आज के दौर में बच्चों के लिए केवल पढ़ाई में अच्छा होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आत्मरक्षा का ज्ञान भी उतना ही जरूरी है। बदलते सामाजिक परिवेश में छात्र-छात्राओं को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक और सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है। आत्मरक्षा का प्रशिक्षण बच्चों को कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखने, सही निर्णय लेने और खुद की सुरक्षा करने का आत्मविश्वास देता है। हमारे विद्यालय में सप्ताह में एक दिन छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान उन्हें विभिन्न तकनीकों के साथ आपातकालीन स्थिति में सतर्क रहने, खतरे की पहचान करने और सुरक्षित तरीके से उससे निकलने के तरीके सिखाए जाते हैं। आत्मरक्षा का यह प्रशिक्षण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेरा मानना है कि प्रत्येक विद्यालय में इस तरह का प्रशिक्षण नियमित रूप से होना चाहिए, ताकि बच्चे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन सकें।
- आशा शर्मा, इंचार्ज प्रधानाध्यापक, कंपोजिट विद्यालय नीमका, जेवर