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Noida News: चाइल्ड पीजीआई की इमारत जर्जर, सुरक्षा भगवान भरोसे
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इमारत जर्जर, बारिश में पानी टपक रहा तो वॉर्ड में फॉल्स सिलिंग और छत का प्लास्टर गिर रहा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। चाइल्ड पीजीआई की इमारत बाहर से दिखने में जितना खूबसूरत है अंदर से उतना ही जर्जर हो चुकी है। बेसमेंट में जलभराव होता रहता है। छत से प्लास्टर गिर रहा है। फॉल्स सीलिंग भी गिर रही है। ऐसी परिस्थिति में मरीज व तीमारदार कई बार हादसे बाल-बाल बचे हैं।
चाइल्ड पीजीआई के निर्माणकार्य के दौरान पाइप फिटिंग में कई जगह कमियां रह गई थीं, जिससे अधिकांश तल पर पानी का रिसाव होता रहता है। इस कारण कई बार विभिन्न तल पर फॉल्स सीलिंग गिरने के भी मामले आ चुके हैं। बारिश में पार्किंग वाले बेसमेंट में जलभराव हो गया था और आधी गाड़ियां डूबने की स्थिति में हो गई थीं। अलग-अलग फ्लोर पर पानी टपकने लगा। ऐसे में बाल्टी रखकर पानी इकट्ठा किया जा रहा है ताकि आसपास के लोगों को फिसलने से बचाया सके। पिछले सप्ताह संस्थान के वॉर्ड में प्लास्टर गिर गया था और बेड पर भर्ती बच्चा बाल-बाल बचा था।
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कई साल से है दिक्कत
संस्थान के निदेशक डॉ. एके सिंह ने बताया कि संस्थान 2015 में शुरू हुआ था। 4-5 साल बाद ही हालत खराब होने लगी थी। इसकी सूचना पहुंची तब सरकार ने कमेटी बनाई और मामले की जांच की। इसके बाद आईआईटी रुड़की की ओर से संस्थान का स्ट्रक्चरल ऑडिट किया गया। स्ट्रक्चर ऑडिट के बाद अब मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी निर्माण निगम को सौंप गई है जबकि कंसल्टेंसी आईआईटी रुड़की की ओर से की जा रही है।
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बजट जारी होने के बाद कार्य शुरू
निदेशक ने बताया कि निर्माण निगम को सरकार से करीब 25 करोड़ का बजट जारी हुआ है। शासन की मंजूरी मिलते ही दो करोड़ रुपये एडवांस दे दिए गए हैं। दूसरे और तीसरे फ्लोर के बीच में टू ए फ्लोर पर कार्य शुरू कर दिया गया है।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। चाइल्ड पीजीआई की इमारत बाहर से दिखने में जितना खूबसूरत है अंदर से उतना ही जर्जर हो चुकी है। बेसमेंट में जलभराव होता रहता है। छत से प्लास्टर गिर रहा है। फॉल्स सीलिंग भी गिर रही है। ऐसी परिस्थिति में मरीज व तीमारदार कई बार हादसे बाल-बाल बचे हैं।
चाइल्ड पीजीआई के निर्माणकार्य के दौरान पाइप फिटिंग में कई जगह कमियां रह गई थीं, जिससे अधिकांश तल पर पानी का रिसाव होता रहता है। इस कारण कई बार विभिन्न तल पर फॉल्स सीलिंग गिरने के भी मामले आ चुके हैं। बारिश में पार्किंग वाले बेसमेंट में जलभराव हो गया था और आधी गाड़ियां डूबने की स्थिति में हो गई थीं। अलग-अलग फ्लोर पर पानी टपकने लगा। ऐसे में बाल्टी रखकर पानी इकट्ठा किया जा रहा है ताकि आसपास के लोगों को फिसलने से बचाया सके। पिछले सप्ताह संस्थान के वॉर्ड में प्लास्टर गिर गया था और बेड पर भर्ती बच्चा बाल-बाल बचा था।
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कई साल से है दिक्कत
संस्थान के निदेशक डॉ. एके सिंह ने बताया कि संस्थान 2015 में शुरू हुआ था। 4-5 साल बाद ही हालत खराब होने लगी थी। इसकी सूचना पहुंची तब सरकार ने कमेटी बनाई और मामले की जांच की। इसके बाद आईआईटी रुड़की की ओर से संस्थान का स्ट्रक्चरल ऑडिट किया गया। स्ट्रक्चर ऑडिट के बाद अब मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी निर्माण निगम को सौंप गई है जबकि कंसल्टेंसी आईआईटी रुड़की की ओर से की जा रही है।
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बजट जारी होने के बाद कार्य शुरू
निदेशक ने बताया कि निर्माण निगम को सरकार से करीब 25 करोड़ का बजट जारी हुआ है। शासन की मंजूरी मिलते ही दो करोड़ रुपये एडवांस दे दिए गए हैं। दूसरे और तीसरे फ्लोर के बीच में टू ए फ्लोर पर कार्य शुरू कर दिया गया है।