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Noida News: हॉर्मोनल विकार से जूझ रहे मासूम, थायराइड, कम लंबाई और डायबिटीज विकास में बन रही बाधा
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संस्थान के एंडोक्राइन क्लीनिक में पिछले 10 साल में 2025 में आए सबसे अधिक मरीज
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर 30 स्थित चाइल्ड पीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक में पिछले 10 साल में सबसे अधिक मरीज 2025 में आए हैं। इनमें सबसे अधिक मरीज थायराइड, फिर कम लंबाई और डायबिटीज के रहे हैं।
पीडियाट्रिक विभाग के प्राचार्य एवं पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक के संचालक डॉ. भानु किरण भाखड़ी ने बताया कि आजकल बच्चों में हार्मोन विकारों का दिखना आम बात हो गई है लेकिन या तो इन्हें अभिभावक ने नजरअंदाज कर दिया है या फिर बाल रोग विशेषज्ञों में इनकी जानकारी की कमी के कारण पकड़ में नहीं आ पाते हैं। सही समय पर सही तरीके से इलाज होने से लंबे समय तक पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक में वर्ष 2025 में 800 से ज्यादा मरीज पहुंचे। इनमें सबसे अधिक बच्चों में थायराइड संबंधित विकार पाए गए। इसके अलावा बच्चों की लंबाई, डायबिटीज, मोटापा और यौवनावस्था संबंधित हार्मोन विकार आम देखे गए। आजकल बच्चों में पहले से कम उम्र में यौवनावस्था के लक्षण देखे जा रहे हैं। ऐसे में काफी अभिभावक परामर्श के लिए आते हैं। इसके साथ ही बिगड़ते खान-पान और व्यायाम की कमी के कारण भी काफी समस्याएं हो रही हैं।
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लखनऊ के बाद नोएडा में इलाज
डॉ. भानु ने बताया कि बच्चों में हार्मोन विकारों संबंधित विशिष्ट परामर्श लखनऊ एसजीपीजीआई के बाद चाइल्ड पीजीआई नोएडा में ही उपलब्ध है। अप्रैल 2016 में शुरू हुए इस क्लीनिक का लाभ सिर्फ नोएडा ही नहीं बल्कि निकटवर्ती राज्यों के बच्चों को भी मिल रहा है। अधिकतर बच्चे या तो बाल विशेषज्ञों से रेफर होकर आते हैं या निजी अस्पताल से परामर्श के बाद पुष्टि के लिए भी दिखाते हैं। पिछले दस सालों में क्लीनिक में कोविड महामारी के दौरान ही कुछ कमी देखी गई थी।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर 30 स्थित चाइल्ड पीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक में पिछले 10 साल में सबसे अधिक मरीज 2025 में आए हैं। इनमें सबसे अधिक मरीज थायराइड, फिर कम लंबाई और डायबिटीज के रहे हैं।
पीडियाट्रिक विभाग के प्राचार्य एवं पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक के संचालक डॉ. भानु किरण भाखड़ी ने बताया कि आजकल बच्चों में हार्मोन विकारों का दिखना आम बात हो गई है लेकिन या तो इन्हें अभिभावक ने नजरअंदाज कर दिया है या फिर बाल रोग विशेषज्ञों में इनकी जानकारी की कमी के कारण पकड़ में नहीं आ पाते हैं। सही समय पर सही तरीके से इलाज होने से लंबे समय तक पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
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पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक में वर्ष 2025 में 800 से ज्यादा मरीज पहुंचे। इनमें सबसे अधिक बच्चों में थायराइड संबंधित विकार पाए गए। इसके अलावा बच्चों की लंबाई, डायबिटीज, मोटापा और यौवनावस्था संबंधित हार्मोन विकार आम देखे गए। आजकल बच्चों में पहले से कम उम्र में यौवनावस्था के लक्षण देखे जा रहे हैं। ऐसे में काफी अभिभावक परामर्श के लिए आते हैं। इसके साथ ही बिगड़ते खान-पान और व्यायाम की कमी के कारण भी काफी समस्याएं हो रही हैं।
लखनऊ के बाद नोएडा में इलाज
डॉ. भानु ने बताया कि बच्चों में हार्मोन विकारों संबंधित विशिष्ट परामर्श लखनऊ एसजीपीजीआई के बाद चाइल्ड पीजीआई नोएडा में ही उपलब्ध है। अप्रैल 2016 में शुरू हुए इस क्लीनिक का लाभ सिर्फ नोएडा ही नहीं बल्कि निकटवर्ती राज्यों के बच्चों को भी मिल रहा है। अधिकतर बच्चे या तो बाल विशेषज्ञों से रेफर होकर आते हैं या निजी अस्पताल से परामर्श के बाद पुष्टि के लिए भी दिखाते हैं। पिछले दस सालों में क्लीनिक में कोविड महामारी के दौरान ही कुछ कमी देखी गई थी।