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Noida News: जेवर पीएचसी में टीबी की सीबीएनएएटी जांच मशीन की सुविधा उपलब्ध

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 09 Mar 2026 08:02 PM IST
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CBNAAT testing machine for TB available at Jewar PHC
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जेवर पीएचसी में टीबी की सीबीएनएएटी जांच मशीन की सुविधा उपलब्ध
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para_count-0 गौतमबुद्ध नगर जिले में केवल 4-5 मशीनें उपलब्ध para_count-0
para_count-0 जेवर में मरीजों को मिल रहीं आधुनिक सुविधाएं para_count-0
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para_count-0 संवाद न्यूज एजेंसी para_count-0
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para_count-0 यमुना सिटी। जेवर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में टीबी की जांच और इलाज के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां टीबी की जांच माइक्रोस्कोपिक जांच और सीबीएनएएटी मशीन के माध्यम से की जाती है। para_count-0
para_count-1 स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार सीबीएनएएटी मशीन से होने वाली जांच अधिक तेज और स्टीक मानी जाती है। यह जांच मरीज के बलगम के नमूने से की जाती है। सीबीएनएएटी मशीन के माध्यम से होने वाली जांच पहले इस्तेमाल होने वाली ट्रूनेट तकनीक की तुलना में जल्दी प्रमाण देती है। यह मशीन गौतमबुद्ध नगर जिले में सिर्फ 4 से 5 सरकारी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों के मुताबिक, टीबी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। पहली डीएसटीबी (ड्रग सेंसिटिव टीबी) होती है, जिसका इलाज सीधे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से ही शुरू कर दिया जाता है। दूसरी डीआरटीबी (ड्रग रेसिस्टेंस टीबी) होती है, जिसमें दवाओं का असर सामान्य से अलग होता है और इलाज थोड़ा जटिल होता है। ऐसे मरीजों को पहले गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस अस्पताल भेजा जाता है, जहां उन्हें एक दिन के लिए भर्ती कर डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाता है। इस दौरान यह देखा जाता है कि टीबी की दवाओं का मरीज के दिल या शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ रहा, क्योंकि डीआरटीबी की दवाएं अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी और कड़ी होती हैं। para_count-1
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para_count-2 टीबी के प्रमुख लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहना, बुखार आना, वजन कम होना, रात में पसीना आना और पेट में दर्द शामिल हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय पर जांच और इलाज शुरू हो जाए तो दो साल की दवा से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। इसके अलावा फेफड़ों के बाहर पानी जमा होने वाली टीबी की जांच की सुविधा भी जेवर पीएचसी में उपलब्ध है। para_count-2
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para_count-3 सीबीएनएएटी मशीन पूरे जिले में सिर्फ 4-5 सरकारी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। मरीजों के बलगम की जांच करके टीबी का पता लगाया जाता है। -डॉ सरफे, जेवर सीएचसी अधीक्षक
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