Noida: UP की 25 फीसदी राजस्व की झोली भरता है नोएडा, रजिस्ट्री विभाग ने बीते एक दशक में दिया सबसे ज्यादा राजस्व
जीएसटी अधिकारियों के अनुसार, जिले में साल 2025-26 में जीएसटी संग्रह 12,941.27 करोड़ रुपये हुआ है, जो कि पिछले साल के मुकाबले 13.29 फीसदी अधिक रहा।
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जिले को उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। कारण यहां से अकेले प्रदेश का 25 फीसदी राजस्व हर साल मिलता है, जो कि अन्य शहरों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। इसका सीधा सकारात्मक असर यूपी के विकास और राजस्व पर पड़ता है, जिससे सरकार की वन ट्रिलियन इकॉनॉमी बनने में सहायता मिलती है।
उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने बताया कि नोएडा में बेहतर राजस्व के आने के कई साधन हैं। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा की गारंटी और बेहतर कनेक्टिविटी के चलते प्रदेश में करीब 1.64 लाख से ज्यादा छोटे-बड़े उद्योग संचालित होते हैं। इनमें से करीब 10 हजार से ज्यादा एमएसएमई उद्योग अकेले नोएडा में हैं। इन उद्योगों में से 60 फीसदी कंपनियां देश दुनिया में अपने उत्पाद का निर्यात करती हैं। बाकी की 40 फीसदी कंपनियां सरकार को जीएसटी देती हैं।
जीएसटी अधिकारियों के अनुसार, जिले में साल 2025-26 में जीएसटी संग्रह 12,941.27 करोड़ रुपये हुआ है, जो कि पिछले साल के मुकाबले 13.29 फीसदी अधिक रहा। हालांकि यह पूरे जिले का है, लेकिन अकेले नोएडा की बात करें तो 60 फीसदी जीएसटी सिर्फ नोएडा इलाके से ही संग्रहित होता है। इसके अलावा नोएडा में लोग घर से लेकर उद्योग संचालित करने के लिए कॉमर्शियल प्लॉट भी खूब खरीदते और किराये पर लेते हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
सेक्टर 33ए स्थित उप निबंधन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, नोएडा में इस साल 1.64 लाख लोगों ने रजिस्ट्री कराई। इससे रजिस्ट्री विभाग ने बीते एक दशक में सबसे ज्यादा 4570.78 करोड़ रुपये जुटाकर प्रदेश सरकार की झोली में डाल दिए। इतना ही नहीं फेज-2 स्थित नोएडा की सब्जी मंडी ने भी इस बार जिले के अन्य प्रदेशों को राजस्व जुटाने में सभी को पीछे छोड़ दिया। साल 2025-26 में सब्जी मंडी ने 3,789.56 लाख रुपये का राजस्व जुटाया, जबकि इस मामले में गाजियाबाद समेत अन्य जिलों की मंडी पीछे रहीं।
निर्यात से जीएसटी नहीं, लेकिन मिलते हैं डॉलर
जीएसटी अधिकारियों ने बताया कि नोएडा में 60 फीसदी निर्यातक कंपनियां हैं, जो इलेक्ट्रिक मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर वस्त्रों समेत अन्य उत्पादों का विनिर्माण करती हैं। यह उत्पाद सिर्फ घरेलू मांग ही नहीं बल्कि वैश्विक मांग को भी पूरा करती हैं। बता दें, संयुक्त उद्योग कमिश्नर ने बताया कि यूपी ने साल 2025-26 में एक लाख 86 हजार करोड़ रुपये के उत्पाद निर्यात किए। इनमें से अकेले 47 फीसदी उत्पाद नोएडा से निर्यात किए गए, यानी कि करीब 95 हजार से अधिक का निर्यात किया गया। सरकार निर्यातकों पर जीएसटी नहीं लगाती है, लेकिन सरकार को उसके बदले में डॉलर करेंसी प्राप्त होती है, जो एक राजस्व समान है।
नोएडा सिर्फ यूपी ही नहीं, अन्य राज्यों को भी देता है राजस्व : जीएसटी के अधिकारियों ने बताया कि नोएडा में बनने वाले उत्पाद सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि अन्य प्रदेशों में भी जाते हैं। तकनीकी तौर पर इसे समझें तो मान लीजिए कोई उत्पादन नोएडा में बना, यदि उसका 20 फीसदी उत्पादन यूपी में खपत हुआ तो उसे स्टेट जीएसटी उससे राजस्व प्राप्त करेगा, लेकिन यदि उसका 80 फीसदी माल किसी अन्य प्रदेश में जाता है तो उसे जीएसटी वसूली के लिए ट्रांसफर कर दिया जाता है, यानी उससे मिलने वाला जीएसटी संबंधित प्रदेश की झोली में जाता है।
अब समझें नोएडा को इस बार कितना मिला राजस्व
विभाग राजस्व रुपये में, 2025-26)
जीएसटी संग्रह 12,941.27 करोड़
नोएडा रजिस्ट्री कार्यालय: 4570.78 करोड़
फेज-2 नवीन फल सब्जी मंडी 3789.56 लाख
परिवहन निगम 16.24 करोड़
बीते एक दशक में सबसे ज्यादा राजस्व प्राप्त हुआ है, नोएडा में लोग तेजी से निवेश कर रहे हैं, खासकर उद्योग और आवासीय क्षेत्र में पंजीकरण बढ़ रहा है। -अरूण कुमार शर्मा, एआईजी प्रथम, नोएडा प्रथम व द्वितीय कार्यालय
यूपी में करीब एक लाख 86 हजार करोड़ का निर्यात हुआ, इसमे से अकेले 47 फीसदी नोएडा से निर्यात होता है, जो सरकार को बेहतर राजस्व देता है। -अनिल कुमार, संयुक्त आयुक्त उद्योग, उत्तर प्रदेश सरकार
प्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले नोएडा की सब्जी मंडी ने इस बार सबसे ज्यादा राजस्व दिया है, यह नोएडा में बढ़ी बेहतर खरीद फरोख्त और आवक से संभव हुआ है। -पंकज शर्मा, सचिव, नवीन फल एवं सब्जी मंडी, फेज-2
इस बार करीब 15 फीसदी ज्यादा राजस्व मिला है, पिछले साल के मुकाबले हुआ यह इजाफा हर साल बढ़ता जा रहा है। -मनोज कुमार सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक, नोएडा
नोएडा में लग्जरी वाहनों समेत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद फरोख्त बढ़ी है, लग्जरी वाहन और कॉमर्शियल वाहन सबसे ज्यादा राजस्व बढ़ाने में मददगार हैं। -नंद कुमार, एआरटीओ गौतमबुद्ध नगर

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