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Noida News: बढ़ा वेतन देने को तैयार पर हमारी कौन सुनेगा
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ग्रेटर नोएडा के साइट पांच में अमर उजाला द्वारा आयोजित उद्यमी संवाद में समस्याओ को लेकर चर्चा कर
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- औद्योगिक सेक्टर साइट-5 के उद्यमियों ने कहा, श्रमिकों की तरह हमारी समस्याओं पर दें ध्यान
- बोले-कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने से पहले अनुमति जरूरी पर अनुमति मिलने तक भाग जाते है खरीदार
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक सेक्टर साइट-5 के उद्यमी सरकार के बढ़ा वेतन देने के आदेश का पालन करने को तैयार हैं। उद्यमियों का कहना है कि श्रमिकों की तरह सरकार को उनकी भी सुननी चाहिए। सरकार की नीतियों से नाखुश उद्यमी कहते हैं कि कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने की अनुमति देने में अभी भी दो से तीन माह का समय लगता है। तब तक खरीदार ऑर्डर रद्द कर देते हैं।
औद्योगिक सेक्टर साइट-5 में आयोजित अमर उजाला संवाद में उद्यमियों ने बताया कि सरकार ने श्रमिकों का वेतन बढ़ा दिया है इसके साथ ही उनका उनका कौशल भी बढ़ाना चाहिए। आरोप है कि श्रमिक काम नहीं करते है। देर तक मोबाइल देखते रहते हैं। उद्यमी कहते हैंं कि वह मई में श्रमिकों को बढ़ा हुआ वेतन देने को तैयार है लेकिन सरकार को उनकी परेशानी भी दूर करनी चाहिए। राहत पैकेज देने के साथ टैक्स में छूट दी जाए। वेतन बढ़ने से उनका मुनाफा 5 प्रतिशत से 2 प्रतिशत रह जाएगा। उद्यमियों ने कहा कि सरकार ने नए-नए नियम बना रखे हैं, जो उद्यमियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। एक कॉस्मेटिक उत्पाद के उत्पादन करने की पहले अनुमति लेनी होती है। जो 2 से 3 दिन में मिलनी चाहिए पर यहां 2 से 3 माह लगते है। उसके लिए भी लखनऊ जाकर पैरवी करनी पड़ती है। जीएसटी स्लैब भी ठीक नहीं है। करीब 18 प्रतिशत जीएसटी के साथ माल खरीद रहे है और 5 प्रतिशत जीएसटी के साथ उत्पाद बेचा जा रहा है। इस तरह के मामलों में आईटीसी नहीं मिल रही है। जबकि स्वत: ही आईटीसी मिल जानी चाहिए।
वहीं यूपीसीडा से भी उद्यमी परेशान है। 20 रुपये मेंटेनेंस शुल्क और एक प्रतिशत कूड़ा शुल्क देने के बाद भी सुविधा नहीं मिल रही। कूड़ा भी समय से नहीं उठाया जाता है। निवेश मित्रा पोर्टल सिंगल विंडो सिस्टम नहीं है। सेक्टर की सड़कों पर सब्जी मंडी लगती है। सेक्टर में नाली और सीवर लाइन नहीं है। बारिश में सड़कों पर पानी भर जाता है। आग की समस्या को लेकर एक ओवरहेड टैंक बनना चाहिए जिससे दमकल वाहनों को तत्काल पानी मिल सके।
गैस की किल्लत, महंगाई की मार के बाद अब वेतन वृद्धि से उद्योगों को काफी नुकसान होगा। संचालन करना मुश्किल हो रहा है। -हरीश कुमार
मेंटेनेंस शुल्क देने के बाद भी समस्या जस की तस है। हर साल मोटी धनराशि देने के बाद भी कूड़ा निस्तारण की सुविधा नहीं है।मनोज सिंघल
कामगारों को प्रशिक्षण देने की जरूरत है। उनका कौशल बढ़ेगा तो उद्योगों को भी फायदा होगा। कौशल प्रशिक्षण सेंटर खोलने चाहिए।
एसपी सिकरवार
उद्यमियों को लिए सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए। जहां किसी भी एनओसी के लिए आवेदन की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए। अभी ऐसा नहीं है। - मयंक गोयल
सेक्टर की सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। नए उत्पादों की अनुमति की प्रक्रिया में सरलता और पारदर्शिता होनी चाहिए। - गुरदीप सिंह तुली
मेंटेनेंस शुल्क देने के बाद भी सेक्टर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। जीएसटी स्लैब व आईटीसी की प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। -पीके तिवारी
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- बोले-कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने से पहले अनुमति जरूरी पर अनुमति मिलने तक भाग जाते है खरीदार
