दिल्ली: यमुना की बाढ़ से बचाव की तैयारी, मजनू का टीला से लोहा पुल तक बनेगी 4.7 किलोमीटर बाढ़ रोधी दीवार
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से इस दीवार का निर्माण कराया जाएगा, जिसके लिए निविदा भी जारी कर दी गई है। लगभग 4.72 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में करीब 850 मीटर का हिस्सा अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र माना गया है, जहां कंक्रीट की मजबूत दीवार बनाई जाएगी।
विस्तार
मानसून के दौरान यमुना का जलस्तर बढ़ने पर दिल्ली के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। वर्ष 2023 में आई बाढ़ ने राजधानी के आइटीओ और सिविल लाइंस जैसे अहम क्षेत्रों को भी अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे कई दिनों तक जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। पिछले वर्ष भी मजनू का टीला और बेला रोड क्षेत्र के लोगों को बाढ़ के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
क्यों बनेगी दीवार?
इन हालातों को देखते हुए सरकार ने मजनू का टीला से लेकर कश्मीरी गेट के पास स्थित लोहा पुल तक रिंग रोड के किनारे बाढ़ रोधी दीवार बनाने का फैसला किया है। इस परियोजना का उद्देश्य यमुना के बढ़ते जलस्तर के दौरान रिंग रोड और आस-पास के रिहायशी इलाकों को पानी भरने से बचाना है।
ताकि भविष्य में न हो परेशानी
दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार राजधानी में बाढ़ नियंत्रण को लेकर लगातार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष यमुना का जलस्तर 207.88 मीटर तक पहुंचने के बावजूद स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रण में रही। भविष्य में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में लोगों को परेशानी न हो, इसे ध्यान में रखते हुए इस दीवार के निर्माण का निर्णय लिया गया है।
50 करोड़ लागत से 4.72 किलोमीटर लंबी बनेगी दीवार
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से इस दीवार का निर्माण कराया जाएगा, जिसके लिए निविदा भी जारी कर दी गई है। लगभग 4.72 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में करीब 850 मीटर का हिस्सा अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र माना गया है, जहां कंक्रीट की मजबूत दीवार बनाई जाएगी। बाकी हिस्से में ईंट या पत्थर से दीवार का निर्माण होगा। इसकी औसत ऊंचाई लगभग छह फीट रखी जाएगी।
इस वजह से तेजी से बढ़ जाता है जलस्तर
अधिकारियों का कहना है कि दीवार बनने के बाद यमुना का पानी रिंग रोड के साथ-साथ आसपास के बाजारों और रिहायशी इलाकों में नहीं पहुंच पाएगा, जिससे बाढ़ के दौरान होने वाली परेशानियों में काफी कमी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना की तलहटी में लगातार जमा हो रही गाद और डूब क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण के कारण नदी की जलधारण क्षमता घटती जा रही है। यही वजह है कि हरियाणा के हथनी कुंड बैराज से पहले की तुलना में कम पानी छोड़े जाने के बावजूद दिल्ली में जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है।
आंकड़ों के अनुसार सितंबर 1978 में हथनी कुंड बैराज से करीब आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, तब दिल्ली में लोहा पुल के पास यमुना का जलस्तर 207.49 मीटर तक पहुंचा था। वहीं पिछले वर्ष मानसून के दौरान मात्र 3.29 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर भी जलस्तर 207.88 मीटर तक पहुंच गया। इससे साफ है कि 1978 के मुकाबले यमुना की जलधारण क्षमता अब लगभग 50 प्रतिशत रह गई है।
इसी स्थिति को सुधारने के लिए दिल्ली में यमुना की सफाई के लिए आधुनिक मशीनें भी खरीदी जा रही हैं, ताकि नदी की तलहटी में जमा गाद को हटाकर उसकी क्षमता को बढ़ाया जा सके।