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Noida News: ओपीडी शुरू होते ही कट जाती है बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं हो रही प्रभावित
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जेवर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र। संवाद
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- जेवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बिजली न होने से मरीज, डाॅक्टर, स्टाॅफ भी है परेशान
- एक्सरे, अल्ट्रासाउंड के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतजार
पुनीत कुमार
यमुना सिटी। जेवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में इलाज से ज्यादा इंतजार अब बिजली का हो गया है। रोजाना 8 से 10 घंटे तक होने वाली बिजली कटौती ने यहां की स्वास्थ्य सेवाओं की रफ्तार रोक दी है। हालात इतने गंभीर हैं कि सुबह 10 बजे, जब ओपीडी अपने चरम पर होती है, तभी बिजली गुल हो जाती है और मरीजों को उमस, अंधेरे और अव्यवस्था के बीच इलाज के लिए जूझना पड़ता है। दोपहर तीन बजे के बाद जब बिजली लौटती है, तब तक कई मरीज बिना समुचित उपचार के ही लौट चुके होते हैं। इस संकट को देखते हुए सीएचसी प्रशासन ने 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए प्रस्ताव भेजा है। अब नजरें मंजूरी पर टिकी हैं, जिससे उम्मीद है कि स्वास्थ्य सेवाएं फिर से पटरी पर लौट सकेंगी।
जेवर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह 8 बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी संचालित होती है। डॉक्टरों और मरीजों का कहना है कि प्रतिदिन सुबह दस बजे ही बिजली की कटौती शुरू हो जाती है। दोपहर तीन से चार बजे बिजली आती है, जबकि ओपीडी दो बजे ही समाप्त हो जाती है। ऐसे में अस्पताल में आने वाले मरीजों, डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र में आए दिन बिजली की कटौती के चलते उपचार और जांच संबंधी कार्य प्रभावित होते हैं, साथ ही मरीजों को कई जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं से भी वंचित रहना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण 16 घंटे ही बिजली आपूर्ति दी जाती है। हालांकि अक्सर 14 घंटे ही बिजली मिलती है।
बिजली कटौती से होने वाली परेशानियां : वर्तमान में बिजली कटौती के चलते अस्पताल की कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनों के साथ-साथ लैब की कई आवश्यक मशीनें बिजली न होने की वजह से संचालित नहीं हो पाती हैं। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है और डॉक्टरों को भी उपचार करने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह दस बजे से तीन बजे तक बिजली गुल रहती है। इससे मरीजों की जांच में व्यवधान पड़ता है। प्रशासन की तरफ से सीएचसी में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
-डॉ. सर्फे जेया, प्रभारी सीएचसी जेवर
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- एक्सरे, अल्ट्रासाउंड के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतजार
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यमुना सिटी। जेवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में इलाज से ज्यादा इंतजार अब बिजली का हो गया है। रोजाना 8 से 10 घंटे तक होने वाली बिजली कटौती ने यहां की स्वास्थ्य सेवाओं की रफ्तार रोक दी है। हालात इतने गंभीर हैं कि सुबह 10 बजे, जब ओपीडी अपने चरम पर होती है, तभी बिजली गुल हो जाती है और मरीजों को उमस, अंधेरे और अव्यवस्था के बीच इलाज के लिए जूझना पड़ता है। दोपहर तीन बजे के बाद जब बिजली लौटती है, तब तक कई मरीज बिना समुचित उपचार के ही लौट चुके होते हैं। इस संकट को देखते हुए सीएचसी प्रशासन ने 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए प्रस्ताव भेजा है। अब नजरें मंजूरी पर टिकी हैं, जिससे उम्मीद है कि स्वास्थ्य सेवाएं फिर से पटरी पर लौट सकेंगी।
जेवर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह 8 बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी संचालित होती है। डॉक्टरों और मरीजों का कहना है कि प्रतिदिन सुबह दस बजे ही बिजली की कटौती शुरू हो जाती है। दोपहर तीन से चार बजे बिजली आती है, जबकि ओपीडी दो बजे ही समाप्त हो जाती है। ऐसे में अस्पताल में आने वाले मरीजों, डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र में आए दिन बिजली की कटौती के चलते उपचार और जांच संबंधी कार्य प्रभावित होते हैं, साथ ही मरीजों को कई जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं से भी वंचित रहना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण 16 घंटे ही बिजली आपूर्ति दी जाती है। हालांकि अक्सर 14 घंटे ही बिजली मिलती है।
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बिजली कटौती से होने वाली परेशानियां : वर्तमान में बिजली कटौती के चलते अस्पताल की कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनों के साथ-साथ लैब की कई आवश्यक मशीनें बिजली न होने की वजह से संचालित नहीं हो पाती हैं। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है और डॉक्टरों को भी उपचार करने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह दस बजे से तीन बजे तक बिजली गुल रहती है। इससे मरीजों की जांच में व्यवधान पड़ता है। प्रशासन की तरफ से सीएचसी में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
-डॉ. सर्फे जेया, प्रभारी सीएचसी जेवर

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