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक सेक्टर साइट-5 के उद्यमी सरकार के बढ़ा वेतन देने के आदेश का पालन करने को तैयार हैं। उद्यमियों का कहना है कि श्रमिकों की तरह सरकार को उनकी भी सुननी चाहिए। सरकार की नीतियों से नाखुश उद्यमी कहते हैं कि कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने की अनुमति देने में अभी भी दो से तीन माह का समय लगता है। तब तक खरीदार ऑर्डर रद्द कर देते हैं।
औद्योगिक सेक्टर साइट-5 में आयोजित अमर उजाला संवाद में उद्यमियों ने बताया कि सरकार ने श्रमिकों का वेतन बढ़ा दिया है इसके साथ ही उनका उनका कौशल भी बढ़ाना चाहिए। आरोप है कि श्रमिक काम नहीं करते है। देर तक मोबाइल देखते रहते हैं। उद्यमी कहते हैंं कि वह मई में श्रमिकों को बढ़ा हुआ वेतन देने को तैयार है लेकिन सरकार को उनकी परेशानी भी दूर करनी चाहिए। राहत पैकेज देने के साथ टैक्स में छूट दी जाए। वेतन बढ़ने से उनका मुनाफा 5 प्रतिशत से 2 प्रतिशत रह जाएगा। उद्यमियों ने कहा कि सरकार ने नए-नए नियम बना रखे हैं, जो उद्यमियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। एक कॉस्मेटिक उत्पाद के उत्पादन करने की पहले अनुमति लेनी होती है। जो 2 से 3 दिन में मिलनी चाहिए पर यहां 2 से 3 माह लगते है। उसके लिए भी लखनऊ जाकर पैरवी करनी पड़ती है। जीएसटी स्लैब भी ठीक नहीं है। करीब 18 प्रतिशत जीएसटी के साथ माल खरीद रहे है और 5 प्रतिशत जीएसटी के साथ उत्पाद बेचा जा रहा है। इस तरह के मामलों में आईटीसी नहीं मिल रही है। जबकि स्वत: ही आईटीसी मिल जानी चाहिए।
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वहीं यूपीसीडा से भी उद्यमी परेशान है। 20 रुपये मेंटेनेंस शुल्क और एक प्रतिशत कूड़ा शुल्क देने के बाद भी सुविधा नहीं मिल रही। कूड़ा भी समय से नहीं उठाया जाता है। निवेश मित्रा पोर्टल सिंगल विंडो सिस्टम नहीं है। सेक्टर की सड़कों पर सब्जी मंडी लगती है। सेक्टर में नाली और सीवर लाइन नहीं है। बारिश में सड़कों पर पानी भर जाता है। आग की समस्या को लेकर एक ओवरहेड टैंक बनना चाहिए जिससे दमकल वाहनों को तत्काल पानी मिल सके।
गैस की किल्लत, महंगाई की मार के बाद अब वेतन वृद्धि से उद्योगों को काफी नुकसान होगा। संचालन करना मुश्किल हो रहा है। -हरीश कुमार
मेंटेनेंस शुल्क देने के बाद भी समस्या जस की तस है। हर साल मोटी धनराशि देने के बाद भी कूड़ा निस्तारण की सुविधा नहीं है।मनोज सिंघल
कामगारों को प्रशिक्षण देने की जरूरत है। उनका कौशल बढ़ेगा तो उद्योगों को भी फायदा होगा। कौशल प्रशिक्षण सेंटर खोलने चाहिए।
एसपी सिकरवार
उद्यमियों को लिए सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए। जहां किसी भी एनओसी के लिए आवेदन की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए। अभी ऐसा नहीं है। - मयंक गोयल
सेक्टर की सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। नए उत्पादों की अनुमति की प्रक्रिया में सरलता और पारदर्शिता होनी चाहिए। - गुरदीप सिंह तुली
मेंटेनेंस शुल्क देने के बाद भी सेक्टर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। जीएसटी स्लैब व आईटीसी की प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। -पीके तिवारी

ग्रेटर नोएडा के साइट पांच में अमर उजाला द्वारा आयोजित उद्यमी संवाद में समस्याओ को लेकर चर्चा कर

ग्रेटर नोएडा के साइट पांच में अमर उजाला द्वारा आयोजित उद्यमी संवाद में समस्याओ को लेकर चर्चा कर

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ग्रेटर नोएडा के साइट पांच में अमर उजाला द्वारा आयोजित उद्यमी संवाद में समस्याओ को लेकर चर्चा कर

ग्रेटर नोएडा के साइट पांच में अमर उजाला द्वारा आयोजित उद्यमी संवाद में समस्याओ को लेकर चर्चा कर

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