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Noida News: अजब गांव है जुनपत, हैंडपंप और पाइपलाइन तो है... नहीं है तो पानी
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-गांव में वर्षों से खराब पड़े हैंडपंप, शिकायतों के बावजूद नहीं हुई सुनवाई, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। जुनपत गांव में पानी अब सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि संघर्ष का दूसरा नाम बन चुका है। जहां एक ओर सरकार की योजनाएं कागजों में बहती नजर आती हैं, वहीं हकीकत में गांव के सूखे हैंडपंप लोगों की उम्मीदों की तरह जंग खाकर खामोश खड़े हैं। हालात ऐसे हैं कि हर सुबह गांव की शुरुआत पानी की तलाश से होती है। कभी दूर-दराज के सबमर्सिबल की कतारों में, तो कभी किसी दूसरे के सहारे। सबसे हैरानी की बात यह है कि करीब एक दशक पहले गांव में पेयजल के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी, मानो हर घर तक पानी पहुंचाने का सपना साकार होने वाला हो। लेकिन समय बीतता गया और वह सपना आज भी अधूरा ही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग और प्राधिकरण की लापरवाही के चलते समस्या विकराल रूप ले चुकी है। गांव में लगे कई हैंडपंप और नलकूप लंबे समय से खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे ग्रामीणों को न केवल पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, बल्कि दैनिक उपयोग के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर लगे नलों की स्थिति भी खराब है, जिससे राहगीरों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खासकर स्कूल से लौटने वाले बच्चों को रास्ते में पानी नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें प्यासे ही घर पहुंचना पड़ता है। तेज गर्मी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। उनका कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दी हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।
पानी की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। दस वर्ष पहले बिछाई गई पाइपलाइन को भी चालू नहीं किया गया हैं। - मनोज भाटी, निवासी।
पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। साथ ही दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित हो रही हैं।
- रामप्रताप शर्मा, निवासी।
प्रशासन से मांग की है कि जुनपत गांव में जल्द से जल्द पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही खराब पड़े हैंडपंपों और सार्वजनिक नलों की तत्काल मरम्मत कराई जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
- समाजसेवी मोहित भाटी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। जुनपत गांव में पानी अब सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि संघर्ष का दूसरा नाम बन चुका है। जहां एक ओर सरकार की योजनाएं कागजों में बहती नजर आती हैं, वहीं हकीकत में गांव के सूखे हैंडपंप लोगों की उम्मीदों की तरह जंग खाकर खामोश खड़े हैं। हालात ऐसे हैं कि हर सुबह गांव की शुरुआत पानी की तलाश से होती है। कभी दूर-दराज के सबमर्सिबल की कतारों में, तो कभी किसी दूसरे के सहारे। सबसे हैरानी की बात यह है कि करीब एक दशक पहले गांव में पेयजल के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी, मानो हर घर तक पानी पहुंचाने का सपना साकार होने वाला हो। लेकिन समय बीतता गया और वह सपना आज भी अधूरा ही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग और प्राधिकरण की लापरवाही के चलते समस्या विकराल रूप ले चुकी है। गांव में लगे कई हैंडपंप और नलकूप लंबे समय से खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे ग्रामीणों को न केवल पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, बल्कि दैनिक उपयोग के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर लगे नलों की स्थिति भी खराब है, जिससे राहगीरों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खासकर स्कूल से लौटने वाले बच्चों को रास्ते में पानी नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें प्यासे ही घर पहुंचना पड़ता है। तेज गर्मी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। उनका कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दी हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।
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पानी की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। दस वर्ष पहले बिछाई गई पाइपलाइन को भी चालू नहीं किया गया हैं। - मनोज भाटी, निवासी।
पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। साथ ही दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित हो रही हैं।
- रामप्रताप शर्मा, निवासी।
प्रशासन से मांग की है कि जुनपत गांव में जल्द से जल्द पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही खराब पड़े हैंडपंपों और सार्वजनिक नलों की तत्काल मरम्मत कराई जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
- समाजसेवी मोहित भाटी।