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Noida News: नोएडा एयरपोर्ट के आसपास हरियाली बढ़ाएगा मियावाकी जंगल
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वन विभाग मियावाकी जंगल लगाने के लिए यमुना प्राधिकरण से करेगा वार्ता
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए वन विभाग मियावाकी जंगल बनाने पर विचार कर रहा है। इस संबंध में वह यमुना प्राधिकरण से वार्ता करेगा। ऐसे में नोएडा एयरपोर्ट के आसपास का वातावरण अधिक हर-भरा हो सकेगा।
डीएफओ रजनीकांत मित्तल ने बताया कि वन विभाग की ओर से एयरपोर्ट बनाने के लिए जितने पेड़ काटे गए थे उनके 10 गुना अन्य पेड़ लगा दिए गए हैं इसके अलावा अन्य जगह पर भी पौधरोपण किया जा रहा है लेकिन इन पौधों को पनपने में थोड़ा समय लगेगा जबकि मियावाकी जंगल तीन साल में बनकर तैयार हो जाते हैं। ऐसे में मियावाकी जंगल बनाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि यह कार्य अकेले वन विभाग का नहीं है। ऐसे में यमुना प्राधिकरण की सहमति आवश्यक होगी।
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10 गुना तेज से बढ़ते हैं मियावाकी जंगल
मियावाकी जंगल में पौधों को एक-दूसरे के बहुत पास लगाया जाता है। पारंपरिक जंगलों की तुलना में यह जंगल 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और 30 गुना ज्यादा घने होते हैं। इसमें केवल उसी क्षेत्र की मूल या देशी प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं। इससे यह पौधे स्थानीय वातावरण में जल्दी ढल जाते हैं। इन जंगलों को बनाने के लिए जगह कम लगती है और यह तकनीक शहरी इलाकों के लिए वरदान साबित होते हैं।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए वन विभाग मियावाकी जंगल बनाने पर विचार कर रहा है। इस संबंध में वह यमुना प्राधिकरण से वार्ता करेगा। ऐसे में नोएडा एयरपोर्ट के आसपास का वातावरण अधिक हर-भरा हो सकेगा।
डीएफओ रजनीकांत मित्तल ने बताया कि वन विभाग की ओर से एयरपोर्ट बनाने के लिए जितने पेड़ काटे गए थे उनके 10 गुना अन्य पेड़ लगा दिए गए हैं इसके अलावा अन्य जगह पर भी पौधरोपण किया जा रहा है लेकिन इन पौधों को पनपने में थोड़ा समय लगेगा जबकि मियावाकी जंगल तीन साल में बनकर तैयार हो जाते हैं। ऐसे में मियावाकी जंगल बनाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि यह कार्य अकेले वन विभाग का नहीं है। ऐसे में यमुना प्राधिकरण की सहमति आवश्यक होगी।
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10 गुना तेज से बढ़ते हैं मियावाकी जंगल
मियावाकी जंगल में पौधों को एक-दूसरे के बहुत पास लगाया जाता है। पारंपरिक जंगलों की तुलना में यह जंगल 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और 30 गुना ज्यादा घने होते हैं। इसमें केवल उसी क्षेत्र की मूल या देशी प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं। इससे यह पौधे स्थानीय वातावरण में जल्दी ढल जाते हैं। इन जंगलों को बनाने के लिए जगह कम लगती है और यह तकनीक शहरी इलाकों के लिए वरदान साबित होते हैं।