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Noida News: दुर्घटना बीमा के दस लाख रुपये का भुगतान करेगी बीमा कंपनी
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जिला उपभोक्ता आयोग
दुघर्टना बीमा के दस लाख रुपये का भुगतान करेगी बीमा कंपनी
संवाद न्यूज एजेंसी, ग्रेटर नोएडा। दुघर्टना बीमा में दस्तावेज न मिलने पर क्लेम भुगतान करने से कंपनी इंकार नहीं करेगी। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को दस लाख रुपये क्लेम राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। नोएडा के सलारपुर निवासी बबीता देवी के पति कृष्ण कुमार तिवारी जैग्यूआर सिक्योरिटी सर्विसिज प्राइवेट प्राइवेट लिमिटेड में काम करते था। एजेंसी ने उनके लिए रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस रेलीगेयर एन्टरप्राईजेज लिमिटेड से एक एक्सीडेंटल पॉलिसी ले रखी थी। उसके तहत एक हेल्थ कार्ड भी बना था। जिस पर उसके पति, वह और दो बच्चे शामिल थे। पॉलिसी की शर्तो के मुताबिक किसी भी दुर्घटना में पति की मृत्यु होने पर दस लाख रुपये का क्लेम बीमा कंपनी अदा करेगी। 23 अप्रैल 2018 को उनके पति को घर पर करंट लगता है। वे गंभीर रूप से घायल हो जाते है। उनको तुरंत ही प्रयाग हाॅस्पिटल में लेकर गये। उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो जाती है।
उन्होंने 11 अक्तूबर 2018 को बीमा कंपनी में क्लेम के लिए आवेदन किया। आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज दिए। बीमा कंपनी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग की गई। 24 फरवरी 2020 को बीमा कंपनी ने क्लेम देने से मना कर दिया। क्लेम नहीं मिलने पर जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर वाद दायर किया। आयोग में सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि परिवार से जो अभिलेख मांगे गए थे वह उपलब्ध नहीं कराए गए। जिस पर दावा बंद कर दिया गया। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि करंट से मृत्यु होने पर बीमा कंपनी के द्वारा पुलिस कार्रवाई से संबंधी अभिलेख प्राथमिक रिपोर्ट या मृतक के पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग करना अनुचित है। मृत्यु किसी ऐसी दुघर्टना का परिणाम नहीं है जिसके लिए किसी पुलिस कार्रवाई की जरूरत हो, बीमा कंपनी के द्वारा दावा निरस्त किया जाना उचित नहीं था। क्लेम नहीं देने बीमा कंपनी की सेवा में कमी के तहत आता है।
जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है वह 6 फीसदी ब्याज समेत क्लेम राशि दस लाख रुपये का 30 दिन में भुगतान करे। पांच हजार रुपये वाद व्यय के भी देने होंगे।
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दुघर्टना बीमा के दस लाख रुपये का भुगतान करेगी बीमा कंपनी
संवाद न्यूज एजेंसी, ग्रेटर नोएडा। दुघर्टना बीमा में दस्तावेज न मिलने पर क्लेम भुगतान करने से कंपनी इंकार नहीं करेगी। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को दस लाख रुपये क्लेम राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। नोएडा के सलारपुर निवासी बबीता देवी के पति कृष्ण कुमार तिवारी जैग्यूआर सिक्योरिटी सर्विसिज प्राइवेट प्राइवेट लिमिटेड में काम करते था। एजेंसी ने उनके लिए रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस रेलीगेयर एन्टरप्राईजेज लिमिटेड से एक एक्सीडेंटल पॉलिसी ले रखी थी। उसके तहत एक हेल्थ कार्ड भी बना था। जिस पर उसके पति, वह और दो बच्चे शामिल थे। पॉलिसी की शर्तो के मुताबिक किसी भी दुर्घटना में पति की मृत्यु होने पर दस लाख रुपये का क्लेम बीमा कंपनी अदा करेगी। 23 अप्रैल 2018 को उनके पति को घर पर करंट लगता है। वे गंभीर रूप से घायल हो जाते है। उनको तुरंत ही प्रयाग हाॅस्पिटल में लेकर गये। उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो जाती है।
उन्होंने 11 अक्तूबर 2018 को बीमा कंपनी में क्लेम के लिए आवेदन किया। आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज दिए। बीमा कंपनी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग की गई। 24 फरवरी 2020 को बीमा कंपनी ने क्लेम देने से मना कर दिया। क्लेम नहीं मिलने पर जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर वाद दायर किया। आयोग में सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि परिवार से जो अभिलेख मांगे गए थे वह उपलब्ध नहीं कराए गए। जिस पर दावा बंद कर दिया गया। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि करंट से मृत्यु होने पर बीमा कंपनी के द्वारा पुलिस कार्रवाई से संबंधी अभिलेख प्राथमिक रिपोर्ट या मृतक के पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग करना अनुचित है। मृत्यु किसी ऐसी दुघर्टना का परिणाम नहीं है जिसके लिए किसी पुलिस कार्रवाई की जरूरत हो, बीमा कंपनी के द्वारा दावा निरस्त किया जाना उचित नहीं था। क्लेम नहीं देने बीमा कंपनी की सेवा में कमी के तहत आता है।
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जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है वह 6 फीसदी ब्याज समेत क्लेम राशि दस लाख रुपये का 30 दिन में भुगतान करे। पांच हजार रुपये वाद व्यय के भी देने होंगे।