{"_id":"69c683ffc3022ba5260c17e8","slug":"missed-periods-due-to-pcod-can-be-treated-homeopathically-grnoida-news-c-1-noi1095-4096474-2026-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: पीसीओडी की वजह से मिस हुए पीरियड होम्योपैथिक से हो रहे ठीक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: पीसीओडी की वजह से मिस हुए पीरियड होम्योपैथिक से हो रहे ठीक
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला अस्पताल की होम्योपैथी ओपीडी में रोजाना पहुंच रहीं 40 से 50 मरीज
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। खराब जीवनशैली और खान-पान से महिलाओं और किशोरियों में पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम डिजीज (पीसीओडी) की समस्या अधिक हो रही है। इससे पीरियड्स में अनियमितता और गर्भधारण में बाधाएं आ रही हैं। सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल की होम्योपैथी ओपीडी में रोजाना 40 से 50 ऐसे मरीज सामने आ रही हैं। मरीजों का कहना है कि होम्योपैथिक दवा से पीसीओडी की वजह से मिस हुए पीरियड रेगुलर हो रहे हैं।
जिला अस्पताल के होम्योपैथिक ओपीडी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. तनु त्यागी ने बताया कि पीसीओडी से परेशान 15 से 55 साल तक की किशोरियां व महिलाएं इलाज के लिए पहुंच रही हैं। रोजाना अस्पताल की ओपीडी 120 से 150 के बीच होती है जिनमें से 30 से 50 पीसीओडी की मरीज होती हैं।
डॉ. तनु ने बताया कि इस बीमारी में हार्मोंन असंतुलन हो जाता है। माहवारी में अनियमितता और गर्भधारण में समस्या होती है। हालांकि होम्योपैथी में इसका बेहतर इलाज है। समस्या ठीक होने में थोड़ा समय जरूर लगता है लेकिन ठीक हो जाती है।
-- -- -- -- -
मुख्य वजह
डॉ. तनु ने बताया कुछ मरीजों में यह समस्या जेनेटिक होती है। अगर मां में यह बीमारी हो चुकी है तो बेटी में भी इस बीमारी होने की आशंका रहती है। हालांकि हर मरीज में ऐसा नहीं होता है। महिलाओं की बदलती लाइफ स्टाइल, खान-पान, मोटापा इसकी बड़ी वजह है।
-- -- -- -- -
-पीसीओडी लाइफस्टाइल डिजीज है
सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई की वरिष्ठ परामर्शदाता गायनीकोलॉजिस्ट डॉ. आलोकिता शर्मा ने बताया कि पीसीओडी कोई बीमारी नहीं, लाइफस्टाइल डिजीज है। यदि लाइफस्टाइल सही से रखी जाए तो पीसीओडी भी ठीक हो जाती है। इसमें समय पर खानपान, समय पर सोना, मोबाइल फोन कम इस्तेमाल करना, फिजिकली एक्टिव रहना आदि पर ध्यान देना चाहिए।
-- -- -- -- -- -- -
- लक्षण
-मासिक धर्म की अनियमितता
-हाथ, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर बालों की अधिकता
-मुहांसे और मोटापा
-गर्भधारण में समस्या
-पीरियड में अधिक या कम ब्लीडिंग होना
-- -- -- -- --
बचाव
-बाहरी खानपान या जंक फूड का सेवन कम करें।
8 घंटे की नींद लें।
-फिजिकली एक्टिव रहें।
-मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम करें।
-घर का शुद्ध खाना, हरी सब्जियां और फलों की मात्रा बढ़ाएं।
Trending Videos
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। खराब जीवनशैली और खान-पान से महिलाओं और किशोरियों में पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम डिजीज (पीसीओडी) की समस्या अधिक हो रही है। इससे पीरियड्स में अनियमितता और गर्भधारण में बाधाएं आ रही हैं। सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल की होम्योपैथी ओपीडी में रोजाना 40 से 50 ऐसे मरीज सामने आ रही हैं। मरीजों का कहना है कि होम्योपैथिक दवा से पीसीओडी की वजह से मिस हुए पीरियड रेगुलर हो रहे हैं।
जिला अस्पताल के होम्योपैथिक ओपीडी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. तनु त्यागी ने बताया कि पीसीओडी से परेशान 15 से 55 साल तक की किशोरियां व महिलाएं इलाज के लिए पहुंच रही हैं। रोजाना अस्पताल की ओपीडी 120 से 150 के बीच होती है जिनमें से 30 से 50 पीसीओडी की मरीज होती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. तनु ने बताया कि इस बीमारी में हार्मोंन असंतुलन हो जाता है। माहवारी में अनियमितता और गर्भधारण में समस्या होती है। हालांकि होम्योपैथी में इसका बेहतर इलाज है। समस्या ठीक होने में थोड़ा समय जरूर लगता है लेकिन ठीक हो जाती है।
मुख्य वजह
डॉ. तनु ने बताया कुछ मरीजों में यह समस्या जेनेटिक होती है। अगर मां में यह बीमारी हो चुकी है तो बेटी में भी इस बीमारी होने की आशंका रहती है। हालांकि हर मरीज में ऐसा नहीं होता है। महिलाओं की बदलती लाइफ स्टाइल, खान-पान, मोटापा इसकी बड़ी वजह है।
-पीसीओडी लाइफस्टाइल डिजीज है
सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई की वरिष्ठ परामर्शदाता गायनीकोलॉजिस्ट डॉ. आलोकिता शर्मा ने बताया कि पीसीओडी कोई बीमारी नहीं, लाइफस्टाइल डिजीज है। यदि लाइफस्टाइल सही से रखी जाए तो पीसीओडी भी ठीक हो जाती है। इसमें समय पर खानपान, समय पर सोना, मोबाइल फोन कम इस्तेमाल करना, फिजिकली एक्टिव रहना आदि पर ध्यान देना चाहिए।
- लक्षण
-मासिक धर्म की अनियमितता
-हाथ, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर बालों की अधिकता
-मुहांसे और मोटापा
-गर्भधारण में समस्या
-पीरियड में अधिक या कम ब्लीडिंग होना
बचाव
-बाहरी खानपान या जंक फूड का सेवन कम करें।
8 घंटे की नींद लें।
-फिजिकली एक्टिव रहें।
-मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम करें।
-घर का शुद्ध खाना, हरी सब्जियां और फलों की मात्रा बढ़ाएं।