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Noida News: एक पक्षीय आदेश निरस्त करने की बैंक की अर्जी खारिज
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जिला उपभोक्ता आयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। जिला उपभोक्ता आयोग गौतमबुद्ध नगर ने शिवालिक मर्केन्टाइल को-ऑपरेटिव बैंक की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें आयोग से पूर्व में पारित एकपक्षीय आदेश को निरस्त कर दोबारा सुनवाई का अवसर देने की मांग की गई थी। आयोग का कहना है कि उसे अपने एकपक्षीय आदेश को निरस्त करने का अधिकार नहीं है।
2021 में दायर उपभोक्ता वाद में 24 अप्रैल 2023 को बैंक के खिलाफ एकपक्षीय आदेश पारित किया गया था। बैंक की ओर से दायर प्रार्थना-पत्र में कहा गया कि उसे आदेश की जानकारी नहीं थी। बैंक ने यह भी बताया कि संबंधित शाखा से वर्ष 2016 में आठ लाख रुपये का ऋण दिया था, जिसकी मासिक किस्त 15,461 रुपये निर्धारित थी। आरोप लगाया गया कि ऋण लेने वाले ने किस्तों का भुगतान नहीं किया, जिसके कारण ऋण खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। बाद में बैंक ने सरफेसी अधिनियम, 2002 के तहत भी कार्रवाई शुरू की।
बैंक का कहना था कि यदि एकपक्षीय आदेश को निरस्त नहीं किया गया तो उसे अपूरणीय क्षति होगी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत उसे अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। जिला उपभोक्ता आयोग गौतमबुद्ध नगर ने शिवालिक मर्केन्टाइल को-ऑपरेटिव बैंक की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें आयोग से पूर्व में पारित एकपक्षीय आदेश को निरस्त कर दोबारा सुनवाई का अवसर देने की मांग की गई थी। आयोग का कहना है कि उसे अपने एकपक्षीय आदेश को निरस्त करने का अधिकार नहीं है।
2021 में दायर उपभोक्ता वाद में 24 अप्रैल 2023 को बैंक के खिलाफ एकपक्षीय आदेश पारित किया गया था। बैंक की ओर से दायर प्रार्थना-पत्र में कहा गया कि उसे आदेश की जानकारी नहीं थी। बैंक ने यह भी बताया कि संबंधित शाखा से वर्ष 2016 में आठ लाख रुपये का ऋण दिया था, जिसकी मासिक किस्त 15,461 रुपये निर्धारित थी। आरोप लगाया गया कि ऋण लेने वाले ने किस्तों का भुगतान नहीं किया, जिसके कारण ऋण खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। बाद में बैंक ने सरफेसी अधिनियम, 2002 के तहत भी कार्रवाई शुरू की।
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बैंक का कहना था कि यदि एकपक्षीय आदेश को निरस्त नहीं किया गया तो उसे अपूरणीय क्षति होगी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत उसे अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
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