{"_id":"6a747f4e2d8106fc450a426c","slug":"ngt-seeks-report-on-action-taken-against-illegal-car-wash-centers-in-noida-greater-noida-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-149334-2026-08-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: नोएडा-ग्रेटर नोएडा के अवैध कार वॉश सेंटरों पर कार्रवाई की एनजीटी ने मांगी रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: नोएडा-ग्रेटर नोएडा के अवैध कार वॉश सेंटरों पर कार्रवाई की एनजीटी ने मांगी रिपोर्ट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुआ था मामला
-रिपोर्ट में नोएडा के वॉशिंग सेंटरों में बड़े पैमाने पर पानी की बर्बादी का मुद्दा उठाया गया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में चल रहे अवैध वाहन धुलाई केंद्रों पर कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। साथ ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और उत्तर प्रदेश भूजल विभाग से इन केंद्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामले की सुनवाई एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की। यह मामला एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें नोएडा के वॉशिंग सेंटरों में बड़े पैमाने पर पानी की बर्बादी का मुद्दा उठाया गया था।
एनजीटी के पहले आदेश के बाद गौतमबुद्ध नगर जिले में वाहन धुलाई केंद्रों की जांच की गई। भूजल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल 193 वाहन धुलाई केंद्र मिले। इनमें 55 केंद्र औद्योगिक क्षेत्रों में और 138 केंद्र गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित मिले। रिपोर्ट में बताया गया कि औद्योगिक क्षेत्रों के 55 केंद्रों में से 14 के पास जरूरी अनुमति मिली हुई है, जबकि 12 ने अनुमति के लिए आवेदन किया है। वहीं, 23 केंद्र ऐसे पाए गए जिन्होंने न तो अनुमति ली और न ही आवेदन किया। इन केंद्रों पर उत्तर प्रदेश भूजल कानून के तहत दो लाख रुपये तक जुर्माना लगाने का फैसला किया है।
गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे 138 वाहन धुलाई केंद्रों पर भी कार्रवाई की गई है। यूपीपीसीबी ने बिजली कनेक्शन काटने के लिए बिजली विभाग को पत्र भेजे थे। सुनवाई के दौरान बोर्ड ने बताया कि इनमें से 100 केंद्रों के बिजली कनेक्शन काटे जा चुके हैं। हालांकि, एनजीटी ने पाया कि रिपोर्ट में कुछ केंद्रों की जानकारी अधूरी है। यूपीपीसीबी के अनुसार नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वाहन धुलाई केंद्रों की संख्या 204 है, जबकि रिपोर्ट में केवल 193 केंद्रों का विवरण दिया गया है। इस अंतर पर एनजीटी ने पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने दोनों विभागों को चार सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर 2026 को होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
-रिपोर्ट में नोएडा के वॉशिंग सेंटरों में बड़े पैमाने पर पानी की बर्बादी का मुद्दा उठाया गया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में चल रहे अवैध वाहन धुलाई केंद्रों पर कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। साथ ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और उत्तर प्रदेश भूजल विभाग से इन केंद्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामले की सुनवाई एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की। यह मामला एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें नोएडा के वॉशिंग सेंटरों में बड़े पैमाने पर पानी की बर्बादी का मुद्दा उठाया गया था।
एनजीटी के पहले आदेश के बाद गौतमबुद्ध नगर जिले में वाहन धुलाई केंद्रों की जांच की गई। भूजल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल 193 वाहन धुलाई केंद्र मिले। इनमें 55 केंद्र औद्योगिक क्षेत्रों में और 138 केंद्र गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित मिले। रिपोर्ट में बताया गया कि औद्योगिक क्षेत्रों के 55 केंद्रों में से 14 के पास जरूरी अनुमति मिली हुई है, जबकि 12 ने अनुमति के लिए आवेदन किया है। वहीं, 23 केंद्र ऐसे पाए गए जिन्होंने न तो अनुमति ली और न ही आवेदन किया। इन केंद्रों पर उत्तर प्रदेश भूजल कानून के तहत दो लाख रुपये तक जुर्माना लगाने का फैसला किया है।
विज्ञापन
गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे 138 वाहन धुलाई केंद्रों पर भी कार्रवाई की गई है। यूपीपीसीबी ने बिजली कनेक्शन काटने के लिए बिजली विभाग को पत्र भेजे थे। सुनवाई के दौरान बोर्ड ने बताया कि इनमें से 100 केंद्रों के बिजली कनेक्शन काटे जा चुके हैं। हालांकि, एनजीटी ने पाया कि रिपोर्ट में कुछ केंद्रों की जानकारी अधूरी है। यूपीपीसीबी के अनुसार नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वाहन धुलाई केंद्रों की संख्या 204 है, जबकि रिपोर्ट में केवल 193 केंद्रों का विवरण दिया गया है। इस अंतर पर एनजीटी ने पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने दोनों विभागों को चार सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर 2026 को होगी।
विज्ञापन