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को भी जगह दी जाएगी। इससे शिक्षण संस्थानों और विद्यार्थियों के बीच सार्वजनिक परिवहन की बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने में मदद मिल सकती है। शिक्षा केंद्रों को परिवहन नेटवर्क से जोड़ने से दूर के इलाकों से आने वाले छात्रों के लिए आवागमन भी आसान होगा।
आंकड़ों में मास्टर प्लान-2047
2047 की संभावित आबादी: करीब 3.2 करोड़
नरेला शिक्षा केंद्र: 138 हेक्टेयर
शुरुआती शिक्षा केंद्र की न्यूनतम जमीन: 500 वर्गमीटर
कक्षा छह तक स्कूल की न्यूनतम जमीन: 2,000 वर्गमीटर
कक्षा 12 तक स्कूल की न्यूनतम जमीन: 4,000 वर्गमीटर
कक्षा छह तक स्कूल का अधिकतम एफएआर: 150
कक्षा 12 तक स्कूल का अधिकतम एफएआर: 180
विशेष स्कूल का अधिकतम एफएआर: 120
कॉलेज/शोध संस्थान का अधिकतम एफएआर: 225
विश्वविद्यालय का अधिकतम एफएआर: 225
स्कूलों में अतिरिक्त गतिविधियों के लिए: कम से कम 15 प्रतिशत अनुमत निर्माण क्षेत्र
विश्वविद्यालय में खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए: 15 प्रतिशत जमीन
विश्वविद्यालय में पार्क व हरियाली के लिए: 15 प्रतिशत जमीन
शिक्षा आधारित सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र: करीब 200 वर्ग किलोमीटर