{"_id":"69b970587b3b799c8b0331b7","slug":"hdfg-grnoida-news-c-23-1-lko1064-90185-2026-03-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: आईबीपीएस परीक्षा में फर्जीवाड़े के आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: आईबीपीएस परीक्षा में फर्जीवाड़े के आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज
विज्ञापन
विज्ञापन
(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-58 थाना क्षेत्र में बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) परीक्षा में फर्जीवाड़े के मामले में नालंदा बिहार निवासी आरोपी राजेश कुमार की अग्रिम जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रकृति का है। वर्तमान परिस्थितियों में अग्रिम जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। मामले के अनुसार आरोपी राजेश कुमार ने आईबीपीएस की मुख्य परीक्षा में अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को बैठाकर परीक्षा दिलवाई थी। यह परीक्षा 20 नवंबर 2022 को सेक्टर-62 स्थित आई-ऑन डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र में आयोजित हुई थी। इस कृत्य को अंजाम देने के लिए फर्जी कॉल लेटर और दस्तावेजों का सहारा लिया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी कर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने एफआईआर करीब तीन साल दो महीने की देरी से दर्ज कराई गई है। पुलिस आरोपी को अनावश्यक रूप से परेशान करना चाहती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि मामला गंभीर प्रकृति का है। इस कारण आरोपी को अग्रिम राहत देने से मना कर दिया।
Trending Videos
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-58 थाना क्षेत्र में बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) परीक्षा में फर्जीवाड़े के मामले में नालंदा बिहार निवासी आरोपी राजेश कुमार की अग्रिम जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रकृति का है। वर्तमान परिस्थितियों में अग्रिम जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। मामले के अनुसार आरोपी राजेश कुमार ने आईबीपीएस की मुख्य परीक्षा में अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को बैठाकर परीक्षा दिलवाई थी। यह परीक्षा 20 नवंबर 2022 को सेक्टर-62 स्थित आई-ऑन डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र में आयोजित हुई थी। इस कृत्य को अंजाम देने के लिए फर्जी कॉल लेटर और दस्तावेजों का सहारा लिया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी कर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने एफआईआर करीब तीन साल दो महीने की देरी से दर्ज कराई गई है। पुलिस आरोपी को अनावश्यक रूप से परेशान करना चाहती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि मामला गंभीर प्रकृति का है। इस कारण आरोपी को अग्रिम राहत देने से मना कर दिया।