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Noida News: रूट के हिसाब से नहीं, चालक की जानकारी के आधार पर दौड़ रहीं सिटी बसें
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नोएडा। मोरना डिपो पर खड़ी सिटी बसें। संवाद
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-आगरा, फिरोजाबाद, प्रयागराज समेत कई जगहोंं का स्टाफ चला रहे सिटी बसेंं, जहां तक रूट की जानकारी वहीं तक जा रहे चालक
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले में सिटी बसें जितने जोर-शोर से चलाई गईं लेकिन उतने इंतजाम नहीं हुए। आलम यह है कि आगरा, फिरोजाबाद, प्रयागराज के कर्मचारी इन बसों को दौड़ा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि चालकों को जहां तक की जानकारी है वहां तक जा रहे हैं। उसके बाद भटक रहे हैं। बाहरी जिलों से आए चालकोंं को न तो यहां के आंतरिक सेक्टर पता हैं और न ही रूट।
लोगों का कहना है कि कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि चालकों को जहां तक का रास्ता पता था वहीं से उन्होंने बस घुमा ली। आगे का रूट पता न होने की स्थिति में भटकने के बजाय वापसी करना ही चालक सुरक्षित मान रहे हैं। ऐसे में अगले स्टॉप पर खड़ी सवारी तो बस का इंतजार ही करते रह जाएंगे।
बसों के संचालन के लिए आगरा, प्रयागराज, फिरोजाबाद, मुरादाबाद बस डिपो से बसें मंगाई गई हैं। हालांकि अब ये बसेंं नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो पर पंजीकृत हो चुकी हैं लेकिन स्टाफ वही हैं। एक साथ 110 बसों काे सड़क पर उतारने केे लिए न तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा डिपो के पास पर्याप्त स्टाफ था और न ही इतनी भर्ती की जा सकी। ऐसे में बाहरी चालक-परिचालकोंं को ही यहां की सड़कोंं पर उतार दिया है। संचालन के दौरान उन्हें भी कई दिक्कतें आ रही हैं। स्टॉप की जानकारी न होने की वजह से वे बढ़ते चलते जाते हैं। प्रमुख स्थानों की तो अब कई चालकों को पहचान हो गई है लेकिन छोटे स्टॉप पर उन्हें दिक्कतें आ रही हैं।
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सवारी दिखने पर ही रुक रहीं बसें
यूं तो परिवहन निगम ने कई दिन सर्वे करने के बाद रूट और स्टॉप बनाए हैं। कई स्टॉप ऐसे हैं जिनपर सवारी नहीं मिल रही है। बाहरी चालक को बस स्टॉप की जानकारी न होने पर वे बस दौड़ाते हुए निकाल रहे हैं। जिससे बस निर्धारित रूट पर रुक ही रही है।
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जो स्टाफ बसोंं मेंं चल रहा है उनको रूट की जानकारी हो गई है। साथ ही और स्टाफ आया है जिनको बसोंं में लगाया जा रहा है। -मनोज कुमार सिंह, आरएम गौतमबुद्ध नगर
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले में सिटी बसें जितने जोर-शोर से चलाई गईं लेकिन उतने इंतजाम नहीं हुए। आलम यह है कि आगरा, फिरोजाबाद, प्रयागराज के कर्मचारी इन बसों को दौड़ा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि चालकों को जहां तक की जानकारी है वहां तक जा रहे हैं। उसके बाद भटक रहे हैं। बाहरी जिलों से आए चालकोंं को न तो यहां के आंतरिक सेक्टर पता हैं और न ही रूट।
लोगों का कहना है कि कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि चालकों को जहां तक का रास्ता पता था वहीं से उन्होंने बस घुमा ली। आगे का रूट पता न होने की स्थिति में भटकने के बजाय वापसी करना ही चालक सुरक्षित मान रहे हैं। ऐसे में अगले स्टॉप पर खड़ी सवारी तो बस का इंतजार ही करते रह जाएंगे।
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बसों के संचालन के लिए आगरा, प्रयागराज, फिरोजाबाद, मुरादाबाद बस डिपो से बसें मंगाई गई हैं। हालांकि अब ये बसेंं नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो पर पंजीकृत हो चुकी हैं लेकिन स्टाफ वही हैं। एक साथ 110 बसों काे सड़क पर उतारने केे लिए न तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा डिपो के पास पर्याप्त स्टाफ था और न ही इतनी भर्ती की जा सकी। ऐसे में बाहरी चालक-परिचालकोंं को ही यहां की सड़कोंं पर उतार दिया है। संचालन के दौरान उन्हें भी कई दिक्कतें आ रही हैं। स्टॉप की जानकारी न होने की वजह से वे बढ़ते चलते जाते हैं। प्रमुख स्थानों की तो अब कई चालकों को पहचान हो गई है लेकिन छोटे स्टॉप पर उन्हें दिक्कतें आ रही हैं।
सवारी दिखने पर ही रुक रहीं बसें
यूं तो परिवहन निगम ने कई दिन सर्वे करने के बाद रूट और स्टॉप बनाए हैं। कई स्टॉप ऐसे हैं जिनपर सवारी नहीं मिल रही है। बाहरी चालक को बस स्टॉप की जानकारी न होने पर वे बस दौड़ाते हुए निकाल रहे हैं। जिससे बस निर्धारित रूट पर रुक ही रही है।
जो स्टाफ बसोंं मेंं चल रहा है उनको रूट की जानकारी हो गई है। साथ ही और स्टाफ आया है जिनको बसोंं में लगाया जा रहा है। -मनोज कुमार सिंह, आरएम गौतमबुद्ध नगर