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Noida News: निर्धारित समय में शिकायत दर्ज न करने पर आयोग ने वाद किया निरस्त
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जिला उपभोक्ता आयोग
निर्माण नहीं होने पर लगाए गए दंड को खत्म करने का वाद आयोग ने किया निरस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। उपभोक्ता विवाद का कारण स्पष्ट होने की अवधि के दो साल के अंदर आयोग में वाद दायर करना होगा। अगर दो साल के बाद में वाद दायर किया जाता है तो उस पर आयोग सुनवाई नहीं करेगा। इसी तरह के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने नोएडा प्राधिकरण के द्वारा भूखंड पर निर्माण नहीं होने पर लगाए गए दंड को खत्म करने के लिए दायर वाद को निरस्त कर दिया। आयोग का कहना है कि वाद को दो साल की अवधि में दायर नहीं किया था।
नोएडा के सेक्टर 62 निवासी विभा गुप्ता नोएडा प्राधिकरण की मूल आवंटी हैं। उसको 350 वर्ग मीटर का एक भूखंड 6 जून 2003 को आवंटित किया था। 22 अगस्त 2003 को उनको भूखंड पर कब्जा दिया गया। आबंचित प्लाट तिकोने आकार का था। जो अनियमित आकार होने के कारण उनके उद्देश्य को पूरा नहीं कर रहा था। प्लाट तिकोना होने के चलते शिकायतकर्ता का कार्य पूरा नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने नोएडा प्राधिकरण के भवन प्रकोष्ट में संपर्क किया। प्लाट तिकोना होने के चलते उसका 30 फीसदी अच्छादन किया जाता तो कार्य कराना संभव नहीं था। जिसके चलते निर्माण शुरू नहीं हो पाया। प्राधिकरण ने वाजिब भू आच्छादन को पास करने से मना कर दिया। इस दौरान ही प्राधिकरण ने भूखंड पर 7.10 लाख रुपये अर्थदंड लगा दिया। इसके बाद भी उन्होंने अर्थदंड की राशि को जमा कर दिया। उन्होंने प्राधिकरण से अर्थदंड को शून्य करके उनको उचित मुआवजा दिलाने को लेकर जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया।
आयोग ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों का अवलोकन किया। आयोग ने माना कि 2008 में वाद कारण मिलने के बाद उनको उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत दो साल की अवधि में परिवाद करना चाहिए था। परिवाद समय अवधि से बाधित है।
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निर्माण नहीं होने पर लगाए गए दंड को खत्म करने का वाद आयोग ने किया निरस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। उपभोक्ता विवाद का कारण स्पष्ट होने की अवधि के दो साल के अंदर आयोग में वाद दायर करना होगा। अगर दो साल के बाद में वाद दायर किया जाता है तो उस पर आयोग सुनवाई नहीं करेगा। इसी तरह के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने नोएडा प्राधिकरण के द्वारा भूखंड पर निर्माण नहीं होने पर लगाए गए दंड को खत्म करने के लिए दायर वाद को निरस्त कर दिया। आयोग का कहना है कि वाद को दो साल की अवधि में दायर नहीं किया था।
नोएडा के सेक्टर 62 निवासी विभा गुप्ता नोएडा प्राधिकरण की मूल आवंटी हैं। उसको 350 वर्ग मीटर का एक भूखंड 6 जून 2003 को आवंटित किया था। 22 अगस्त 2003 को उनको भूखंड पर कब्जा दिया गया। आबंचित प्लाट तिकोने आकार का था। जो अनियमित आकार होने के कारण उनके उद्देश्य को पूरा नहीं कर रहा था। प्लाट तिकोना होने के चलते शिकायतकर्ता का कार्य पूरा नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने नोएडा प्राधिकरण के भवन प्रकोष्ट में संपर्क किया। प्लाट तिकोना होने के चलते उसका 30 फीसदी अच्छादन किया जाता तो कार्य कराना संभव नहीं था। जिसके चलते निर्माण शुरू नहीं हो पाया। प्राधिकरण ने वाजिब भू आच्छादन को पास करने से मना कर दिया। इस दौरान ही प्राधिकरण ने भूखंड पर 7.10 लाख रुपये अर्थदंड लगा दिया। इसके बाद भी उन्होंने अर्थदंड की राशि को जमा कर दिया। उन्होंने प्राधिकरण से अर्थदंड को शून्य करके उनको उचित मुआवजा दिलाने को लेकर जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया।
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आयोग ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों का अवलोकन किया। आयोग ने माना कि 2008 में वाद कारण मिलने के बाद उनको उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत दो साल की अवधि में परिवाद करना चाहिए था। परिवाद समय अवधि से बाधित है।
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