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Noida News: टाइफाइड में डायलिसिस तक की सलाह, ग्रीन सिटी अस्पताल पर प्राथमिकी का आदेश
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(अदालत से)
सचिन बिधुड़ी ने प्रार्थना पत्र में पुत्र के इलाज में लापरवाही व फर्जी रिपोर्ट तैयार करने का लगाया था आरोप
कुछ ही घंटे में दूसरे अस्पताल में कराई गई जांच में सामान्य आईं सभी रिपोर्ट
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गलत मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर मरीज की जान जोखिम में डालने और इलाज के नाम पर दबाव बनाने के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्धनगर की अदालत ने सूरजपुर कोतवाली पुलिस को ग्रीन सिटी अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया जांच जरूरी है।
सचिन बिधुड़ी ने प्रार्थना पत्र में पुत्र सात्विक के इलाज के दौरान लापरवाही और फर्जी रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि 20 सितंबर की रात पुत्र को बुखार की शिकायत पर ग्रीन सिटी अस्पताल, ग्रेटर नोएडा में भर्ती कराया था, जहां ब्लड सैंपल लेकर जांच की गई। रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों ने बच्चे की हालत बेहद गंभीर बताते हुए तत्काल आईसीयू में भर्ती करने और डायलिसिस की जरूरत बताई थी।
बच्चे की जान पर बताया था खतरा
डाॅक्टरों का कहना था कि बच्चे के शरीर में ब्लड यूरिया, सोडियम और पोटैशियम का स्तर काफी बढ़ा हुआ है, जिससे जान का खतरा है। उन्हें तुरंत सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने और पैसे जमा कराने के लिए दबाव बनाया। पीड़ित ने स्थिति को देखते हुए रिश्तेदारों को बुलाया और बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। इसके बाद बच्चे को नोएडा के सेक्टर-27 के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां कराई गई जांच में सभी रिपोर्ट सामान्य आईं। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे को सामान्य टाइफाइड है। पूर्व की रिपोर्ट के आधार पर इलाज शुरू करने पर बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
जांच समिति ने सलाह को नहीं माना अनुचित
मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ), गौतमबुद्धनगर ने एक जांच समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रिपोर्ट के आधार पर आईसीयू में भर्ती और डायलिसिस की सलाह प्रथम दृष्टया अनुचित प्रतीत नहीं होता। हालांकि, अदालत ने इस रिपोर्ट को अधूरा और अस्पष्ट माना। अदालत ने कहा कि समिति ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन मेडिकल तथ्यों के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकाला गया। साथ ही कुछ ही घंटों के अंतराल पर अलग-अलग अस्पतालों की रिपोर्ट में इतना बड़ा अंतर कैसे आया, इस पर भी कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया।
कोर्ट ने माना कि ग्रीन सिटी अस्पताल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर बच्चे का गलत इलाज हो सकता था। जिससे उसके स्वास्थ्य को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। अदालत ने सूरजपुर कोतवाली प्रभारी को निर्देश दिया है कि मामले में मुकदमा दर्ज कर एक सप्ताह के भीतर अनुपालन आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करें।
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सचिन बिधुड़ी ने प्रार्थना पत्र में पुत्र के इलाज में लापरवाही व फर्जी रिपोर्ट तैयार करने का लगाया था आरोप
कुछ ही घंटे में दूसरे अस्पताल में कराई गई जांच में सामान्य आईं सभी रिपोर्ट
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गलत मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर मरीज की जान जोखिम में डालने और इलाज के नाम पर दबाव बनाने के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्धनगर की अदालत ने सूरजपुर कोतवाली पुलिस को ग्रीन सिटी अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया जांच जरूरी है।
सचिन बिधुड़ी ने प्रार्थना पत्र में पुत्र सात्विक के इलाज के दौरान लापरवाही और फर्जी रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि 20 सितंबर की रात पुत्र को बुखार की शिकायत पर ग्रीन सिटी अस्पताल, ग्रेटर नोएडा में भर्ती कराया था, जहां ब्लड सैंपल लेकर जांच की गई। रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों ने बच्चे की हालत बेहद गंभीर बताते हुए तत्काल आईसीयू में भर्ती करने और डायलिसिस की जरूरत बताई थी।
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बच्चे की जान पर बताया था खतरा
डाॅक्टरों का कहना था कि बच्चे के शरीर में ब्लड यूरिया, सोडियम और पोटैशियम का स्तर काफी बढ़ा हुआ है, जिससे जान का खतरा है। उन्हें तुरंत सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने और पैसे जमा कराने के लिए दबाव बनाया। पीड़ित ने स्थिति को देखते हुए रिश्तेदारों को बुलाया और बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। इसके बाद बच्चे को नोएडा के सेक्टर-27 के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां कराई गई जांच में सभी रिपोर्ट सामान्य आईं। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे को सामान्य टाइफाइड है। पूर्व की रिपोर्ट के आधार पर इलाज शुरू करने पर बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
जांच समिति ने सलाह को नहीं माना अनुचित
मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ), गौतमबुद्धनगर ने एक जांच समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रिपोर्ट के आधार पर आईसीयू में भर्ती और डायलिसिस की सलाह प्रथम दृष्टया अनुचित प्रतीत नहीं होता। हालांकि, अदालत ने इस रिपोर्ट को अधूरा और अस्पष्ट माना। अदालत ने कहा कि समिति ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन मेडिकल तथ्यों के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकाला गया। साथ ही कुछ ही घंटों के अंतराल पर अलग-अलग अस्पतालों की रिपोर्ट में इतना बड़ा अंतर कैसे आया, इस पर भी कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया।
कोर्ट ने माना कि ग्रीन सिटी अस्पताल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर बच्चे का गलत इलाज हो सकता था। जिससे उसके स्वास्थ्य को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। अदालत ने सूरजपुर कोतवाली प्रभारी को निर्देश दिया है कि मामले में मुकदमा दर्ज कर एक सप्ताह के भीतर अनुपालन आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करें।
